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जूट इंडस्ट्री में बड़ा एक्शन.
देश की जूट इंडस्ट्री को संकट से उबारने और कच्चे जूट की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है. जूट कमिश्नर की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक, कच्चे जूट के व्यापारियों और बेलर्स (Balers) के लिए स्टॉक रखने की सीमा को घटाकर अब 'शून्य' (NIL) कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब व्यापारी अपने पास कच्चा जूट जमा करके नहीं रख पाएंगे और उन्हें अपना सारा स्टॉक जूट मिलों को बेचना होगा.
पिछले कुछ महीनों में कच्चे जूट की कीमतों में आई भारी तेजी और बाजार में इसकी कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. सरकार का मानना है कि कुछ लोग मुनाफाखोरी के चक्कर में स्टॉक दबाकर बैठे हैं, जिससे मिलों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है और मजदूरों के काम पर संकट मंडरा रहा है.
सरकार ने इस आदेश को लागू करने के लिए बहुत कम समय दिया है, ताकि जमाखोरों को संभलने का मौका न मिले. नए नियमों के मुताबिक, स्टॉक खाली करने की प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करना होगा.
| श्रेणी (Category) | नई स्टॉक लिमिट | कार्रवाई की समयसीमा |
| पंजीकृत बेलर्स (Baling Press वाले) | शून्य (NIL) | 5 मई तक बिक्री, 15 मई तक डिलीवरी |
| अन्य स्टॉककर्ता (बिना प्रेस वाले) | शून्य (NIL) | 5 मई तक बिक्री, 15 मई तक डिलीवरी |
| जूट मिलें/प्रोसेसिंग यूनिट्स | 45 दिन का स्टॉक | वर्तमान उत्पादन दर के आधार पर |
सारा माल बेचना अनिवार्य: व्यापारियों को 5 मई 2026 तक अपने पास मौजूद कच्चे जूट के हर एक तिनके का सौदा करना होगा.
फिजिकल डिलीवरी: सिर्फ सौदा करना काफी नहीं है, 15 मई 2026 तक माल की फिजिकल डिलीवरी भी पूरी हो जानी चाहिए.
मिलों को राहत: जूट मिलों को थोड़ी राहत दी गई है, वे अपनी जरूरत के हिसाब से अधिकतम 45 दिनों का स्टॉक रख सकती हैं.
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पिछले कुछ समय से कच्चे जूट की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर बनी हुई हैं. इससे न केवल जूट उत्पादों की लागत बढ़ रही है, बल्कि मिलों के लिए उत्पादन जारी रखना भी मुश्किल हो गया है.
सरकार ने साफ कर दिया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. इसके लिए 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' (Essential Commodities Act) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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अधिकारियों को अधिकार दिया गया है कि वे किसी भी गोदाम या परिसर की जांच कर सकते हैं और तय सीमा से ज्यादा माल मिलने पर उसे तुरंत जब्त कर सकते हैं. केंद्र ने राज्य सरकारों से भी अपील की है कि वे जमाखोरों के खिलाफ छापेमारी और कार्रवाई में सहयोग करें. कानून की धारा 7, 8 और 9 के तहत गलत जानकारी देने या स्टॉक लिमिट तोड़ने पर जुर्माना, माल की कुर्की और जेल तक का प्रावधान है.
सरकार का यह 'जीरो स्टॉक लिमिट' वाला फैसला जूट सेक्टर के लिए एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसा है. इससे एक तरफ जहां जूट मिलों को समय पर कच्चा माल मिल सकेगा, वहीं दूसरी तरफ कीमतों में आ रही बेवजह की तेजी पर भी ब्रेक लगेगा. व्यापारियों के लिए अब मुनाफाखोरी का रास्ता बंद हो गया है. अगर यह आदेश सही तरीके से जमीन पर लागू होता है, तो इससे किसानों, मिल मालिकों और इस इंडस्ट्री से जुड़े लाखों कामगारों का भविष्य सुरक्षित होगा.