बदला भारत का वर्कप्लेस! अब पुरुष को सैलरी में भी महिलाएं दे रही हैं बराबरी की टक्कर,ग्लोबल रिपोर्ट ने दिखाए चौंकाने वाले आंकड़े!

नई ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार भारत में पुरुष और महिला कर्मचारियों के वेतन में अंतर अब काफी कम हो गया है. कंपनियां अब जेंडर के बजाय कौशल, अनुभव और परफॉर्मेंस को महत्व दे रही हैं, जिससे वर्कप्लेस में पॉज़िटिव बदलाव दिख रहा है.
बदला भारत का वर्कप्लेस! अब पुरुष को सैलरी में भी महिलाएं दे रही हैं बराबरी की टक्कर,ग्लोबल रिपोर्ट ने दिखाए चौंकाने वाले आंकड़े!

भारत में रोजगार और सैलरी पैटर्न से जुड़े एक ताज़ा आंकड़े ने एक बड़ा बदलाव दिखाया है. असल में एक लंबे समय से यह माना जाता था कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम सैलरी मिलती है. लेकिन हाल ही में जारी एक ग्लोबल रिपोर्ट ने इस सोच को बदलने वाला नया संकेत दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है, जहां पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच वेतन का अंतर काफी कम हो चुका है. यह देश के रोजगार बाजार और कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में एक सकारात्मक बदलाव को पेश करता है.

महिला और पुरुष की सैलरी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पुरुष और महिला कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग 13,000 डॉलर से 23,000 डॉलर (लगभग ₹10 लाख से ₹19 लाख) के बीच है. यह समानता बताती है कि अब कंपनियां वेतन तय करने में कौशल, अनुभव और परफॉर्मेंस जैसे मानकों को प्राथमिकता दे रही हैं, सिर्फ जेंडर को नहीं। वेतन का यह डेटा पूरी तरह से निष्पक्ष और डेटा विश्लेषण पर आधारित बताया गया है.

सैलरी को लेकर रिपोर्ट में आकंड़े

यह रिपोर्ट ग्लोबल वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी Deal ने जारी की है, जिसने 150 देशों के 10 लाख से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट और 35,000 कंपनियों की सैलरी जानकारी का विश्लेषण किया. इसका उद्देश्य दुनियाभर में रोजगार और सैलरी के बदलते ट्रेंड को समझना था.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में इंजीनियरिंग, डेटा और तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों की औसत सैलरी में पिछले एक साल में 40% तक की कमी आई है. 2024 में जहां इन पेशेवरों की औसत सैलरी 36,000 डॉलर थी, वहीं 2025 में यह घटकर 22,000 डॉलर रह गई है. यह बदलाव ग्लोबल टेक सेक्टर में मंदी और कंपनियों के खर्च कम करने की नीतियों का असर माना जा रहा है.

रिपोर्ट बताती है कि भारत में हाइब्रिड वर्क मॉडल तेज़ी से स्थिर हो चुका है.लगभग 60-70% कर्मचारी फुल टाइम, जबकि 30-40% कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट या फ्रीलांस आधार पर काम कर रहे हैं. इससे स्पष्ट है कि कंपनियां अब लचीले कार्य मॉडल को अपनाने में सहज हैं. डील के एशिया-पैसिफिक रीजन के जनरल मैनेजर मार्क सैमलाल ने कहा कि पुरुष और महिला कर्मचारियों के वेतन में अंतर कम होना समाज और कॉर्पोरेट दोनों के लिए बड़ा सकारात्मक बदलाव है. यह दर्शाता है कि कंपनियां अब अधिक पारदर्शी और योग्यता-आधारित सिस्टम की ओर बढ़ रही हैंय

दुनियाभर में सैलरी के आंकड़े

दुनियाभर में औसत वेतन के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सबसे ऊपर हैं. वहीं, AI, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे हाई-डिमांड सेक्टर्स में कर्मचारियों को औसतन 20-25% अधिक सैलरी मिलती है क्योंकि इन क्षेत्रों में कौशल वाले पेशेवरों की कमी है.रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि टेक प्रोफेशनल्स को वेतन के साथ कंपनी में हिस्सेदारी (ESOP) या शेयर आधारित पैकेज भी दिए जा रहे हैं, जो भारत और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.हालांकि अभी भी दुनिया में टेक और प्रोडक्ट सेक्टर में जेंडर पे गैप मौजूद है, लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत इस गैप को सबसे तेज़ी से कम करने वाले देशों में है.

5 FAQs

Q1. भारत में जेंडर पे गैप क्या है?
यह पुरुष और महिला कर्मचारियों के वेतन में अंतर को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में यह अंतर अब काफी कम हो गया है.

Q2. यह रिपोर्ट किसने जारी की है?
यह रिपोर्ट ग्लोबल वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी Deal द्वारा जारी की गई है, जिसने 150 देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया.

Q3. भारत में औसत सैलरी रेंज कितनी बताई गई है?
भारत में कर्मचारियों की औसत वार्षिक सैलरी लगभग $13,000 से $23,000 (₹10 लाख से ₹19 लाख) के बीच बताई गई है.

Q4. किन क्षेत्रों में सैलरी में गिरावट देखी गई है?
इंजीनियरिंग, डेटा और टेक सेक्टर में औसत सैलरी में पिछले वर्ष की तुलना में 40% तक की कमी दर्ज की गई है.

Q5. कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा सैलरी दे रहे हैं?
AI, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे हाई-डिमांड सेक्टर्स में प्रोफेशनल्स को 20-25% अधिक वेतन मिलता है.

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