MFI का फंड संकट होगा खत्म! सरकार ने शुरू की CGSMFI-2.0 योजना; जानें किसे मिलेगा फायदा

सरकार ने सीमित अवधि के लिए 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी. ये संस्थान पिछले कुछ समय से धन जुटाने में आ रही कठिनाइयों की शिकायत कर रहे थे.
MFI का फंड संकट होगा खत्म! सरकार ने शुरू की CGSMFI-2.0 योजना; जानें किसे मिलेगा फायदा

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केंद्र सरकार ने माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम-2.0 (CGSMFI-2.0) शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से बैंकों/वित्तीय संस्थानों को नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी-माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (NBFC-MFIs) और स्मॉल फाइनेंस इंस्टीट्यूसंस द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को दिए गए लोन पर अपेक्षित नुकसान के विरुद्ध गारंटी प्रदान करना है.

बता दें कि समाज के निचले तबके को क्रेडिट उपलब्ध कराने वाले माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) बढ़ते फंसे कर्ज (NPA) के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं. इसके कारण उनके कर्जदाता आगे और लोन देने में सतर्क हो गए हैं.

सरकार इनको सहायता देने के लिए सीमित अवधि के लिए 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी. ये संस्थान पिछले कुछ समय से धन जुटाने में आ रही कठिनाइयों की शिकायत कर रहे थे.

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योजना की खासियतें

पात्र उधारकर्ता

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा समय-समय पर निर्धारित माइक्रो फाइनेंस की नियामक परिभाषा के तहत आने वाले मौजूदा या नए छोटे उधारकर्ता.

गारंटी कवरेज

  • छोटे NBFC-MFIs/ MFIs के लिए डिफ़ॉल्ट राशि का 80%, मिडियम के लिए 75% और बड़े एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए 70%.

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गारंटी फीस

  • मंजूर राशि पर 0.50% प्रति वर्ष (पहले वर्ष) और बकाया राशि पर (उसके बाद).

ब्याज दर

  • MLIs द्वारा NBFC-MFIs या MFIs. को दिए गए लोन पर EBLR या MCLR + 2% प्रति वर्ष तक सीमित है.
  • छोटे उधारकर्ताओं को लोन देते समय, ये लेंडर्स ब्याज दर को पिछले 6 महीनों में औसत लेडिंग रेट से 1% कम तक सीमित रखेंगे.
  • यह योजना 30.06.2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये तक के क्रेडिट्स की गारंटी होने तक, जो भी पहले हो, मान्‍य है.

असर

  • यह योजना MFI सेक्टर में क्रेडिट फ्लो को बढ़ाने में सहायक होगी. अनुमान है कि इस योजना से NBFC-MFIs/ MFIs द्वारा लगभग 36 लाख छोटे उधारकर्ताओं को लोन देने में सुविधा होगी.

आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों को लोन उपलब्ध कराकर माइक्रो फाइनेंस फाइनेंशियल इंक्यूलजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. NBFC-MFIs और MFIs माइक्रो फाइनेंस लेंडिंग बिजनेस में प्रमुख भागीदार हैं.

माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में चल रहे वित्तीय संकट को देखते हुए, बैंकों द्वारा लघु वित्त संस्थानों को लोन देने में कमी आई है, जिसके कारण छोटे लघु वित्त संस्थानों को लोन पाने में कठिनाई हो रही है.

इस योजना का उद्देश्य लोन देने वाली संस्थाओं को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित सूक्ष्म वित्त की नियामक परिभाषा के तहत छोटे उधारकर्ताओं को लोन देने के लिए NBFC-MFIs या MFIs को निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना है.

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