बदलने वाली है दुनिया की आर्थिक तस्वीर! एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को एक साथ जोड़ेगा IMEC

साइप्रस फोरम 2025 में भारत के उच्चायुक्त मनीष ने IMEC को वैश्विक कनेक्टिविटी और व्यापार का नया मॉडल बताया. उन्होंने कहा कि यह गलियारा लॉजिस्टिक्स की लागत घटाएगा, समय बचाएगा और भारत-साइप्रस को नए आर्थिक अवसर देगा. पहले पीएम मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति भी इस पर चर्चा कर चुके हैं.
बदलने वाली है दुनिया की आर्थिक तस्वीर! एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को एक साथ जोड़ेगा IMEC

साइप्रस की राजधानी निकोसिया में आयोजित Cyprus Forum 2025 में भारत के उच्चायुक्त मनीष ने अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और सहयोग पर भारत की सोच साझा की. उन्होंने कहा कि India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) भविष्य में दुनिया की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला बड़ा प्रोजेक्ट है. यह न सिर्फ व्यापार के नए रास्ते खोलेगा बल्कि लॉजिस्टिक्स की लागत घटाएगा और परिवहन समय को भी कम करेगा.

कनेक्टिविटी और विकास का नया मॉडल

उच्चायुक्त ने IMEC को ट्रांसफॉर्मेशनल इनिशिएटिव बताया. उनके मुताबिक यह गलियारा एशिया, खाड़ी देशों और यूरोप को सीधा जोड़ेगा. इससे न सिर्फ नए व्यापारिक मार्ग खुलेंगे बल्कि सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी. खास बात यह है कि इसमें ग्रीन एनर्जी, डिजिटल इंटिग्रेशन और टिकाऊ विकास पर खास जोर दिया गया है.

साइप्रस की अहम भूमिका

उन्होंने साइप्रस को भारत का नेचुरल गेटवे टू यूरोप बताया. यानी यूरोप तक पहुंचने में साइप्रस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दरवाजा है. इस वजह से भारत और साइप्रस के बीच शिपिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल ट्रेड, फाइनेंशियल सर्विसेज और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की अपार संभावनाएं हैं.

सतत विकास और सहयोग पर साझा दृष्टिकोण

भारत और साइप्रस दोनों ही देश टिकाऊ विकास और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भरोसा रखते हैं. यही वजह है कि दोनों की सोच IMEC के मूल उद्देश्यों से पूरी तरह मेल खाती है. इस गलियारे के जरिए पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा, डिजिटल व्यापार और पारदर्शी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

मोदी और साइप्रस राष्ट्रपति की मुलाकात

इससे पहले जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस का दौरा किया था. वहां राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स से उनकी मुलाकात हुई. दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की. उस समय भी IMEC पर विशेष बातचीत हुई थी और इसे क्षेत्रीय शांति और सहयोग का नया पुल बताया गया था.

समुद्री और लॉजिस्टिक्स सहयोग के अवसर

भारत और साइप्रस ने इस बात पर सहमति जताई कि साइप्रस यूरोप में भारत के लिए एक बड़ा हब बन सकता है. यहां भारतीय शिपिंग कंपनियां अपने दफ्तर खोल सकती हैं और साइप्रस की समुद्री सेवाओं के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर्स कर सकती हैं. इससे ट्रांसशिपमेंट, स्टोरेज, वितरण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे.

IMEC से जुड़े वैश्विक फायदे

IMEC का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एशिया से यूरोप तक सामान और सेवाओं के प्रवाह को पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता बना देगा. इसके साथ ही यह गलियारा ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को भी मजबूत करेगा. यही वजह है कि इसे भविष्य का कनेक्टिविटी ब्रिज कहा जा रहा है.

खबर से जुड़े FAQs

1. IMEC क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

IMEC यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor एक आर्थिक गलियारा है जो एशिया, खाड़ी देशों और यूरोप को जोड़कर व्यापार और कनेक्टिविटी को आसान और तेज़ बनाएगा.

2. साइप्रस फोरम 2025 में भारत की क्या भूमिका रही?

भारत के उच्चायुक्त मनीष ने बतौर पैनलिस्ट हिस्सा लिया और IMEC की वैश्विक कनेक्टिविटी, व्यापार और सतत विकास में भूमिका पर अपनी बात रखी.

3. भारत और साइप्रस किन क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं?

दोनों देश शिपिंग, ग्रीन एनर्जी (खासकर ग्रीन हाइड्रोजन), डिजिटल ट्रेड, फाइनेंशियल सर्विसेज और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं.

4. पीएम मोदी और साइप्रस राष्ट्रपति की मुलाकात में क्या चर्चा हुई थी?

जून 2025 की मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और खासतौर पर IMEC पर गहन चर्चा की थी.

5. IMEC से आम तौर पर क्या फायदे होंगे?

IMEC से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, परिवहन समय कम होगा, नए व्यापारिक रास्ते बनेंगे और ग्रीन एनर्जी व डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा.

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