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सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. इस दौरान सोने (Gold) की कीमतों में करीब 4,000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमतों में लगभग 17,000 रुपए प्रति किलो का उछाल दर्ज किया गया है. इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों की भी चिंता बढ़ा दी है.
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 24 कैरेट सोने का दाम 4,188 रुपए बढ़कर 1,32,710 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो एक हफ्ते पहले 1,28,592 रुपए था. इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी जोरदार बढ़त देखने को मिली है.
24 कैरेट सोने के साथ-साथ 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी इस हफ्ते साफ तेजी दिखी. 22 कैरेट सोना बढ़कर 1,21,562 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया, जबकि एक हफ्ते पहले इसका दाम 1,17,777 रुपए था. वहीं 18 कैरेट सोना 99,533 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया, जो पहले 96,444 रुपए था. इससे ज्वेलरी खरीदने वालों का बजट और ज्यादा बिगड़ गया है.
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सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में कहीं ज्यादा उछाल देखने को मिला. चांदी का भाव 16,970 रुपए बढ़कर 1,95,180 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है. एक हफ्ते पहले चांदी 1,78,210 रुपए प्रति किलो के आसपास थी. इतनी तेज बढ़त ने चांदी को भी ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा दिया है और बाजार में हलचल बढ़ा दी है.
घरेलू बाजार में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती बनी रहना है. कॉमेक्स पर सोने की कीमत करीब 4,328 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 62 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई है. इंटरनेशनल लेवल पर बनी तेजी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और कीमतें ऊपर चली गईं.
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बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती और डॉलर का दूसरी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर होना कीमती धातुओं के लिए बड़ा सपोर्ट बना है. जब डॉलर कमजोर होता है तो सोना और चांदी निवेश के बेहतर विकल्प बन जाते हैं, जिससे इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं.
चांदी की कीमतें सोने से ज्यादा तेजी से बढ़ने की बड़ी वजह इंडस्ट्रियल डिमांड है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और 5G टेक्नोलॉजी में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है. मांग तेजी से बढ़ने और सप्लाई सीमित रहने के कारण चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है.
इसके अलावा बाजार में यह आशंका भी है कि अमेरिका चांदी पर आयात शुल्क लगा सकता है. अमेरिका अपनी जरूरत की लगभग दो-तिहाई चांदी आयात करता है. टैरिफ लगने के डर से अमेरिकी कंपनियों ने पहले ही चांदी जमा करना शुरू कर दिया, जिससे ग्लोबल सप्लाई और घट गई और कीमतों में और तेजी आ गई.
कुल मिलाकर सोने और चांदी की कीमतों में आई यह तेजी सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि इंटरनेशनल फैक्टर्स से भी जुड़ी हुई है. ब्याज दरों में कटौती, डॉलर की कमजोरी, इंडस्ट्रियल डिमांड और टैरिफ की आशंका ने मिलकर कीमतों को रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा दिया है. आने वाले दिनों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर और ब्याज दरों का सीधा असर सोने पर पड़ता है.
इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की कमी से चांदी महंगी हुई.
खरीद से पहले अपने बजट और जरूरत का आकलन जरूरी है.
लंबे समय में चांदी भी एक विकल्प मानी जाती है.
डॉलर कमजोर होने पर निवेशक सोने की ओर जाते हैं.
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