भारत बन रहा ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, 2029 तक ₹3 लाख करोड़ के डिफेंस प्रोडक्शन का लक्ष्य

भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का तेजी से विस्तार हो रहा है और प्राइवेट कंपनियों का पार्टिसिपेशन तेजी से बढ़ रहा है. सरकार ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए के डिफेंस प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा है जो FY25 में 1.54 लाख करोड़ का डिफेंस प्रोडक्शन था.
भारत बन रहा ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, 2029 तक ₹3 लाख करोड़ के डिफेंस प्रोडक्शन का लक्ष्य

भारत तेजी से ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में डिफेंस प्रोडक्शन का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तय किया है, जिससे सेना का आधुनिकीकरण तो तेज होगा ही, साथ ही देश की इंडस्ट्रियल क्षमता भी मजबूत होगी.​

‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की बदौलत स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन में पिछले एक दशक में जबरदस्त उछाल आया है. 2014‑15 में जहां डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन केवल 46,429 करोड़ रुपए था, वहीं 2023‑24 में यह 174 फीसदी की छलांग लगाकर रिकॉर्ड 1,27,434 करोड़ रुपए तक पहुंच गया. 2024‑25 में कुल डिफेंस प्रोडक्शन 1.54 लाख करोड़ रुपए के नए उच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान है.​

  • FY2014-15 में डिफेंस प्रोडक्शन 46,429 करोड़ रुपए था.
  • FY2023-24 में यह 1,27,434 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.
  • FY2024‑25 में कुल डिफेंस प्रोडक्शन 1.54 लाख करोड़ रुपए.
  • FY2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
Add Zee Business as a Preferred Source

रक्षा बजट में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2013‑14 में 2.53 लाख करोड़ रुपए रहने वाला रक्षा बजट चालू वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग 6.81 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो सरकार की दीर्घकालिक सुरक्षा और आधुनिकीकरण प्रतिबद्धता को दर्शाता है.​

  • FY2013-14 में रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपए था.
  • चालू वित्त वर्ष में ये 6.81 लाख करोड़ रुपए तक आ गया है.

कुल डिफेंस प्रोडक्शन में सबसे बड़ा योगदान डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) और अन्य सरकारी उपक्रमों का है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 77 फीसदी है, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 23 फीसदी तक पहुंच गई है. बीते एक वर्ष में ही निजी कंपनियों का योगदान 21 से बढ़कर 23 फीसदी हो जाना बताता है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत प्राइवेट प्लेयर्स की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है.

  • निजी कंपनियों का पार्टिसिपेशन बढ़ रहा है.
  • डिफेंस प्रोडक्शन में DPSU​ का योगदान 77%.
  • प्राइवेट कंपनियों का योगदान 23% पर पहुंचा.

निर्यात मोर्चे पर भी भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं. 2013‑14 में जहां रक्षा निर्यात मात्र 686 करोड़ रुपए था, वह 2024‑25 में बढ़कर 23,622 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, यानी करीब 30–34 गुना उछाल. आज भारत अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया समेत 80–100 से अधिक देशों को हथियार, गोला‑बारूद, सब‑सिस्टम, कंप्लीट प्लेटफॉर्म और महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स निर्यात कर रहा है, जिससे ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.​

  • FY2013‑14 में डिफेंस एक्सपोर्ट 686 करोड़ रुपए था.
  • FY2025 में डिफेंस एक्सपोर्ट 23,622 करोड़ रुपए हो गया.

इन सभी उपलब्धियों के पीछे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, इंडिजेनाइजेशन और प्राइवेट पार्टिसिपेशन को बढ़ावा देने वाली नीतिगत पहलें अहम रही हैं. सरकार की ओर से उत्पादन, R&D और एक्सपोर्ट प्रमोशन पर लगातार फोकस ने भारत के मिलिट्री‑इंडस्ट्रियल बेस को नई मजबूती दी है, जिससे देश न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतें डोमेस्टिक स्तर पर पूरी कर पा रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है.

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6