अमेरिका-ईरान युद्ध की चपेट में आएगी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री! रिपोर्ट में खुलासा- इन वजहों से पड़ेगा ग्रोथ पर असर

कई कारणों की वजह से ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री पर निगेटिव असर दिख सकता है. चीन, अमेरिका और यूरोप में 2026 के शुरुआती साल में ही गिरावट देखने को मिल रही है.
अमेरिका-ईरान युद्ध की चपेट में आएगी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री! रिपोर्ट में खुलासा- इन वजहों से पड़ेगा ग्रोथ पर असर

AI जनरेटेड फोटो

मिडल ईस्ट में तनाव, इजरायल-अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध का असर दुनियाभर की ऑटो इंडस्ट्री पर देखने को मिल सकता है. बढ़ते टैरिफ, कच्चे माल की ऊंची कीमतें, सप्लाई चेन की दिक्कतें और अब मेमोरी चिप की कमी जैसी समस्याओं ने ऑटो कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ब्रोकरेज फर्म Elara Securities की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कारणों से वैश्विक ऑटो सेक्टर पर दबाव बना हुआ है और साल 2026 में मांग कमजोर रह सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो कंपनियों के सामने केवल प्रोडक्शन की समस्या ही नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता भी वाहन बिक्री को प्रभावित कर रही है. यही वजह है कि कैलेंडर ईयर 2026 (CY26) की शुरुआत उम्मीद से कमजोर रही है.

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2025 में दिखी थी हल्की ग्रोथ

अगर पिछले साल की बात करें तो कैलेंडर ईयर 2025 में ग्लोबल पैसेंजर व्हीकल (PV) बिक्री में करीब 4.5% की सालाना बढ़त देखने को मिली थी. हालांकि यह ग्रोथ अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग रही.

  • सबसे मजबूत प्रदर्शन चीन ने किया
  • वाहन बिक्री में 9.1% की वृद्धि दर्ज की गई
  • अमेरिका में बिक्री करीब 1.9% बढ़ी
  • यूरोप में केवल 0.5% की मामूली बढ़त दर्ज की गई

रिपोर्ट के मुताबिक, यह ग्रोथ भी मुख्य रूप से कुछ सरकारी प्रोत्साहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के कारण आई थी. लेकिन 2026 की शुरुआत में यह रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है.

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2026 की शुरुआत में बिक्री घटी

2026 के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि ऑटो सेक्टर में सुस्ती आ गई है. जनवरी 2026 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक वाहन बिक्री में करीब 1.2% की गिरावट दर्ज की गई है.

दुनिया के तीन सबसे बड़े ऑटो बाजार — चीन, अमेरिका और यूरोप — तीनों में ही बिक्री में गिरावट देखी गई.

  • चीन में वाहन बिक्री 6.8% घट गई
  • अमेरिका में बिक्री 0.8% कम रही
  • यूरोप में बिक्री 3.9% घट गई

इससे साफ संकेत मिलते हैं कि ग्लोबल ऑटो मार्केट फिलहाल दबाव में है और कंपनियों को आने वाले महीनों में और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

चीन में सब्सिडी खत्म होने का असर

रिपोर्ट के मुताबिक चीन में बिक्री में आई गिरावट की एक बड़ी वजह सरकारी सब्सिडी का खत्म होना है. पिछले साल यानी 2025 के चौथे क्वार्टर में इन सब्सिडी के चलते लोगों ने बड़ी संख्या में नई गाड़ियां खरीदी थीं.

लेकिन जैसे ही यह प्रोत्साहन खत्म हुआ, मांग में गिरावट देखने को मिली. इसका असर खास तौर पर नई ऊर्जा वाहनों (NEVs) पर पड़ा. जनवरी 2026 में NEVs की हिस्सेदारी घटकर 40.3% रह गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह 52.3% थी. यह दिखाता है कि कई बाजारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग अभी भी काफी हद तक सरकारी प्रोत्साहनों पर निर्भर है.

अमेरिका में महंगाई और कीमतों का असर

अमेरिका में वाहन बिक्री पर बढ़ती कीमतों और महंगाई का असर देखा जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, कई ग्राहकों के लिए नई कार खरीदना महंगा हो गया है. इसके अलावा अमेरिका में 7,500 डॉलर का फेडरल EV टैक्स क्रेडिट खत्म होने से भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पर दबाव पड़ा है. इससे कई कंपनियों की EV बिक्री पर असर पड़ा है.

ऑटो कंपनियों का आउटलुक कैसा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई वैश्विक ऑटो कंपनियों ने अपनी हालिया कमाई रिपोर्ट और कॉन्फ्रेंस कॉल्स में यह संकेत दिया है कि 2026 में मांग ज्यादा मजबूत नहीं रहने वाली है.

ज्यादातर कंपनियां अमेरिका और यूरोप में फ्लैट या मामूली ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं. वहीं चीन का बाजार अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. उदाहरण के तौर पर जर्मन लग्जरी कार निर्माता Mercedes-Benz ने अनुमान लगाया है कि 2026 में उसकी वैश्विक बिक्री -2% से +2% के बीच रह सकती है.

EV रणनीति में बदलाव और बढ़ते नुकसान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई ऑटो कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रणनीति पर दोबारा विचार कर रही हैं. बदलती बाजार स्थितियों और मांग की अनिश्चितता के कारण कंपनियों को EV से जुड़े निवेश पर राइट-ऑफ भी करना पड़ रहा है.

इसका मतलब है कि कंपनियां अपने कुछ EV प्रोजेक्ट्स में किए गए निवेश को घाटे के रूप में मान रही हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि EV मार्केट में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं.

कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में उम्मीद

हालांकि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में दबाव है, लेकिन कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक और अन्य भारी वाहनों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है.

इंडस्ट्री के सामने बड़ी चुनौती

कुल मिलाकर देखा जाए तो ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री इस समय एक जटिल दौर से गुजर रही है. एक तरफ उत्पादन लागत बढ़ रही है और सप्लाई चेन की दिक्कतें बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ मांग में भी अनिश्चितता है.

अगर आर्थिक परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो 2026 ऑटो कंपनियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल साबित हो सकता है. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों और कमर्शियल वाहनों के क्षेत्र में कुछ अवसर जरूर दिखाई दे रहे हैं.

आज क्यों टूटा निफ्टी ऑटो इंडेक्स?

मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच आज भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट है. इसका असर निफ्टी ऑटो इंडेक्स (Nifty Auto Index) पर भी देखने को मिल रहा है. आज निफ्टी ऑटो इंडेक्स के सारे स्टॉक्स टूटे हुए हैं. यहां करीब 3-6 फीसदी की गिरावट है.

FAQs

Q1. ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?

टैरिफ, महंगे कच्चे माल, सप्लाई चेन की समस्याएं और चिप की कमी जैसी वजहों से इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ रहा है.

Q2. 2025 में ग्लोबल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में कितनी बढ़ोतरी हुई थी?

कैलेंडर ईयर 2025 में वैश्विक पैसेंजर व्हीकल बिक्री में करीब 4.5% की वृद्धि हुई थी.

Q3. 2026 की शुरुआत में वाहन बिक्री का ट्रेंड कैसा रहा?

जनवरी 2026 में वैश्विक वाहन बिक्री में लगभग 1.2% की गिरावट दर्ज की गई.

Q4. चीन में वाहन बिक्री क्यों घटी?

सरकारी सब्सिडी खत्म होने के कारण चीन में नई गाड़ियों की मांग में गिरावट आई.

Q5. किस सेगमेंट में भविष्य का आउटलुक बेहतर दिख रहा है?

कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और इसमें आगे ग्रोथ की संभावना है.

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