ICRA का अनुमान, तीसरी तिमाही में धीमी होगी ग्रोथ की रफ्तार! अर्थव्यवस्था में क्या बदल रहा है?

भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तीसरी तिमाही में थोड़ी नरम पड़ सकती है. रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि Q3FY26 में GDP ग्रोथ 7.2% रह सकती है, जो पिछली तिमाही के 8.2% से कम है.
ICRA का अनुमान, तीसरी तिमाही में धीमी होगी ग्रोथ की रफ्तार! अर्थव्यवस्था में क्या बदल रहा है?

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर नई तस्वीर सामने आई है. हर तिमाही की अपनी कहानी होती है लेकिन ICRA के ताजा अनुमान के मुताबिक FY2025-26 की तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ सालाना आधार पर 7.2% रह सकती है. यह आंकड़ा Q2FY26 के 8.2% से कम है.

पहली नजर में यह गिरावट बड़ी नहीं लगती, लेकिन अर्थशास्त्र की दुनिया में 1% का फर्क भी कई संकेत देता है. खासतौर पर तब, जब अलग-अलग सेक्टर अलग दिशा में चलते दिखें.

उद्योग ने दिखाई ताकत, लेकिन…

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ICRA का कहना है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. तीसरी तिमाही में इसकी वृद्धि लगभग 8.3% तक रहने का अनुमान है, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे मजबूत मानी जा रही है.

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मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण गतिविधियों में सुधार ने औद्योगिक उत्पादन को संभाला. इससे यह संदेश मिला कि बुनियादी ढांचा और फैक्ट्री आधारित गतिविधियां अभी भी गति बनाए हुए हैं. लेकिन अर्थव्यवस्था सिर्फ उद्योग से नहीं चलती.

सर्विसेज और एग्रीकल्चर में नरमी क्यों?

भारत की GDP में सबसे बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र का होता है. ICRA के मुताबिक Q3FY26 में सर्विसेज ग्रोथ 7.8% रह सकती है, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.2% थी.

खेती क्षेत्र की ग्रोथ भी 3.5% से घटकर करीब 3.0% रहने का अनुमान है. यह गिरावट छोटी दिखती है, पर ग्रामीण मांग और आय पर इसका असर पड़ता है.

एक नजर में गिरावट की वजहें:

  • सरकारी पूंजी खर्च (Capex) में कमी
  • मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में कमजोरी

सरकारी खर्च क्यों हुआ कम?

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार का ग्रॉस कैपिटल एक्सपेंडिचर Q3FY26 में सालाना आधार पर 23% से ज्यादा घटा. दूसरी तिमाही में यह ऊंचे स्तर पर था, इसलिए आधार प्रभाव (Base Effect) भी बड़ा कारण माना जा रहा है.

पहले हाफ में खर्च की “फ्रंटलोडिंग” हुई थी, यानी शुरुआती महीनों में ज्यादा खर्च. परिणामस्वरूप तीसरी तिमाही में खर्च का आंकड़ा थोड़ा नरम दिखा. राज्य सरकारों के राजस्व खर्च की रफ्तार भी धीमी रही. कुल मिलाकर, पब्लिक स्पेंडिंग की रफ्तार पहले जैसी मजबूत नहीं दिखी.

निर्यात का क्या हाल?

सेवा निर्यात (Service Exports) में वृद्धि दर सात तिमाहियों के निचले स्तर 7.5% पर आ गई. हालांकि डॉलर के लिहाज से यह 111 बिलियन डॉलर से ऊपर रहा, पर वृद्धि दर सुस्त रही.

माल निर्यात (Merchandise Exports) में कमजोरी ने भी कुल ग्रोथ पर दबाव डाला. वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और प्रतिस्पर्धा के चलते निर्यात की रफ्तार उम्मीद से कम रही.

फिर भी 7% से ऊपर कैसे रही ग्रोथ?

दिलचस्प बात यह है कि त्योहारों के मौसम में डिमांड अच्छी रही. GST रैशनलाइजेशन जैसे कदमों से उपभोक्ता खर्च को थोड़ा सहारा मिला. रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर में गतिविधियां बनी रहीं. यही वजह रही कि तमाम चुनौतियों के बावजूद GDP ग्रोथ 7% से नीचे नहीं गई.

क्या यह चिंता की बात है?

7.2% की ग्रोथ अभी भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मजबूत मानी जाती है. लेकिन पिछले क्वार्टर से गिरावट यह संकेत देती है कि:

  • सरकारी खर्च की भूमिका अहम है
  • सेवाओं और निर्यात में सुस्ती से असर होता है
  • बेस इफेक्ट आंकड़ों की तस्वीर बदल सकता है

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने भी कहा है कि नए बेस ईयर के मुताबिक सटीक अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है. इसलिए यह आउटलुक मौजूदा डेटा पर आधारित है.

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?

अगर सर्विस और खेती की रफ्तार धीमी रहती है, तो इसका असर नौकरियों, आय और ग्रामीण मांग पर दिख सकता है. हालांकि उद्योग क्षेत्र की मजबूती रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को सहारा दे सकती है. त्योहारी मांग ने जो गति दी, वह अगर अगले क्वार्टर में भी बनी रहे तो तस्वीर सुधर सकती है.

आगे क्या देखना होगा?

अब निगाहें चौथी तिमाही और पूरे FY26 के आंकड़ों पर रहेंगी. अगर सरकारी खर्च फिर से बढ़ता है, निर्यात मजबूत होता है और सर्विस सेक्टर गति पकड़ता है, तो ग्रोथ फिर से ऊंची हो सकती है.

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