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अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है. माना जा रहा है इससे 50 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा. कई सारे सेक्टर्स पर इसके बुरे परिणाम देखने को मिल सकते हैं. सरकार इस असर को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत की यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है.
एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा, "हम यूरोपियन यूनियन के साथ Free Trade Agreement को लेकर एडवांस स्टेज में पहुंच गए हैं. हाल ही में इसे लेकर ब्रसेल्स में शीर्ष अधिकारियों द्वारा बैठक की गई है. अगले राउंड की बातचीत के लिए ईयू के ट्रेड कमिश्नर वाल्डिस डोम्ब्रोव्स्की 12 सितंबर को आ रहे हैं."
गोयल ने कहा कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं और जैसे-जैसे सीमा संबंधी मुद्दे सुलझ रहे हैं, तनाव कम होना स्वाभाविक है. इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में बोलते हुए गोयल ने कहा, "हम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं." भारत को प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू होने और अटके हुए सभी मुद्दों के सुलझाने की उम्मीद है.
Bilateral Trade Agreement के लिए छठे दौर की बातचीत 25 अगस्त को नई दिल्ली में होनी थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने यह दौरा रद्द कर दिया. पिछले महीने, गोयल ने कहा था कि अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के लिए व्यापार वार्ता में सरकार का दृष्टिकोण राष्ट्रीय हित और भारतीय उद्योगों को प्राथमिकता देना है.
वाणिज्य मंत्री ने कहा, "मेरा हमेशा से एक स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है. जब हम व्यापार समझौते करते हैं, तो मुझे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होती है. अब हम आमतौर पर विभिन्न देशों के साथ बातचीत प्री-अंडरस्टैंडिंग के साथ शुरू करते हैं कि आप मेरी संवेदनशीलता का सम्मान करते हैं, मैं आपकी संवेदनशीलता का सम्मान करता हूं. दुनिया के हर देश में चिंता के क्षेत्र हैं."
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि "दो महान देश इस समस्या का समाधान निकाल लेंगे", क्योंकि ट्रंप प्रशासन को भारत के साथ व्यापार विवाद जल्द ही सुलझने की उम्मीद है.फॉक्स बिजनेस से बात करते हुए, बेसेंट ने कहा: "मुझे लगता है कि अंततः भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला लोकतंत्र है. उनके मूल्य रूस की तुलना में हमारे और चीन के ज्यादा करीब हैं."