एडिबल ऑयल के लगातार घट रहे दाम, इस वजह से सरसों तेल और सस्ता होगा, खाद्य सचिव ने दिया भरोसा

Edible oil price news:सचिव ने कहा कि जब देश अपनी खाद्य तेल (edible oil price) की जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्से का इम्पोर्ट करने पर निर्भर है, तो घरेलू कीमतें स्वाभाविक रूप से इंटरनेशनल कीमतों से प्रभावित होंगी. सरकार ने खाद्य तेलों के मामले में आयात शुल्क घटाकर लगभग शून्य कर दिया है.
एडिबल ऑयल के लगातार घट रहे दाम, इस वजह से सरसों तेल और सस्ता होगा, खाद्य सचिव ने दिया भरोसा

खाद्य तेल उद्योग के इतिहास में पहली बार वैश्विक कीमतें उच्च स्तर पर चल रही हैं. (PIXABAY)

Edible oil price news: भारत में एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं. साथ ही रबी सत्र की सरसों की बेहतर फसल आने के बाद कीमतों के और घटने की उम्मीद है. पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह बातें खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय (Food Secretary Sudhanshu Pandey) ने गुरुवार को कहीं. उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में तेजी के बीच सरकार के हस्तक्षेप का ही नतीजा है कि कीमतें कम हो रही हैं. इसी तरह, दूसरी जरूरी खाद्य वस्तुओं के मामले में, उन्होंने कहा कि चावल और गेहूं की खुदरा कीमतें बहुत स्थिर हैं, जबकि दालों की कीमतें स्थिर हो गई हैं. सब्जियों खासकर प्याज, आलू और टमाटर की खुदरा कीमतों में भी कमी आई है.

जरूरी सब्जियों की कीमतें सामान्य होने जा रही हैं
खबर के मुताबिक, पांडे ने कहा कि जो संकेत हैं, उससे पता चलता है कि हर घर में प्रमुख जरूरी सब्जियों की कीमतों के मामले में स्थितियां सामान्य होने जा रही हैं. हमें इन सब्जियों की कीमतों में किसी बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है. खाद्य तेलों (edible oil) के मामले में, सचिव ने कहा कि जब देश अपनी खाद्य तेल (edible oil price) की जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्से का इम्पोर्ट करने पर निर्भर है, तो घरेलू कीमतें स्वाभाविक रूप से इंटरनेशनल कीमतों से प्रभावित होंगी.

खुदरा खाद्य तेल कीमतों में 15-20 प्रतिशत की कमी
पांडे ने कहा कि सरकार ने खाद्य तेलों के मामले में आयात शुल्क घटाकर लगभग शून्य कर दिया है और इसने (खुदरा) कीमतों में (edible oil price in india) बहुत महत्वपूर्ण कमी दिखाई है. सरकार द्वारा अंशधारकों के साथ कई मीटिंग करने के बाद खुदरा खाद्य तेल की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आई है. उन्होंने कहा कि खाद्य तेल उद्योग के इतिहास में पहली बार वैश्विक कीमतें उच्च स्तर पर चल रही हैं. मलेशिया में उत्पादन में गिरावट, इंडोनेशिया में बायोडीजल की ओर रुख करने और अर्जेंटीना में सूरजमुखी बीज फसल के नुकसान से इंटरनेशनल कीमतें बढ़ी हैं.

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सरसों की बुवाई 32 प्रतिशत ज्यादा हुई है
भारत का घरेलू तिलहन उत्पादन इस साल बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि मौजूदा रबी सत्र में सरसों की बुवाई एक साल पहले की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत ज्यादा है. सचिव ने कहा कि इसलिए, हम आने वाले महीनों में सरसों की ज्यादा फसल होने की उम्मीद कर सकते हैं, जिससे निश्चित रूप से कीमतों (mustard oil price) में नरमी आएगी. उन्होंने कहा कि सरकार साप्ताहिक आधार पर अपनी नियमित अंतर-मंत्रालयी मीटिंग में जरूरी वस्तुओं की कीमतों की बहुत बारीकी से निगरानी कर रही है.

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