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केंद्र सरकार ने माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम-2.0 (CGSMFI-2.0) शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से बैंकों/वित्तीय संस्थानों को नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी-माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (NBFC-MFIs) और स्मॉल फाइनेंस इंस्टीट्यूसंस द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को दिए गए लोन पर अपेक्षित नुकसान के विरुद्ध गारंटी प्रदान करना है.
बता दें कि समाज के निचले तबके को क्रेडिट उपलब्ध कराने वाले माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) बढ़ते फंसे कर्ज (NPA) के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं. इसके कारण उनके कर्जदाता आगे और लोन देने में सतर्क हो गए हैं.
सरकार इनको सहायता देने के लिए सीमित अवधि के लिए 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी. ये संस्थान पिछले कुछ समय से धन जुटाने में आ रही कठिनाइयों की शिकायत कर रहे थे.
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आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों को लोन उपलब्ध कराकर माइक्रो फाइनेंस फाइनेंशियल इंक्यूलजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. NBFC-MFIs और MFIs माइक्रो फाइनेंस लेंडिंग बिजनेस में प्रमुख भागीदार हैं.
माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में चल रहे वित्तीय संकट को देखते हुए, बैंकों द्वारा लघु वित्त संस्थानों को लोन देने में कमी आई है, जिसके कारण छोटे लघु वित्त संस्थानों को लोन पाने में कठिनाई हो रही है.
इस योजना का उद्देश्य लोन देने वाली संस्थाओं को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित सूक्ष्म वित्त की नियामक परिभाषा के तहत छोटे उधारकर्ताओं को लोन देने के लिए NBFC-MFIs या MFIs को निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना है.
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