बजट 2019: किसानों के लिए है हो सकता है कुछ खास, वोट ऑन अकाउंट नहीं होगा बजट

वित्त मंत्री के इस इशारे से साफ है कि सरकार इस बार कुछ बड़ा करने का मन बना चुकी है. ऐसे में आम आदमी को बड़ी राहत दी जा सकती है.
बजट 2019: किसानों के लिए है हो सकता है कुछ खास, वोट ऑन अकाउंट नहीं होगा बजट

एक बिजनेस टीवी चैनल के अवॉर्ड फंक्शन में वित्त मंत्री ने संकेत दिए कि परंपरा से हटकर हो सकता है बजट. (फाइल फोटो: अरुण जेटली)

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इशारा दिया है कि इस बार का बजट जरूरी नहीं लेखानुदान हो. एक फरवरी को पेश किया जाने वाला अंतरिम बजट की चर्चा पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों से निपटने के लिए चुनावी साल की परंपरा से अलग हटकर कुछ कर सकती है. वित्त मंत्री के इस इशारे से साफ है कि सरकार इस बार कुछ बड़ा करने का मन बना चुकी है. ऐसे में आम आदमी को बड़ी राहत दी जा सकती है. साथ ही कुछ समय से चली आ रही मांगों को लेकर भी सरकार कुछ सोचा है.

देशहित में होगा अंतरिम बजट
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा परंपरा राष्ट्रहित से बड़ी नहीं है. अर्थव्यवस्थआ के सामने कुछ चुनौतियां हैं, जिनका समाधान जरूरी है. हालांकि, परंपरा यही रही है कि चुनावी साल का बजट अंतरिम होता है. लेकिन, देश के लिए क्या जरूरी है इसे देखते हुए अंतरिम बजट तय होता है.

आशंकाओं को किया खारिज
एक बिजनेस टीवी चैनल के अवॉर्ड फंक्शन में वीडियो लिंक के जरिए वित्त मंत्री ने देश को संकेत दिया कि केंद्र सरकार परंपरा से अलग कुछ होने वाला है. उन्होंने यह संबोधन ऐसे वक्त में सामने आया जब यह चर्चा है कि वह स्वास्थ्य कारणों से अंतरिम बजट पेश करेंगे भी या नहीं. आपको बता दें, वित्त मंत्री मेडिकल चेक-अप के लिए फिलहाल न्यूयॉर्क में हैं. उन्होंने खुद भी उन आशंकाओं पर विराम लगा दिया जिसमें कहा जा रहा था कि वित्त मंत्री शायद ही अंतरिम बजट पेश करें.

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किसानों के लिए है तोहफा
वित्त मंत्री ने यह भी इशारा किया कि कृषि क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां हैं, इसलिए सरकार परंपरा से हटकर कदम उठा सकती है. अरुण जेटली ने इशारों-इशारों में यह भी बता दिया कि उच्च उत्पादन और महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों की कीमतों में धीमी वृद्धि हो सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार पर इस क्षेत्र के लिए उपायों का दबाव है. इस क्षेत्र से देश की आधी से ज्यादा आबादी जुड़ी है. हालांकि, जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी पांचवें हिस्से से भी कम है.

ग्रोथ रेट पर चिंतित
आर्थिक सुधारों को बढ़ावा देने के बावजूद जेटली ने माना कि ग्रोथ रेट अब चिंता का विषय है. जेटली ने कहा 7-7.5 फीसदी की ग्रोथ काफी नहीं है. 8 फीसदी ग्रोथ के बैरियर को तोड़कर आगे निकलना होगा. हालांकि, टैक्स में कटौती के सवाल को वह अच्छे ढंग से टाल गए. उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषिय मामले में बेहद सूझबूझ से कदम उठाएगी. लेकिन, परिस्थितियां अगर प्रतिकूल हों तो राजकोषिय मजबूती की राह से अलग कदम उठाने पड़ सकते हैं.

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शुभम् शुक्ला

शुभम् शुक्ला

असिस्टेंट एडिटर/टीम लीड

शुभम् शुक्ला, ज़ी बिज़नेस डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर (Assistant Editor) के पद पर हैं. जर्नलिज्म में उन्हें करीब 16 स

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