&format=webp&quality=medium)
Budget 2025: आज 31 जनवरी से बजट सत्र शुरू होने जा रहा है. बजट सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के बाद देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी और 1 फरवरी को देश का बजट पेश किया जाएगा. हर साल बजट पेश होने से एक दिन पहले ही इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है. इकोनॉमिक सर्वे में देश के आर्थिक विकास का सालाना लेखा-जोखा होता है, जिसके आधार पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि पिछले एक साल से देश की अर्थव्यवस्था किस तरह की रही. लेकिन क्या आपको पता है कि इकोनॉमिक सर्वे बजट से एक दिन पहले ही क्यों पेश होता है, इसे तैयार कौन करता है और ये क्यों जरूरी है? यहां जान लीजिए
इकोनॉमिक सर्वे एक फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट होता है. इसके 3 भाग होते हैं. पहले हिस्से में अर्थव्यवस्थासे जुड़ी अहम बातें शामिल होती हैं. दूसरे हिस्से में तमाम क्षेत्रों का प्रदर्शन और उनसे जुड़े आंकड़े होते हैं. जबकि तीसरे हिस्से में रोजगार, महंगाई, आयात-निर्यात, बेरोजगारी और उत्पादन जैसी दूसरी जानकारियां होती हैं. इसी इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर यह तय किया जाता है कि आने वाले साल में देश की अर्थव्यवस्था के अंदर किस तरह की संभावनाएं मौजूद हैं.
इकोनॉमिक सर्वे कई मायनों में जरूरी होता है. ये एक तरीके से हमारी अर्थव्यवस्था के लिए डायरेक्शन देने का काम करता है क्योंकि इससे अंदाजा लगता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी चल रही है और इसमें क्या सुधार करना चाहिए. इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर ही सरकार को कई तरह के सुझाव भी दिए जाते हैं.
साल 1947 में जब देश आजाद हुआ तब आर्थिक सर्वेक्षण यानी इकोनॉमिक सर्वे को बजट के साथ ही पेश किया जाता था. लेकिन 1964 में इसे अलग कर दिया गया था और इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा. तब से आज तक इकोनॉमिक सर्वे को बजट से एक दिन पहले ही पेश करने का नियम कायम है.
इकोनॉमिक सर्वे की काफी अहमियत होती है क्योंकि इसके जरिए बीते साल की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा होता है. लेकिन फिर भी इकोनॉमिक सर्वे पेश करने की सरकार के सामने कोई बाध्यता नहीं होती है और न ही सरकार दिए गए सुझावों और सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य होती है. सरकार चाहे तो उनमें से कुछ सुझाव मान सकती है और चाहे तो सभी को खारिज कर सकती है. लेकिन इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर इस बात का अंदाजा लग जाता है कि आने वाले समय में क्या महंगा होगा और क्या सस्ता हो सकता है.
फाइनेंस मिनिस्ट्री के अंतर्गत एक विभाग होता है इकोनॉमिक अफेयर्स और इकोनॉमिक अफेयर्स के अंतर्गत इकोनॉमिक डिवीजन होता है. इसी इकोनॉमिक डिवीजन के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर यानी CEA की देख-रेख में इकोनॉमिक सर्वे तैयार किया जाता है. इकोनॉमिक सर्वे को तैयार करते समय CEA और उनकी टीम पूरे साल भारतीय अर्थव्यवस्था के तमाम पहलुओं जैसे GDP ग्रोथ, महंगाई, रोजगार, इंडस्ट्रीज, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट, सरकारी नीतियों और अन्य आर्थिक कारकों का विश्लेषण करती है. इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाती है. रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांचा और मंजूर किया जाता है और बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है.