विदेशी मुद्रा भंडार में हुई बड़ी वृद्धि, जानिए कितना होगा मुद्रा भंडार

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 4.368 अरब डॉलर बढ़कर 418.515 अरब डॉलर पर पहुंच गया. जानकारों के अनुसार दूसरी डॉलर-रुपया विनिमय नीलामी की मदद से मुद्रा भंडार में यह वृद्धि दर्ज की गई है.
विदेशी मुद्रा भंडार में हुई बड़ी वृद्धि, जानिए कितना होगा मुद्रा भंडार

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.368 अरब डॉलर बढ़कर 418.515 अरब डॉलर पर पहुंच गया.(फाइल फोटो)

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 4.368 अरब डॉलर बढ़कर 418.515 अरब डॉलर पर पहुंच गया. जानकारों के अनुसार दूसरी डॉलर-रुपया विनिमय नीलामी की मदद से मुद्रा भंडार में यह वृद्धि दर्ज की गई है. पिछले महीने की 23 तारीख को भारतीय रिजर्व बैंक की डॉलर-रुपया अदला-बदली की दूसरी नीलामी में उसे पांच अरब डालर की तय नीलामी के मुकाबले तीन गुना अधिक बोली प्राप्त हुई.

पिछले सप्ताह मुद्रा कोष में दर्ज की गई थी कमी
इस दूसरी नीलामी में केन्द्रीय बैंक को पांच अरब डॉलर के मुकाबले 18.65 अरब डॉलर का अभिदान मिला. हालांकि उसने पांच अरब डॉलर मूल्य की पांच बोलियों को ही स्वीकार किया. इससे पिछले सप्ताह में विदेशी मुद्रा कोष 73.92 करोड़ डॉलर घटकर 414.147 अरब डॉलर रहा था.

देश का स्वर्ण भंडार 23.303 अरब डॉलर के स्तर पर है
आलोच्य सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां 4.387 अरब डॉलर बढ़कर 390.421 अरब डॉलर हो गयी. विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियों का बड़ा हिस्सा होता है. आलोच्य सप्ताह के दौरान देश का स्वर्ण भंडार 23.303 अरब डॉलर के स्तर पर बना रहा.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास देश के भंडार में कमी
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से विशेष आहरण अधिकार 59 लाख डॉलर कम होकर 1.449 अरब डॉलर पर आ गया. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के पास देश का भंडार 1.36 करोड़ डॉलर कम होकर 3.341 अरब डॉलर पर आ गया. देश का विदेशी मुद्रा भंडार इससे पहले 13 अप्रैल 2018 को एक समय 426.028 अरब डालर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया था.

देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान
औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और मानसून के सामान्य से नीचे रहने के आसार के बीच 2019-20 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने यह उम्मीद जताई. इससे पहले आर्थिक वृद्धि 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई थी. इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि 2019 में मानसून के सामान्य से नीचे रहने के अनुमान, कृषि से जुड़ी समस्याएं, औद्योगिक उत्पादन खासकर विनिर्माण एवं बिजली उत्पादन में सुस्ती आर्थिक वृद्धि में गिरावट के प्रमुख कारक हो सकते हैं.

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