India on Russia Oil: 74 दिनों का 'कवच' और ट्रंप को दो टूक! रूस से तेल के सवाल पर भारत ने दुनिया को दिखा दी अपनी ताक़त!

India on Russia Oil: रूसी तेल पर अमेरिकी दावों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिसरी और मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत का रुख साफ किया है. जानें संकट के समय भारत के पास कितने दिनों का बैकअप है और क्या है नई तेल नीति.
India on Russia Oil: 74 दिनों का 'कवच' और ट्रंप को दो टूक! रूस से तेल के सवाल पर भारत ने दुनिया को दिखा दी अपनी ताक़त!

भारत अपनी जरूरत का 80 से 85 फीसदी तेल बाहर से मंगाता है. ऐसे में किसी के दबाव में आकर फैसला लेना करोड़ों भारतीयों की रसोई और उनकी जेब पर भारी पड़ सकता है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी और तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा से लेकर मीडिया तक जो संदेश दिया है, उसका सीधा मतलब यही है कि भारत की चाबी सिर्फ भारत के पास है.

भारत न झुकेगा, न किसी पर निर्भर होगा

अमेरिकी दावों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जो बातें कहीं, उनमें भारत की नई और मजबूत कूटनीति की झलक मिलती है. उन्होंने बहुत साफ़ शब्दों में कहा कि भारत न तो किसी एक देश पर निर्भर है और न ही भविष्य में ऐसा होने का उसका कोई इरादा है. हमारी पहली और आखिरी प्राथमिकता अपने नागरिकों को सही कीमत पर सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा मुहैया कराना है.

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मिसरी ने स्पष्ट किया कि तेल आयात का फैसला कोई राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यावसायिक आधार पर लिया जाता है. तेल कंपनियां मार्केट की हालत, लागत, जोखिम और तेल की उपलब्धता को देखकर ही अपनी खरीदारी तय करती हैं. इसका मतलब यह है कि भारत को जहां से भी अपनी शर्तों पर सस्ता और बेहतर तेल मिलेगा, वह वहीं से खरीदेगा, चाहे वह रूस हो या कोई और देश.

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74 दिनों का 'सुरक्षा चक्र'

जब दुनिया में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले तेल की सप्लाई पर आंच आती है. लेकिन भारत ने इसका काट पहले ही तैयार कर लिया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में देश को एक बड़ी राहत वाली खबर दी. उन्होंने बताया कि भारत के पास आज इतना 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (सुरक्षित भंडार) है कि वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी हम 74 दिनों तक बिना किसी बाहरी मदद के अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं.

यह 74 दिनों का बैकअप भारत के लिए एक बड़े रक्षा कवच की तरह है. पुरी साहब के मुताबिक, भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जा सकता. देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर रिफाइनरियों का मजबूत जाल इस सुरक्षा को और पुख्ता करता है.

भारत की नई और स्मार्ट तेल नीति

विक्रम मिसरी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द का इस्तेमाल किया, 'विविधीकरण' (Diversification). यही भारत की ऊर्जा सुरक्षा का असली मंत्र है. भारत अब अपनी सारी उम्मीदें एक ही देश से नहीं बांध रहा है. हम अपनी सप्लाई को अलग-अलग देशों में बांट रहे हैं ताकि अगर कभी एक जगह संकट आए, तो दूसरी जगह से आपूर्ति जारी रहे.

भारत की तेल नीति अब पूरी तरह से स्वतंत्र है. यह स्रोत की विविधता, बाज़ार की स्थितियों और लागत पर टिकी है. कंपनियां अपने हिसाब से व्यावसायिक फैसले लेती हैं और सरकार का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि देश के 140 करोड़ लोगों को ऊर्जा की कमी न हो. यह आत्मनिर्भर भारत की वह तस्वीर है, जो दुनिया को बता रही है कि हम किसी की 'वॉचलिस्ट' से नहीं, बल्कि अपने 'विज़न' से चलते हैं.

क्या है भारत का रुख?

भारत का रुख अब बिल्कुल आईने की तरह साफ़ है. अमेरिका के दावे अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन भारत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 74 दिनों का यह बैकअप सबसे बड़ा सच है. हम किसी एक पाले में बैठने के बजाय हर उस रास्ते पर चलेंगे जो देशहित में होगा. भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्रोतों का विविधीकरण जारी रखेगा और बाज़ार की स्थितियों के हिसाब से ही अपने फैसले लेगा.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या भारत ने रूसी तेल लेना बंद कर दिया है?

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने साफ़ किया है कि तेल खरीद का फैसला बाज़ार की स्थितियों और लागत पर निर्भर करता है. भारत अपनी जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल कर रहा है.

Q2 अगर दुनिया में तेल की सप्लाई रुक जाए, तो भारत के पास क्या विकल्प है?

भारत के पास 74 दिनों का सुरक्षित तेल भंडार (Strategic Reserve) मौजूद है. तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, वैश्विक संकट की स्थिति में यह भंडार देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.

Q3 भारत अपनी जरूरत का कितना तेल आयात करता है?

भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है.

Q4 भारत की नई तेल नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे और भारतीय उपभोक्ताओं को सही और किफायती दाम पर ईंधन मिल सके.

Q5 तेल खरीद का फैसला कौन लेता है?

भारत में तेल कंपनियां अपनी व्यावसायिक गणना, जोखिम और लाभ के आधार पर स्वतंत्र रूप से तेल खरीदने का निर्णय लेती हैं.

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