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सोने के आयात में आया बड़ा उछाल (प्रतीकात्मक इमेज/AI/Chat GPT)
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. इस बीच भारत के लिए इंपोर्ट और एक्सपोर्ट और व्यापार घाटे के मोर्चे पर अच्छी खबर आई है. आयात और निर्यात में उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863.8 बिलियन डॉलर रहा है, जो पिछले साल की तुलना में 4.6 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है. वहीं, केवल अप्रैल में 80.80 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ है. युद्ध के बावजूद अप्रैल में खास तौर से मिडिल ईस्ट के देशों में निर्यात में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.
आयात और निर्यात दोनों के बढ़ने के कारण वस्तुओं का व्यापार घाटा 27.10 अरब डॉलर से बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया है.
वस्तुओं के निर्यात में 14% की बढ़ोतरी
अप्रैल 2026 व्यापार के मुख्य आंकड़े (अरब डॉलर में)
| डीटेल | अप्रैल 2025 (US$ Billion) | अप्रैल 2026 (US$ Billion) | ट्रेंड |
| मर्चेंडाइज निर्यात | 38.28 | 43.56 | वृद्धि |
| मर्चेंडाइज आयात | 65.38 | 71.94 | वृद्धि |
| मर्चेंडाइज व्यापार घाटा | 27.1 | 28.38 | वृद्धि |
| कुल व्यापार घाटा (वस्तु+सेवा) | 11.16 | 7.81 | गिरावट |
वित्त वर्ष 2026 में भारत के सोने के आयात में बड़ा उछाल आया है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल गोल्ड इंपोर्ट वैल्यू टर्म के आधार पर 24.09% की बढ़ोतरी के साथ 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
वॉल्यूम में 4.76% की कमी
मुख्य कमोडिटी का आयात-निर्यात (अप्रैल 25 Vs अप्रैल 26)
| कमोडिटी | प्रकार | अप्रैल 2025 (US$ Bn) | अप्रैल 2026 (US$ Bln) |
| पेट्रोलियम उत्पाद | निर्यात | 7.12 | 9.59 |
| इंजीनियरिंग गुड्स | निर्यात | 9.52 | 10.35 |
| पेट्रोलियम क्रूड एवं उत्पाद | आयात | 20.7 | 18.63 |
| सोना | आयात | 3.1 | 5.63 |
कच्चे तेल और उससे संबंधित प्रोडक्ट्स के आयात में अप्रैल 2026 में राहत मिली है. अप्रैल 2025 के 20.70 अरब डॉलर से घटकर 18.63 अरब डॉलर रह गया है. दूसरी तरफ भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 7.12 अरब डॉलर से बढ़कर 9.59 अरब डॉलर हो गया है. इस संदर्भ में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ किया है कि तेल कीमतों का इतना प्रभाव नहीं होगा, हालांकि पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव है. राजेश अग्रवाल ने कहा कि 1 ट्रिलियन डॉलर एक्सपोर्ट लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं. एक्स्पोर्ट प्रमोशन मिशन के जरिए तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. स्टेकहोल्डर्स और FTA के जरिए इसको पाना असंभव नहीं लगता कुछ विशेष क्षेत्रों में स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर के पॉलिसी बनायेंगे.