सस्ते तांबा आयात से घरेलू उद्योग पर संकट! 3% सेफगार्ड ड्यूटी लगाने की मांग

Copper Imports: जीरो-ड्यूटी तांबे के इंपोर्ट में बढ़ोतरी से देश के घरेलू स्मेल्टिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है, जबकि आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए हाल के सालों में 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है.
सस्ते तांबा आयात से घरेलू उद्योग पर संकट! 3% सेफगार्ड ड्यूटी लगाने की मांग

India-UAE CEPA और TRQ पर सवाल.

Copper Imports: इंडस्ट्री बॉडी इंडियन प्राइमरी कॉपर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IPCPA) ने कहा है कि कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत सस्ते तांबे के इंपोर्ट से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को भारी नुकसान हो रहा है और उसने सरकार से सेफगार्ड ड्यूटी और विदेशों से आने वाले शिपमेंट पर मात्रात्मक प्रतिबंधों के रूप में तुरंत दखल देने की मांग की है.

IPCPA के अनुसार, जीरो-ड्यूटी तांबे के इंपोर्ट में बढ़ोतरी से देश के घरेलू स्मेल्टिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है, जबकि आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए हाल के सालों में 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है.

3% सेफगार्ड ड्यूटी लगाने की मांग

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ICPA ने कहा, FTA पार्टनर देशों से जीरो-ड्यूटी इंपोर्ट भारतीय स्मेल्टिंग और रिफाइनिंग को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है और मांग की कि कुछ खास कैटेगरी के तांबे के इंपोर्ट पर, FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) स्टेटस की परवाह किए बिना, 3% सेफगार्ड ड्यूटी लगाई जानी चाहिए.

India-UAE CEPA और TRQ पर सवाल

  • IPCPA ने भारत-UAE CEPA पर खास चिंता जताई है. इस समझौते के तहत कॉपर वायर रॉड्स पर कस्टम ड्यूटी FY26 में घटकर 1% रह गई है और FY27 तक पूरी तरह खत्म होने की संभावना है.
  • इन्फ्लेटेड टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के कारण और बिगड़ी है. जहां TRQ को 29 KTPA पर सीमित रहना था, वहीं इसे 85,000 टन कर दिया गया. नतीजतन, FY22 से FY26 के बीच UAE से कॉपर आयात में 340% की उछाल आई. IPCPA ने मांग की है कि TRQ को मूल स्तर पर कैप किया जाए.

TRQ क्या है?

यह सिस्टम तय मात्रा तक आयात को कम या जीरो टैरिफ पर अनुमति देता है.

ASEAN CEPA और वैल्यू-एडिशन नियमों से बढ़ी चुनौती

IPCPA ने India-ASEAN CEPA में मौजूद क्यूम्युलेटिव वैल्यू-एडिशन नियम पर भी सवाल उठाए हैं. इसके तहत इंडोनेशियाई कॉपर कैथोड्स को इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग के बाद थाईलैंड, मलेशिया या वियतनाम में मामूली ट्रीटमेंट देकर भारत में ड्यूटी-फ्री लाया जा सकता है. इस प्रावधान के चलते 2020 से 2024 के बीच कॉपर वायर आयात 66%, कॉपर ट्यूब आयात 103% बढ़ा है.

इस बीच, इंडोनेशिया ने अपनी स्मेल्टिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाया, जिससे उसकी निर्यात शक्ति मज़बूत हुई. ASEAN में कॉपर ऑपरेशंस में चीनी निवेश ने मुकाबले को और भी असंतुलित कर दिया है, जिसके कारण भारतीय उत्पादक मौजूदा FTA समीक्षा के दौरान कॉपर वायर्स, ट्यूबों और फॉइल को एक्सक्लूजन लिस्ट में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.

वैश्विक स्मेल्टिंग संकट भी बना बड़ा जोखिम

दुनिया भर में कॉपर स्मेल्टिंग उद्योग गंभीर आर्थिक दबाव में है. सेक्टर की अहम कमाई- TC/RC 80% तक गिर चुकी है. 2026 के लिए TC/RC जीरो रहने का अनुमान है, जिससे भारतीय स्मेल्टिंग और रिफाइनिंग ऑपरेशंस व्यावहारिक रूप से अलाभकारी हो सकते हैं.

इस संकट को और बढ़ा रहे हैं- UAE, ASEAN और जापान से कॉपर कैथोड, रॉड, वायर और ट्यूब्स का जीरो-ड्यूटी आयात, जो घरेलू उत्पादन को विस्थापित कर रहा है.

FAQs

1. IPCPA ने सरकार से क्या मांग की है?
कुछ कैटेगरी के कॉपर आयात पर 3% सेफगार्ड ड्यूटी और मात्रात्मक सीमाएं लगाने की मांग.

2. सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को क्या नुकसान हो रहा है?
भारतीय स्मेल्टिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग कमजोर हो रही है.

3. अधिकतम कितने क्षेत्र पर अनुदान मिलेगा?
यह अनुदान 0.1 हेक्टेयर से लेकर 2 हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए उपलब्ध है.

4. India-UAE CEPA में क्या समस्या बताई गई है?
कॉपर वायर रॉड्स पर ड्यूटी घटकर 1% रह गई है और FY27 तक शून्य हो सकती है, जिससे आयात बढ़ रहा है.

5. TRQ क्यों विवाद का कारण है?
TRQ को 29 KTPA की बजाय 85 KTPA कर दिया गया, जिससे आयात में तेज उछाल आया.

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