सरकार ने शुरू की ₹1500 करोड़ की नई योजना, अब देश में बढ़ेगा क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग का काम

भारत सरकार ने ₹1,500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग स्कीम शुरू की है. इसका मकसद ई-वेस्ट और बैटरियों से कीमती खनिज निकालकर देश को आत्मनिर्भर बनाना है. योजना से ₹8,000 करोड़ का निवेश और 70,000 नौकरियों की उम्मीद है. आवेदन की आखिरी तारीख 1 अप्रैल 2026 है.
सरकार ने शुरू की ₹1500 करोड़ की नई योजना, अब देश में बढ़ेगा क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग का काम

भारत सरकार ने देश में खनिजों को दोबारा इस्तेमाल यानी रीसाइक्लिंग करने को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की “क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इंसेंटिव स्कीम” शुरू की है. मंत्रालय ने शनिवार को इसकी आधिकारिक गाइडलाइंस जारी कीं. सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत की विदेशी देशों पर निर्भरता कम होगी और देश में ही कीमती खनिजों को दोबारा तैयार किया जा सकेगा.

मोबाइल, बैटरी और ई-वेस्ट से निकाले जाएंगे कीमती खनिज

इस योजना का मकसद पुराने मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, बैटरी और चार्जर जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे से कीमती खनिज निकालना है. इन उपकरणों में कई तरह के क्रिटिकल मिनरल होते हैं जो मोबाइल, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रक्षा उपकरणों में काम आते हैं. इन्हें रीसाइक्लिंग कर दोबारा उपयोग में लाया जाएगा. इससे देश में खनिजों का दोबारा इस्तेमाल बढ़ेगा और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा क्योंकि ई-वेस्ट से होने वाला प्रदूषण घटेगा.

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छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को भी मिलेगा फायदा

इस योजना से न केवल बड़े उद्योग बल्कि छोटे कारोबार और स्टार्टअप्स को भी लाभ मिलेगा. सरकार ने छोटे उद्योगों को 25 करोड़ रुपये तक और बड़े उद्योगों को 50 करोड़ रुपये तक की सहायता देने का ऐलान किया है. यह सहायता दो हिस्सों में दी जाएगी- पहला नए प्लांट लगाने के खर्च (कैपेक्स) के लिए और दूसरा रोजाना संचालन (ओपेक्स) के खर्च के लिए. छोटे उद्योगों को संचालन के लिए 5 करोड़ और बड़े उद्योगों को 10 करोड़ रुपये तक का लाभ मिलेगा.

आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तारीख

इस स्कीम के लिए आवेदन 2 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुके हैं और 1 अप्रैल 2026 तक जारी रहेंगे. यानी कंपनियों और कारोबारियों के पास आवेदन करने के लिए पूरे छह महीने का समय है. खान मंत्रालय ने बताया कि आवेदन की प्रक्रिया मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है. जो भी कंपनी रीसाइक्लिंग का काम करती है, वह इस योजना का हिस्सा बन सकती है.

सिर्फ असली रीसाइक्लिंग करने वाली कंपनियों को मिलेगा लाभ

सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस योजना का फायदा केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो असली रीसाइक्लिंग यानी खनिजों को दोबारा निकालने का काम करती हैं. जो कंपनियां सिर्फ “ब्लैक मास” या प्रारंभिक अपशिष्ट मटीरियल का उत्पादन करती हैं, उन्हें इंसेंटिव नहीं मिलेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का लाभ केवल असली खनिज रीसाइक्लिंग करने वालों को ही मिले.

निवेश और रोजगार के नए अवसर

सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस योजना से करीब ₹8,000 करोड़ का निवेश आएगा और लगभग 70,000 लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इससे हर साल लगभग 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता तैयार होगी और करीब 40 किलो टन क्रिटिकल मिनरल का उत्पादन किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे देश में रीसाइक्लिंग उद्योग को नई दिशा मिलेगी और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी.

पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत दोनों को फायदा

क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग योजना से न केवल रोजगार और निवेश बढ़ेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होगी. पुराने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से निकलने वाले जहरीले कचरे को रीसाइक्लिंग के जरिए दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा. इससे प्रदूषण घटेगा और संसाधनों की बर्बादी रुकेगी. साथ ही, भारत “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” मिशन की दिशा में एक और मजबूत कदम उठाएगा.

भारत बनेगा क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग का हब

भारत फिलहाल लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों को विदेशों से आयात करता है. इस स्कीम के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि भारत खुद इन खनिजों को रीसाइक्लिंग के जरिए तैयार कर सके. इससे भारत भविष्य में क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है.

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