भारत ने पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में दी बड़ी ढील, क्या अब चीन से निवेश का नया दौर शुरू हो रहा है!

भारत सरकार ने प्रेस नोट 3, 2020 में संशोधन करते हुए सीमा साझा करने वाले पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील दी है. इसका उद्देश्य निवेश की प्रक्रिया को लचीला बनाना है, हालांकि चीन के साथ भारत के व्यापारिक संबंध और निवेश आंकड़े अभी भी एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं.
भारत ने पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में दी बड़ी ढील, क्या अब चीन से निवेश का नया दौर शुरू हो रहा है!

भारत ने पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में दी बड़ी ढील. (Image Source-AI)

भारत सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और निवेश के समीकरणों को एक नया मोड़ दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत उन देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील दी गई है, जो भारत के साथ अपनी ज़मीनी सीमा साझा करते हैं. यह बदलाव प्रेस नोट 3, 2020 के प्रावधानों में संशोधन के जरिए किया गया है.

क्या बदला है नियमों में

साल 2020 में एक सख्त नियम लागू किया गया था. उस समय कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया था कि भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को भारत में निवेश करने से पहले सरकारी मंजूरी लेना जरूरी है. अब ताजा संशोधन के साथ इस प्रक्रिया में कुछ लचीलापन लाया गया है, जिससे पड़ोसी देशों से निवेश का रास्ता पहले के मुकाबले आसान होने की उम्मीद है.

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पड़ोसी देशों की स्थिति

भारत के साथ अपनी सीमा साझा करने वाले देशों की सूची में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं. यह बदलाव इन सभी देशों के लिए लागू होगा, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों की दिशा बदल सकती है.

चीन और भारत का निवेश गणित

चीन भारत का एक बड़ा व्यापारिक भागीदार है, लेकिन अगर हम निवेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में आए कुल FDI में चीन का हिस्सा बहुत ही कम रहा है. चीन भारत में FDI के मामले में 23वें स्थान पर है. इस दौरान भारत में चीन से कुल 2.51 बिलियन डॉलर का निवेश आया, जो कुल इक्विटी इनफ्लो का केवल 0.32 प्रतिशत है.

2020 के बाद बदले रिश्ते

भारत और चीन के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव जून 2020 में आया, जब गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प ने तनाव को चरम पर पहुँचा दिया. यह पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी सैन्य चुनौती थी. इसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए टिकटॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउज़र जैसे 200 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन इन तनावों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार का सिलसिला थमा नहीं, बल्कि बढ़ता ही गया.

व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं?

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से चीन को होने वाला निर्यात 16.66 बिलियन डॉलर से घटकर 14.25 बिलियन डॉलर रह गया, जो 14.5 प्रतिशत की गिरावट थी. वहीं, चीन से भारत आने वाला आयात 101.73 बिलियन डॉलर से बढ़कर 113.45 बिलियन डॉलर हो गया, यानी इसमें 11.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.

ताजा आंकड़ों (वित्तीय वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि) पर गौर करें तो कहानी थोड़ी बदलती दिख रही है. भारत ने चीन को 38.37 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 15.88 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है. इसी दौरान चीन से भारत का आयात भी बढ़कर 108.18 बिलियन डॉलर हो गया है. अभी इस अवधि में व्यापार घाटा 92.3 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया है.

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