&format=webp&quality=medium)
क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत 6.7% की दर से आगे बढ़ेगा.
भारतीय मिडिल क्लास और निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आई है. अगर आप इस उम्मीद में बैठे थे कि साल 2027 आते-आते कर्ज सस्ता हो जाएगा, तो रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट आपकी चिंता थोड़ी बढ़ा सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) फिलहाल अपनी ब्याज दरों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने के मूड में नहीं दिख रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है वह 'महंगाई' जो एक बार फिर सिर उठाने की तैयारी में है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि 2027 में आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ने वाला है.
क्रिसिल की रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2027 में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकती है. इसकी मुख्य वजह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी आम आदमी की महंगाई में आने वाली तेजी है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में फूड इंफ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों के दाम फिर से बढ़ सकते हैं. हालांकि, पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से 'नॉन-फूड' सेक्टर में शांति रहेगी, लेकिन खाने की थाली महंगी होने का डर ब्याज दरों में कटौती की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है.
महंगाई की तपिश के बीच एक अच्छी खबर यह है कि भारत की विकास दर यानी जीडीपी (GDP) की रफ्तार स्थिर बनी रहेगी. क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत 6.7% की दर से आगे बढ़ेगा.
इकोनॉमी के इस इंजन को रफ्तार देने का काम केंद्र सरकार का बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पर खर्च और प्राइवेट सेक्टर की ओर से होने वाला नया निवेश करेगा. भले ही महंगाई रियल ग्रोथ पर थोड़ा दबाव डाले, लेकिन सरकार की विकास योजनाओं की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी चमक बरकरार रखेगी.

रुपये की सेहत को लेकर क्रिसिल ने एक बेहद सकारात्मक तस्वीर पेश की है. भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया ट्रेड डील और विदेशी निवेशकों (FPI) की घर वापसी ने रुपये को नई ताकत दी है.
भले ही हम बड़े आंकड़ों की बात करें, लेकिन बाजार में फिलहाल नकदी (Cash) की स्थिति थोड़ी 'टाइट' बनी हुई है. क्रिसिल फाइनेंशियल कंडीशंस इंडेक्स (FCI) जनवरी में -0.5 पर रहा, जो यह बताता है कि वित्तीय स्थिति औसत से थोड़ी सख्त है.
हालांकि, आरबीआई लगातार ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के जरिए बाजार में लिक्विडिटी यानी पैसे का बहाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. पिछले कुछ समय में जो 125 बेसिस पॉइंट की कटौती हुई है, उसका फायदा धीरे-धीरे बैंकों के जरिए कर्ज लेने वालों तक पहुंच रहा है.