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भारतीय इकॉनमी को लेकर एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारत की ग्रोथ दर मजबूत बनी रहेगी. हालांकि वैश्विक स्तर पर मंदी और अमेरिका की ओर से बढ़े टैरिफ जैसे निगेटिव रिस्क मौजूद हैं, लेकिन घरेलू खपत और सरकारी खर्च की मजबूती इन चुनौतियों को संतुलित कर देगी। यह रिपोर्ट क्रिसिल (CRISIL) की ओर से सोमवार को जारी की गई.
क्रिसिल का कहना है कि भारत में जीडीपी ग्रोथ का मुख्य आधार निजी खपत होगी, यानी कि लोगों की रोज़मर्रा की खरीददारी, घरेलू खर्च और सेवाओं पर बढ़ता खर्च अर्थव्यवस्था को गति देगा. इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी लगभग 6.5% बढ़ेगी. हालांकि, इसमें कुछ गिरावट का जोखिम भी बना रह सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में निजी खपत को मजबूती देने वाले चार मुख्य कारण हैं—
इस साल मानसून औसत से बेहतर रहा है, 28 अगस्त तक मानसून सामान्य से 106% पर है. खरीफ की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में 3.4% ज्यादा हुई है.तो इसका मतलब है कि किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण इलाकों में खपत को सहारा मिलेगा.
अप्रैल-जुलाई 2025 के दौरान औसत मुद्रास्फीति घटकर 2.4% पर आ गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 4.6% थी.तो इसका फायदा यह है कि घरों के बजट में राहत मिलेगी और लोग गैर-जरूरी चीज़ों पर भी खर्च कर पाएंगे.
आरबीआई ने 2025 में रेपो रेट में 100 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की है. इसके अलावा, सितंबर से दिसंबर के बीच कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) को भी चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा.जी हां इसका सीधा असर यह होगा कि बैंकों से लोन सस्ता होगा, ईएमआई कम होगी और शहरी इलाकों में खपत तेजी से बढ़ेगी.
आयकर दरों में कमी, मध्यम वर्ग की आय में बढ़ोतरी और ग्रामीण स्कीम्स पर ज़्यादा खर्च से खपत में मजबूती आएगी.इसके साथ ही, जीएसटी संरचना में बदलाव से कुछ उपभोक्ता सामानों पर टैक्स कम हो सकता है,तो अगर ये बदलाव समय पर लागू हो जाते हैं, तो विकास की रफ्तार और बढ़ेगी.
क्रिसिल की रिपोर्ट कहती है कि सरकार का खर्च भी FY26 में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा. खास रूप से ग्रामीण विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं में बढ़े निवेश से घरेलू मांग में इजाफा होगा.
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, जो पिछले पाँच तिमाहियों का सबसे ऊँचा स्तर है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आधार प्रभाव के बावजूद घरेलू खपत मज़बूत बनी रही. इससे न सिर्फ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) बल्कि सेवा क्षेत्र (सर्विसेज सेक्टर) को भी बढ़ावा मिला.
सरकारी खर्च में तेजी आने से सरकारी उपभोग व्यय में बड़ा उछाल देखने को मिला. इसके साथ ही, निवेश गतिविधियाँ स्थिर रहीं, जिससे लंबी अवधि की ग्रोथ को सहारा मिला.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ने की आशंका के चलते कई भारतीय निर्यातकों ने पहले ही बड़ी मात्रा में शिपमेंट कर दिए. इससे निर्यात में अस्थायी तौर पर उछाल देखने को मिला। हालांकि,आने वाले कल में वैश्विक मंदी और व्यापारिक तनावों का असर निर्यात पर नकारात्मक हो सकता है.
हालांकि रिपोर्ट का अंदाज़ा सकारात्मक है, लेकिन कुछ चुनौतियां हुई हैं—
-वैश्विक इकॉनमी की धीमी रफ्तार से भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकता है.
-अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों की नीतियों में बदलाव का असर भारत पर पड़ सकता है.
-अगर मानसून उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा, तो ग्रामीण आय और खपत पर असर पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का मानना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ को सबसे ज़्यादा ताकत घरेलू खपत और सरकारी खर्च से मिलेगी.तो अच्छे मानसून, कम महंगाई, ब्याज दरों में कटौती और टैक्स रियायतें लोगों की जेब में ज़्यादा पैसा छोड़ेंगी. इससे न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में, बल्कि शहरी बाज़ारों में भी खरीदारी बढ़ेगी.
यानी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत राह पर है और अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो वित्त वर्ष 2026 में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
FAQs
Q1. क्रिसिल की रिपोर्ट में भारत की FY26 GDP ग्रोथ कितनी बताई गई है?
A1. रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में भारत की GDP लगभग 6.5% बढ़ने का अनुमान है.
Q2. भारत की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन क्या रहेगा?
A2. निजी खपत (Private Consumption) को भारत की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बताया गया है.
Q3. भारत की अर्थव्यवस्था के सामने कौन-कौन से खतरे बताए गए हैं?
A3. वैश्विक मंदी और अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ प्रमुख खतरे हैं.
Q4. सरकारी खर्च का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
A4. सरकारी खर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों को गति देगा, जिससे ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा.
Q5. रिपोर्ट किस संस्था ने जारी की है?
A5. यह रिपोर्ट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) द्वारा जारी की गई है.
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