MSME पर सरकार का विशेष ध्यान! अमेरिकी टैरिफ असर के लिए PSB के साथ वित्त मंत्रालय की अहम बैठक

अमेरिकी टैरिफ का MSME पर होने वाले असर के आकलन का मूल्यांकन के लिए वित्त मंत्रालय सोमवार को पब्लिक सेक्टर बैंकों के साथ अहम बैठक करने जा रहा है. इस बैठक में एमएसएमई के क्रेडिट से जुड़ी जरूरतों को जानने की कोशिश की जाएगी.
MSME पर सरकार का विशेष ध्यान! अमेरिकी टैरिफ असर के लिए PSB के साथ वित्त मंत्रालय की अहम बैठक

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के साथ एक रिव्यू मीटिंग करने जा रहा है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ वृद्धि के प्रतिकूल प्रभाव का आकलन किया जाएगा. साथ ही, उनकी क्रेडिट से जुड़ी जरूरतों को जानने की कोशिश की जाएगी. वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य यह समझना है कि बाहरी व्यापार दबाव MSME को कैसे प्रभावित कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा सरकारी पहलों के तहत पर्याप्त ऋण सहायता जारी रहे.

RBI गवर्नर से भी की थी मुलाकात

इस उच्च-स्तरीय बैठक में सरकार की मुद्रा और ऋण गारंटी योजनाओं जैसी वित्तीय समावेशन पहलों के माध्यम से धन प्रवाह की समीक्षा की जाएगी. इंजीनियरिंग सेक्टर के MSME ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​से मुलाकात की थी और हाल ही में अमेरिकी टैरिफ के मद्देनजर इस क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर किया था और निर्यातकों के लिए उधारी लागत कम करने में सहायता मांगी थी.

अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात 20 अरब डॉलर

ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा के अनुसार, "भारत का अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात औसतन लगभग 20 अरब डॉलर का है, जो अमेरिकी टैरिफ के अधीन भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 फीसदी है. यह हमारे क्षेत्र की कमजोरी और सरकारी सहायता की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है. इस नुकसान को कम करने के लिए उद्योग को कुछ क्षेत्रों में तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है." उन्होंने एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग के लिए कोलेटेरल फ्री लोन के संबंध में MSME निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां अमेरिकी जोखिम पर करें विचार

MSME को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से वित्त प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जहां हाई-कोलेटेरल आवश्यकताएं बनी रहती हैं. इसके अतिरिक्त, बैंकों द्वारा कोलेटेरल और ब्याज दरों का निर्धारण करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला क्रेडिट रेटिंग सिस्टम MSME को असमान रूप से प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप, MSME को पर्याप्त कोलेटेरल प्रदान करने के अलावा उच्च ब्याज दरों का भुगतान करना पड़ता है. ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि इंजीनियरिंग निर्यातकों के अमेरिकी जोखिम ने उनकी क्रेडिट रेटिंग को प्रभावित किया है और सुझाव दिया कि रेटिंग एजेंसियों को कम से कम इस वर्ष के लिए क्रेडिट रेटिंग की गणना करते समय अमेरिकी जोखिम पर विचार नहीं करना चाहिए.

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