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ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस कंपनी बार्कलेज ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका द्वारा भारत पर 25% सीमा शुल्क और रूसी तेल एवं गैस खरीद को लेकर जुर्माना लगाने से चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर में लगभग 0.30 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है . हालांकि, बार्कलेज ने कहा है कि घरेलू मांग पर आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस शुल्क वृद्धि का व्यापक असर पड़ने की आशंका नहीं है.
बार्कलेज के मुताबिक, यह शुल्क वृद्धि एक अगस्त से लागू होती है तो भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर औसतन प्रभावी शुल्क दर व्यापार-भारित संदर्भ में बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो जाएगी. यह दर दो अप्रैल, 2025 से पहले की 2.7 प्रतिशत और उच्च शुल्क को 90 दिनों तक स्थगित रखे जाने की अवधि में लागू 11.6 प्रतिशत दर से कहीं अधिक है. इसके विपरीत भारत में अमेरिका से आयात होने वाले उत्पादों पर औसत शुल्क दर 11.6 प्रतिशत है.
बार्कलेज का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विदेश-वाणिज्य पर कम निर्भर और घरेलू मांग पर आधारित है, इसलिए इस टैरिफ वृद्धि का व्यापक प्रभाव नहीं होगा. उन्होंने अनुमान लगाया है कि इसके कारण GDP वृद्धि पर लगभग 0.30 प्रतिशत (30 bps) तक की कमी हो सकती है. बार्कलेज ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ताओं के चलते अंतिम शुल्क दर 25% से कम रह सकती है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट में कहा गया है कि FY26 और FY27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है. आईएमएफ ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अपने अनुमान को 20 bps बढ़ाकर 6.4 फीसदी कर दिया है और वित्त वर्ष 27 के लिए अपने विकास पूर्वानुमान को भी 10 bps बढ़ाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP वृद्धि दर को 6.5% रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के स्तर के बराबर है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाने के फैसले के बावजूद अभी भी देश के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत करने का रास्ता खुला हुआ है. यह जानकारी अर्थशास्त्री द्वारा दी गई. अर्थशास्त्री त्रिन्ह गुयेन के अनुसार, ट्रंप का टैरिफ संबंधी कदम बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है. गुयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "क्या यह आश्चर्यजनक है? बिल्कुल नहीं. मैं एक हफ्ते से सोच रहा था कि अमेरिका-भारत समझौता कैसा होगा और सच कहूं तो, मुझे इसका अंदाजा था. मुझे लगता है कि भारत इस खतरे से निपटने के लिए बातचीत कर सकता है. यह अंतिम नहीं है, लेकिन कितना कम हो सकता है, देखना होगा ?"
(एजेंसी इनपुट के साथ)