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कई मैन्युफैक्चरर्स कीमतों में 5-8% की बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं.
Metal Price Hike: देश में खाद्य महंगा नियंत्रण में है और आगे भी इसके नियंत्रित रहने की उम्मीद है, क्योंकि इस वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है. खरीफ की पैदावार सकारात्मक बनी हुई है और रबी की बुवाई अच्छी तरह से जारी है. लेकिन नए साल 2026 में एयर कंडीशन से लेकर किचन अप्लायंस तक महंगाई की आहट दिख रही है. दरअसल, इंडस्ट्रियल मेटेरियल्स में तेजी का असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है.
कई रिपोर्ट्स में बताया गया कि इन मेटल्स में विशेषकर कॉपर (Copper) की कीमतों के उम्मीद से ज्यादा बढ़ने के कारण कई मैन्युफैक्चरर्स की इनपुट लागत बढ़ गई है और वह और ज्यादा भार वहन करने में असमर्थ हैं, जिसके चलते एसी (AC), किचन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, बाथ फिटिंग्स और कुकवेयर के दाम बढ़ सकते हैं.
मार्जिन को बनाए रखने के लिए कई मैन्युफैक्चरर्स कीमतों में 5-8% की बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं.
बाथवेयर बनाने वाली कंपनियां भी दबाव का सामना कर रही हैं, क्योंकि तांबे (Copper) पर आधारित धातु पीतल की कीमतों में वित्त वर्ष की शुरुआत से दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हुई है. बार-बार आपूर्ति में रुकावटों के बीच कॉपर ने 2009 के बाद से सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की.
इंडोनेशिया, चिली और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में माइनिंग दुर्घटनाओं और चिली की एक बड़ी खदान में मजदूरों की हड़ताल ने उपलब्धता को कम कर दिया है, जबकि ट्रेड की अनिश्चितताओं के कारण अमेरिका को शिपमेंट में तेजी आई है.

बता दें कि दुनिया में मेटल की खपत में, स्टील और एल्युमीनियम के बाद कॉपर तीसरे स्थान पर आता है. यह एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी किस्मत सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था की स्थिति को दिखाती है, इसलिए इसे डॉ. कॉपर भी कहा जाता है. तांबा, बिजली का सबसे अच्छा नॉन-कीमती मेटल कंडक्टर है, इसमें असाधारण ताकत, लचीलापन और रेंगने और जंग लगने के प्रति प्रतिरोध होता है, जो इसे इमारतों में इलेक्ट्रिकल वायरिंग के लिए पसंदीदा और सबसे सुरक्षित कंडक्टर बनाता है.
एल्युमिनियम (Aluminium) की कीमतों में बढ़ोतरी चीन में स्मेल्टिंग क्षमता पर लगी रोक और लगातार ज्यादा बिजली लागत के कारण यूरोप में कम उत्पादन जैसी संरचनात्मक आपूर्ती की दिक्कतों को दिखाती है, जबकि कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े प्रोड्यूसर इंडोनेशिया द्वारा प्रोडक्शन में कटौती की योजनाओं का संकेत देने और पीटी वेल इंडोनेशिया की एक खदान में अस्थायी रोक के कारण छोटी अवधि में आपूर्ति की चिंताओं के बाद निकेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई.
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कॉपर, एल्युमिनियम और निकेल में ही नहीं, बल्कि सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. 2025 में सोने ने करीब 65% और चांदी ने 145% के आसपास का रिटर्न दिया है.
1. AC और किचन अप्लायंस महंगे क्यों हो सकते हैं?
कॉपर और एल्युमिनियम की कीमतें उम्मीद से ज्यादा बढ़ी हैं.
2. कॉपर और एल्युमिनियम के दाम कितने बढ़ गए हैं?
एल्युमिनियम ₹3,000 डॉलर/टन से ऊपर पहुंच गया है, कॉपर ₹12,000 डॉलर/टन के ऑल-टाइम हाई पर है.
3. AC, किचन और बाथवेयर की कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं?
कई मैन्युफैक्चरर्स 5–8% तक कीमतें बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.
4. कॉपर की कीमतें अचानक क्यों उछली हैं?
इसके पीछे कई वैश्विक कारण हैं.
5. एल्युमिनियम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
चीन में स्मेल्टिंग क्षमता पर रोक आदि.
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