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भारत की लगेज इंडस्ट्री लगातार मजबूत हो रही है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी. हाल ही में क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 (FY26) तक देश की लगेज इंडस्ट्री 5-7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है.वर्तमान में भारत की लगेज इंडस्ट्री का आकार लगभग 18,000 करोड़ रुपये है.पिछले तीन वर्षों में यह इंडस्ट्री करीब 3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से आगे बढ़ी है.
रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री की इस वृद्धि के पीछे छुट्टियों पर घूमने का बढ़ता चलन और कॉर्पोरेट यात्रा का विस्तार सबसे बड़ा कारण है.लोग अब पहले की तुलना में ज्यादा ट्रैवल करने लगे हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म का विस्तार हुआ है, जिससे लगेज की मांग भी लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा, हार्ड लगेज यानी मजबूत और टिकाऊ बैग्स की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है.
क्रिसिल रेटिंग्स का कहना है कि आने वाले समय में नए जमाने के मैन्युफैक्चरर्स यानी आधुनिक डिजाइनों और ई-कॉमर्स पर फोकस करने वाली कंपनियों का दबदबा और बढ़ेगा। ये कंपनियां अभी लगभग 20 प्रतिशत मार्केट शेयर रखती हैं, लेकिन FY26 तक यह बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. वहीं, पुराने मैन्युफैक्चरर्स की वृद्धि दर एकल अंक यानी अपेक्षाकृत धीमी रहेगी.
नए खिलाड़ियों को फायदा इसलिए मिल रहा है क्योंकि वे कम लागत में प्रोडक्शन करते हैं, ओवरहेड खर्च को कंट्रोल करते हैं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके व्यापक ग्राहक आधार तक पहुंचते हैं. साथ ही, उनके पास आधुनिक डिजाइन और स्टाइलिश प्रोडक्ट्स की बड़ी रेंज मौजूद रहती है, जो खासकर शहरी ग्राहकों को आकर्षित करती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठित सेगमेंट की कंपनियां इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगी. वर्तमान में संगठित क्षेत्र के पास कुल मार्केट का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है. संगठित कंपनियां ब्रांड वैल्यू, गुणवत्ता और बड़े वितरण नेटवर्क के कारण ग्राहकों का भरोसा जीत रही हैं. यही वजह है कि आने वाले समय में यह हिस्सेदारी और बढ़ सकती है.
आजकल ज्यादातर ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। लगेज इंडस्ट्री में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है, पहले जहां ग्राहक ऑफलाइन स्टोर्स पर ही निर्भर रहते थे, अब वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से आसानी से नए और मॉडर्न लगेज खरीद रहे हैं. इससे नए खिलाड़ियों को फायदा मिल रहा है, जो कम दाम पर अच्छे डिजाइन और क्वालिटी वाले प्रोडक्ट उपलब्ध कराते हैं,
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री का परिचालन मार्जिन भी सुधरेगा। यह 150-200 आधार अंक (BPS) बढ़कर 9.5-10.0 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, इसके पीछे कच्चे माल की कीमतों में कमी और पुराने खिलाड़ियों की कम मार्जिन वाली इन्वेंट्री के खत्म होने जैसे कारण हैं. इससे कंपनियों की कमाई में इजाफा होगा और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ेगी.
भारत के शहरी उपभोक्ता अब केवल टिकाऊपन पर ध्यान नहीं देते, बल्कि वे डिजाइन, सौंदर्य और उपयोगिता को भी प्राथमिकता देते हैं. यही कारण है कि आधुनिक और आकर्षक डिजाइनों वाले बैग्स की मांग बढ़ी है. दूसरी ओर, ग्रामीण ग्राहक भी धीरे-धीरे पारंपरिक सामान से हटकर बेहतर और स्टाइलिश लगेज को अपनाने लगे हैं. यह बदलाव इंडस्ट्री के लिए बड़े अवसर लेकर आया है.
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा का कहना है कि नए जमाने के मैन्युफैक्चरर्स की बाजार हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है और यह आगे भी बढ़ेगी.वहीं, पुराने खिलाड़ी अपनी ऑफलाइन मौजूदगी के साथ-साथ ऑनलाइन चैनलों में भी निवेश कर रहे हैं ताकि प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें.
कुल मिलाकर कहा जाए तो भारत की लगेज इंडस्ट्री आने वाले समय में और मजबूत होगी. पर्यटन का विस्तार, बढ़ता शहरीकरण, ऑनलाइन शॉपिंग का चलन और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद इस इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. FY26 तक यह इंडस्ट्री 5-7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और संगठित व आधुनिक खिलाड़ी इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे.
5 FAQs:
Q-भारत की लगेज इंडस्ट्री का वर्तमान आकार कितना है?
लगभग 18,000 करोड़ रुपये
Q-FY26 तक लगेज इंडस्ट्री कितनी तेजी से बढ़ सकती है?
5-7% की वार्षिक दर से
Q-पिछले तीन वर्षों में इस इंडस्ट्री की वृद्धि दर कितनी रही?
करीब 3% CAGR
Q-यह अनुमान किसकी रिपोर्ट में बताया गया है?
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में
Q- लगेज इंडस्ट्री की ग्रोथ के पीछे प्रमुख कारण क्या हैं?
बढ़ती ट्रैवल डिमांड, ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की मांग और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि.
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