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Duty exemption on cotton.
भारत सरकार ने भारतीय टेक्सटाइल बिजनेस के समर्थन और घरेलू बाजार में कॉटन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने 19 अगस्त 2025 से 30 सितंबर 2025 तक कॉटन (HS 5201) के आयात पर लगने वाले आयात शुल्क को अस्थाई रूप से माफ किया था. अब 28 अगस्त 2025 को यह निर्णय लिया गया है कि इस आयात शुल्क छूट को और बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया जाए. यह घोषणा व्यापारियों और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि इससे इस महत्वपूर्ण कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी और टेक्सटाइल बिजनेस को कॉम्पिटिटिव बनाने में मदद मिलेगी.
इस छूट के पहले, भारत में कॉटन के आयात पर 11 फीसदी शुल्क लगाया जाता था, जिसमें शामिल थे 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी, 5% एग्रीकल्चर एंड इन्फ्रास्ट्रक्टर डेवलपमेंट सेस और इसके ऊपर 10% सोशल वेलफेयर सरचार्ज शामिल है. आयात शुल्क में इस तरह की छूट से कच्चे माल की लागत घटेगी जिसकी वजह से वस्त्र निर्माता बेहतर कीमतों पर उत्पादन कर सकेंगे, और उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा. केंद्र सरकार ने इस निर्णय को सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के लिए भी सकारात्मक माना है जो कॉटन आधारित क्लोदिंग प्रोडक्शन में सक्रिय हैं और वर्तमान में वैश्विक बाजार में अमेरिकी टैरिफ के दबाव का सामना कर रहे हैं.
इस आयात शुल्क छूट के पीछे एक बड़ा कारण है अमेरिका द्वारा भारतीय क्लोदिंग और गारमेंट्स पर लगाया गया कुल 50 फीसदी का टैरिफ. अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए इस टैरिफ में 25 फीसदी का बेसिक टैरिफ और अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ शामिल है, जो रूस से तेल की खरीद के कारण भारत पर लगाया गया है. इससे भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इस स्थिति में कॉटन के आयात शुल्क में छूट देकर भारतीय सरकार ने घरेलू निर्माताओं को आर्थिक दबाव से राहत पहुंचाने का प्रयास किया है ताकि वे अपनी लागत को कम कर सके और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रख सकें.
DGCIS का अनुमान है कि भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स ने जुलाई 2025 में 3.1 अरब डॉलर का निर्यात किया और सालाना आधार पर 5.3 फीसदी का ग्रोथ दर्ज किया गया. अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच निर्यात की कुल राशि 12.18 अरब डॉलर रही, जो पिछले वर्ष के इसी अवधि के 11.73 अरब डॉलर की तुलना में 3.87 फीसदी अधिक है। इस वृद्धि में रेडीमेड गारमेंट्स, जूट, कार्पेट और हस्तशिल्प जैसे विविध उत्पादों की निर्यात बढ़त का महत्वपूर्ण योगदान है.