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वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आज पेरिस से एक बहुत ही सुखद और महत्वपूर्ण खबर आई है. पिछले कुछ दिनों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी का डर बना हुआ था. इसी डर को खत्म करने के लिए इंटरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने खजाने से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में लाने का फैसला किया है. आइए, इस ऐतिहासिक फैसले और इसके असर को विस्तार से समझते हैं.
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ऊर्जा बाजार की कमर तोड़ दी है.
हॉर्मुज का महत्व: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल रिफाइंड प्रोडक्ट्स गुजरते हैं. यह दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 25% हिस्सा है.
सप्लाई ठप: युद्ध के कारण यह रास्ता पूरी तरह जोखिम भरा हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में 20% की भारी गिरावट आई है.
रिफाइनरी पर असर: तेल की कमी से रिफाइनरियों का काम रुक गया है, जिससे विशेष रूप से जेट फ्यूल और डीजल की भारी किल्लत हो गई है.
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IEA के सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है:
सबसे बड़ी रिलीज: यह एजेंसी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी इमरजेंसी स्टॉक रिलीज है.
उद्देश्य: हॉर्मुज के बंद होने से जो तेल बाजार से गायब हुआ है, उसकी तुरंत भरपाई करना.
प्रमुख भागीदारों से चर्चा: इस फैसले से पहले सऊदी अरब, ब्राजील जैसे उत्पादकों और भारत व सिंगापुर जैसे बड़े आयातक देशों से गहन चर्चा की गई है.
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IEA ने चेतावनी दी है कि तेल से ज्यादा गंभीर स्थिति गैस मार्केट की है:
LNG सप्लाई रुकी: कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आने वाले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के जहाजों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है.
एशिया पर मार: भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई देशों पर गैस की किल्लत का सबसे बुरा असर पड़ रहा है क्योंकि यहां गैस की मांग बहुत अधिक है.
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फातिह बिरोल ने साफ कहा है कि 40 करोड़ बैरल तेल तात्कालिक राहत तो देगा, लेकिन बाजार में स्थायी स्थिरता तभी आएगी जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाए. यह रिलीज केवल 'मरहम' की तरह है, 'इलाज' तो युद्ध विराम ही है.
IEA का यह कदम उन निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत है जो तेल की कीमतों के $150 पार जाने की आशंका से डरे हुए थे. भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह खबर महंगाई पर लगाम लगाने वाली साबित होगी. आने वाले दिनों में हम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देख सकते हैं.
1- IEA ने कितना तेल बाजार में छोड़ने का फैसला किया है?
IEA ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी रिलीज के तहत 40 करोड़ (400 मिलियन) बैरल तेल जारी किया है.
2- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 25% हिस्सा गुजरता है.
3- इस फैसले का भारत पर क्या असर होगा?
भारत एक बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और महंगाई कम होगी.
4- क्या गैस की सप्लाई भी बहाल होगी?
IEA के अनुसार तेल की भरपाई तो हो सकती है, लेकिन कतर से आने वाली LNG सप्लाई के लिए विकल्प सीमित हैं, जो एशिया के लिए चिंता का विषय है.
5- IEA का मुख्यालय कहां है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है.
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