अब राशन नहीं, OTT और iPhone पर खर्च कर रहे लोग! भारत में तेजी से बदल रही लोगों की खर्च करने की आदत

Kotak Mutual Fund की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में अब लोग राशन से ज्यादा OTT, मोबाइल, यात्रा और प्रीमियम स्मार्टफोन पर खर्च कर रहे हैं. विदेशी यात्रा और iPhone जैसे प्रोडक्ट्स पर खर्च तेजी से बढ़ा है.
अब राशन नहीं, OTT और iPhone पर खर्च कर रहे लोग! भारत में तेजी से बदल रही लोगों की खर्च करने की आदत

अब राशन नहीं, OTT और iPhone पर खर्च कर रहे लोग! प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

भारत में लोगों की खर्च करने की आदत अब तेजी से बदल रही है. पहले जहां परिवारों के बजट का बड़ा हिस्सा खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होता था, वहीं अब मोबाइल डेटा, OTT प्लेटफॉर्म, प्रीमियम स्मार्टफोन, लाइव कॉन्सर्ट और विदेश यात्रा जैसे खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं.

Kotak Mutual Fund की नई रिपोर्ट “The Great Consumption Shift” में बताया गया है कि भारत की खपत कहानी अब बिल्कुल नई दिशा में आगे बढ़ रही है.

राशन से मोबाइल डेटा तक पहुंची खर्च की कहानी

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों का खर्च अब अनाज से निकलकर मोबाइल डेटा, OTT और प्रीमियम मोबाइल तक पहुंच चुका है. Kotak Mutual Fund ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि “Indian wallet has moved from cereal to data to OTT to mobiles.”

रिपोर्ट में बताया गया कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में खाने-पीने की चीजों पर खर्च का हिस्सा लगातार घटा है. ग्रामीण भारत में घरेलू खर्च में अनाज की हिस्सेदारी 22 फीसदी से घटकर 5 फीसदी रह गई, जबकि शहरी भारत में यह 12 फीसदी से घटकर 4 फीसदी तक आ गई.

विदेश यात्रा पर रिकॉर्ड खर्च

भारतीयों का विदेश घूमने का खर्च भी तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 8 वर्षों में विदेशी यात्रा पर खर्च करीब 450 फीसदी बढ़ गया है.

FY26 में फरवरी तक भारतीयों ने विदेश यात्रा पर करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. रिपोर्ट के अनुसार यह रकम भारत के पूरे बिल्डिंग मटेरियल उद्योग से भी बड़ी हो चुकी है, जिसमें प्लाईवुड, टाइल्स, पाइप और लैमिनेट जैसी इंडस्ट्री शामिल हैं.

अब मोबाइल, कार और शिक्षा बने नए बड़े खर्च

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब शहरी परिवारों के खर्च का बड़ा हिस्सा मोबाइल, ऑटोमोबाइल, घरेलू उपकरण, किराया और शिक्षा पर जा रहा है. Kotak Mutual Fund के मुताबिक यह बदलाव Engel’s Law को दिखाता है, जिसके अनुसार जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वे अपनी कमाई का छोटा हिस्सा खाने-पीने की चीजों पर खर्च करते हैं और ज्यादा पैसा सुविधाओं और बेहतर जीवनशैली पर लगाने लगते हैं.

OTT और प्रीमियम मोबाइल का बढ़ता क्रेज

भारत में OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक FY19 से FY26 के बीच पेड OTT सब्सक्राइबर्स में 40 फीसदी की सालाना दर से बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा hearables यानी ईयरबड्स और ऑडियो डिवाइस बाजार में 52 फीसदी की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई.

रिपोर्ट में Apple India को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है. Kotak Mutual Fund के अनुसार FY26 में Apple India की कमाई Hindustan Unilever Limited यानी HUL से लगभग दोगुनी हो सकती है, जबकि Apple का ग्राहक आधार काफी छोटा है.

महंगे स्मार्टफोन की बढ़ी हिस्सेदारी

हालांकि कुल स्मार्टफोन बिक्री में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन महंगे फोन की मांग तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक ₹30,000 से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की बाजार हिस्सेदारी CY20 में 20 फीसदी थी, जो CY25 तक बढ़कर 26 फीसदी हो गई. यह संकेत देता है कि अब भारतीय ग्राहक महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार हैं.

लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट का बढ़ा बाजार

भारत में लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट का बाजार भी तेजी से बड़ा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की लाइव इवेंट इंडस्ट्री अब करीब ₹20,861 करोड़ की हो चुकी है. 2022 में जहां भारत में 19,000 टिकट वाले लाइव इवेंट्स हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 34,000 तक पहुंच गई. रिपोर्ट ने इसे “going-out boom” बताया है, यानी लोग अब बाहर घूमने, कॉन्सर्ट देखने और अनुभवों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं.

बढ़ रहा EMI और नुकसान का दबाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बढ़ते खर्च के साथ लोगों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. पिछले 7 सालों में 5 बार ऐसा हुआ जब EMI का बोझ सैलरी ग्रोथ से ज्यादा तेजी से बढ़ा. इसके अलावा महामारी के बाद घरेलू वित्तीय बचत का GDP में हिस्सा भी तेजी से घटा है.

F&O और डिजिटल फ्रॉड से बढ़ा नुकसान

Kotak Mutual Fund की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सट्टेबाजी और डिजिटल फ्रॉड का असर अब घरेलू खर्च पर दिखने लगा है. FY22 से FY25 के बीच रिटेल ट्रेडर्स ने Futures & Options यानी F&O सेगमेंट में कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये गंवाए. FY25 में अकेले 91 फीसदी छोटे निवेशकों को नुकसान हुआ.

वहीं पिछले 6 वर्षों में डिजिटल फ्रॉड से करीब ₹53,000 करोड़ का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पहले जो पैसा घरेलू खर्च में इस्तेमाल होता था, उसका बड़ा हिस्सा अब सट्टेबाजी और ऑनलाइन धोखाधड़ी में जा रहा है.

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