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भारतीय निर्यातकों के लिए खुले नए आसमान. (Image- AI)
Exporters: भारतीय निर्यातकों के लिए नए और उभरते मार्केट्स में कदम रखना अब पहले से आसान होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने निर्यात बढ़ावा देने के लिए नई योजना लॉन्च की है. सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के तहत निर्यात प्रोत्साहन (NIRYAT PROTSAHAN) सब-स्कीम शुरू की है. इसके तहत उभरते बाजारों और हाई-रिस्क एक्सपोर्ट के लिए भारतीय निर्यातकों को आसान क्रेडिट और फाइनेंशियल मदद मिलेगी.
सरकार अब लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) कन्फर्मेशन और नेगोशिएशन जैसे ट्रेड इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए निर्यातकों का जोखिम साझा करेगी, जिससे कम निर्यात वाले क्षेत्रों और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए जरूरी 'क्रेडिट सपोर्ट' मिल सकेगा.
इस पहल का लक्ष्य उन देशों या बाजारों में ट्रेड को बढ़ावा देना है जहाँ वर्तमान में बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं कम हैं.
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| समर्थन कर्ता | भारत सरकार (एक्जिम बैंक के माध्यम से) |
| मुख्य लाभार्थी | MSMEs और अंतरराष्ट्रीय निर्यातक |
| लक्ष्य बाजार | अंडर-सर्वेडऔर कम वित्तीय सुविधा वाले देश |
| मुख्य टूल | रिस्क-शेयरिंग और नॉन-रिकोर्स फाइनेंस इंस्ट्रूमेंट्स |
सरकार, एक्जिम बैंक के माध्यम से निर्यातकों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है. अगर कोई निर्यातक किसी जोखिम भरे बाजार में माल भेजता है, तो उस जोखिम का एक हिस्सा सरकार वहन करेगी.
यह उन छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए बेहतर है जो अंतरराष्ट्रीय वैल्यू चैन का हिस्सा हैं लेकिन फंड की कमी या जोखिम के डर से पीछे हट जाते हैं.
नॉन-रिकोर्स ट्रेड फाइनेंस, इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके तहत अगर विदेशी खरीदार भुगतान नहीं करता है, तो बैंक निर्यातक से पैसा वापस नहीं मांगता. इससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ती है.
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