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GST collection देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक शानदार खबर सामने आई है. चालू वित्त वर्ष (2025 26) की पहली तिमाही (अप्रैल जून) में सरकार के GST संग्रह में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को संसद में बताया कि इस अवधि में औसत मासिक GST संग्रह 10.7% की दोहरे अंकों की वृद्धि के साथ 1,80,774 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है.
पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 1,63,319 करोड़ रुपए था. यह लगातार बढ़ती हुई कलेक्शन इस बात का संकेत है कि देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं और टैक्स अनुपालन (tax compliance) भी बेहतर हुआ है.
GST संग्रह में यह लगातार हो रही वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है. इसका सीधा मतलब है कि देश में वस्तुओं और सेवाओं की खपत बढ़ रही है, जिससे उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है. यह सरकार को सामाजिक योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च करने की क्षमता भी प्रदान करता है.
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ने GST परिषद की सिफारिशों के आधार पर छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
पंजीकरण से छूट: अगर कोई कारोबारी अपने राज्य के भीतर माल (वस्तुओं) की सप्लाई करता है और उसका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से कम है, तो उसे GST रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है. (कुछ विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपए है).
सेवाओं के लिए छूट: इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति या कंपनी अपने राज्य के भीतर या बाहर सेवाएं प्रदान करती है और उसका सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपए से कम है, तो उसे भी GST रजिस्ट्रेशन से छूट दी गई है. (विशेष राज्यों के लिए यह सीमा 10 लाख रुपए है).
छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए GST में 'कंपोजिशन स्कीम' एक बेहद सरल विकल्प है. इस स्कीम के तहत कारोबारियों को बहुत कम दर पर टैक्स चुकाना होता है और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया भी आसान होती है.
वस्तुओं के व्यापारियों और निर्माताओं के लिए: 1% की समान दर से टैक्स.
इसके अलावा, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपए तक है, वे हर महीने टैक्स चुकाकर तिमाही रिटर्न (Quarterly Return Monthly Payment) दाखिल करने का विकल्प चुन सकते हैं, जिससे उनका अनुपालन बोझ कम हो जाता है.
पंकज चौधरी ने यह भी बताया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह सचेत है. इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे:
ये उपाय सुनिश्चित करते हैं कि आम जनता पर महंगाई का बोझ कम हो और बाजार में वस्तुओं की सप्लाई बनी रहे.
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