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वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और व्यापारिक तनाव के माहौल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने FY26 की दूसरी तिमाही में रफ्तार पकड़ी है. वित्त मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में अमेरिका द्वारा भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाने के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका सीमित प्रभाव पड़ा है और ग्रोथ आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, कम महंगाई, बेहतर मॉनसून और GST सुधारों के असर से भारत की विकास दर को स्थिर सहारा मिल रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सप्लाई-साइड हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स ने बेहतर प्रदर्शन दिखाया है, जबकि मांग के मोर्चे पर GST दरों में कटौती और त्योहारी सीजन की वजह से खपत में तेजी बनी हुई है. इसी आधार पर IMF और RBI ने FY26 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान क्रमशः 6.4 और 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 और 6.8 प्रतिशत कर दिया है. सरकार के मुताबिक कम GST दरें उपभोक्ता पर टैक्स का बोझ घटाएंगी, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
निर्यात मोर्चे पर भी भारत ने मजबूती दिखाई है. रिपोर्ट बताती है कि सेवा क्षेत्र का निर्यात अभी भी मजबूत बना हुआ है और यह माल व्यापार में आई कमी की भरपाई कर रहा है. साथ ही, सितंबर 2025 के आंकड़ों में यह संकेत मिला है कि भारत अपने निर्यात बाजारों में डाइवर्सिफाई कर रहा है. बढ़ते हुए FDI इनफ्लो दिखाते हैं कि ग्लोबल निवेशक भारत को अभी भी आकर्षक निवेश गंतव्य मान रहे हैं. वहीं, हालिया नीति सुधारों, खासकर GST रेट रेशनलाइजेशन, से महंगाई भी नियंत्रण में बनी रहने की उम्मीद है.
मौद्रिक नीति समिति ने एक बार फिर रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है और औसत हेडलाइन मुद्रास्फीति के अनुमान को 2025–26 के लिए पहले के 3.7 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है. चालू तिमाही में मुद्रास्फीति 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि चौथी तिमाही और FY27 की शुरुआत में मामूली बढ़त देखी जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार कोर इंफ्लेशन पूरी अवधि में सुस्त रहने की उम्मीद है.
कृषि क्षेत्र में भी रुझान पॉजिटिव हैं. खरीफ बुवाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है और अनाज व दलहन की पैदावार बेहतर रहने की संभावना है. भले ही तिलहन और नकदी फसलों के तहत बोई गई जमीन में कुछ कमी आई हो और मौसम की अनियमितताओं से नुकसान हुआ हो, लेकिन नजरिया अनुकूल है. इससे ग्रामीण आय और खरीफ के बाद बाजार स्थिरता को सहारा मिलने की संभावना है.
वित्तीय क्षेत्र में बैंक लोन ग्रोथ में कुछ नरमी जरूर देखी गई है, लेकिन गैर-बैंकिंग स्रोतों से मिलने वाले फंड ने इस गिरावट की पूर्ति की है. सरकार को उम्मीद है कि RBI की विकासात्मक और विनियामक नीतियों के पूर्ण क्रियान्वयन से लोन डिस्बर्समेंट की दक्षता बढ़ेगी और बैंकिंग तंत्र और मजबूत बनेगा. यह भी माना जा रहा है कि इससे भारत बेहतर परिस्थितियों में वैश्विक वित्तीय बाजारों से अधिक गहराई से जुड़ सकेगा.
हालांकि, वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं और बाहरी मांग पर इनका असर देखा जा सकता है. इसके बावजूद सरकार को भरोसा है कि संरचनात्मक सुधारों, विशेष तौर पर GST 2.0 जैसी पहलों से भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम रहेगी और FY26 में विकास की रफ्तार जारी रहेगी.