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भारत आने वाले सालों में तेजी से बढ़ती इकॉनमी बनने की ओर बढ़ रहा है. केंद्र सरकार का कहना है कि देश का टारगेट 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनना है. इस टारगेट को हासिल करने में सबसे अहम भूमिका मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की होगी. सरकार ने इसके लिए कई सुधार, प्रोत्साहन योजनाएं और मजबूत सप्लाई चेन का रोडमैप तैयार किया है.
बीते महीनों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने जबरदस्त गति पकड़ी है.यह केवल सरकार के दावों में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और आर्थिक आंकड़ों में भी साफ झलक रहा है.
फिच रेटिंग्स, आईएमएफ और एसएंडपी ग्लोबल ने भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया है.
मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) 16 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.
जून 2025 में पीएमआई 58.4 पर था, जो जुलाई में बढ़कर 59.1 और अगस्त में 59.3 हो गया, यह 17 साल में सबसे तेज सुधार हैय
यह साफ संकेत है कि भारत की इंडस्ट्री ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रही है.
भारत सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
पीएलआई योजना (Production Linked Incentive): घरेलू और विदेशी कंपनियों को भारत में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन.
नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन: मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़ाकर रोजगार और उत्पादन को मजबूत करना.
स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम: युवाओं को नई तकनीक और इंडस्ट्री-रेडी कौशल सिखाना.
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट का ग्रोथ
जुलाई 2025 में औद्योगिक प्रोजक्शन सूचकांक (IIP) में सालाना आधार पर 3.5% की ग्रोथ दर्ज की गई. जून में यह केवल 1.5% था. यानी मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली जैसे क्षेत्रों में उत्पादन लगातार बढ़ रहा है.
अप्रैल-अगस्त 2025 में कुल एक्सपोर्ट 6.18% बढ़कर 349.35 अरब डॉलर हो गया.
कमर्शियल एक्सपोर्ट 179.60 अरब डॉलर से बढ़कर 184.13 अरब डॉलर हो गया.
इंपोर्ट में यह उछाल भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावर बनने की दिशा में बड़ी सफलता है.
आर्थिक आकलनों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का आकार फाइनेंशियल ईयर 2026 तक 87,57,000 करोड़ रुपए (लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच सकता हैय वहीं, 2030 तक यह हर साल 43,43,500 करोड़ रुपए (500 बिलियन डॉलर) से ज्यादा का योगदान देगा.
यह लक्ष्य भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है.
अगस्त 2025 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की बेरोजगारी दर 5 महीने के निचले स्तर पर यानी 5% पर आ गई है.मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री सेक्टर में रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं.
दुनिया भर में सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है,कंपनियां चीन के विकल्प तलाश रही हैं और भारत इसमें सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरा है.
बड़ी कंपनियां अब भारत में निवेश और उत्पादन को प्राथमिकता दे रही हैं.
देश में इनोवेशन, बड़े पैमाने पर उत्पादन और टेक्नोलॉजी की वजह से नए अवसर बन रहे हैं.
अगर यह रफ्तार जारी रही, तो भारत आने वाले समय में केवल "विश्व का कारखाना" ही नहीं, बल्कि इनोवेशन और लीडरशिप का ग्लोबल हब बन सकता है.
भारत ने 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का जो लक्ष्य रखा है, उसमें मैन्युफैक्चरिंग सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा.नीतिगत समर्थन, ग्लोबल निवेश और निर्यात वृद्धि के साथ भारत लगातार आगे बढ़ रहा है. अगर यही गति बनी रही, तो आने वाले सालों में भारत न केवल दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा, बल्कि रोजगार, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का भी लीडर बन जाएगा.
5 FAQs
Q1: भारत का 2047 तक आर्थिक लक्ष्य क्या है?
A1: भारत 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रख रहा है.
Q2: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भारत की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान होगा?
A2: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विकास का प्रमुख इंजन होगा और रोजगार, उत्पादन एवं निर्यात में योगदान देगा.
Q3: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कर रही है?
A3: PLI योजना, नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम जैसी नीतियों के जरिए समर्थन दिया जा रहा है.
Q4: भारत का निर्यात और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन हाल में कैसा रहा?
A4: अप्रैल-अगस्त 2025 में कुल निर्यात 6.18% बढ़कर 349.35 अरब डॉलर हुआ और जुलाई 2025 में औद्योगिक उत्पादन 3.5% बढ़ा,
Q5: भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का मौका क्यों मिल रहा है?
A5: वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और निवेश, बड़े पैमाने पर उत्पादन तथा टेक्नोलॉजी की वजह से भारत एक पसंदीदा गंतव्य बन रहा है.
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