क्या खत्म होगी दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक लड़ाई? चीन-अमेरिका ट्रेड वार्ता से बड़ी उम्मीदें

चीन और अमेरिका के बीच नई व्यापार वार्ता मलेशिया में 25 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई है. यह वार्ता 27 अक्टूबर तक चलेगी और इसमें टैरिफ, एक्सपोर्ट कंट्रोल्स और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की जा रही है. दोनों देश बढ़ते व्यापार तनाव को कम करने की कोशिश में हैं.
क्या खत्म होगी दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक लड़ाई? चीन-अमेरिका ट्रेड वार्ता से बड़ी उम्मीदें

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चीन और अमेरिका एक बार फिर व्यापारिक रिश्तों को सुधारने के लिए बातचीत की मेज पर आ गई हैं. मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में 25 अक्टूबर 2025 को दोनों देशों के बीच नई दौर की व्यापार वार्ता शुरू हुई, जो 27 अक्टूबर तक चलेगी. इन चर्चाओं का मकसद है- टैरिफ, एक्सपोर्ट कंट्रोल्स और सप्लाई चेन से जुड़ी बढ़ती खींचतान को कम करना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को दोबारा पटरी पर लाना.

कौन-कौन शामिल हैं इस वार्ता में?

अमेरिका की ओर से इस वार्ता का नेतृत्व ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीयर (Jamison Greer) कर रहे हैं. वहीं चीन की ओर से वाइस प्रीमियर हे लीफेंग (He Lifeng) अपनी टीम के साथ हिस्सा ले रहे हैं. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि हे लीफेंग 24 से 27 अक्टूबर तक मलेशिया में रहेंगे और अमेरिकी प्रतिनिधियों से कई दौर की मुलाकात करेंगे.

क्या है वार्ता का मुख्य एजेंडा?

इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जिनमें शामिल हैं-

टैरिफ (Import-Export Taxes) पर बढ़ता विवाद

एक्सपोर्ट कंट्रोल्स यानी निर्यात पर लगाई जा रही सीमाएं

सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने की रणनीति

और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को दोबारा मज़बूत करना

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ (Xinhua) ने बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने शनिवार सुबह औपचारिक बातचीत की शुरुआत की.

ट्रंप की धमकी और बढ़ता तनाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में चीन के “रेयर अर्थ्स इंडस्ट्री” पर नियंत्रण बढ़ाने के फैसले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर चीन ने अपनी नीतियां नहीं बदलीं, तो अमेरिका चीनी आयात पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है. इसके अलावा, दोनों देशों ने एक-दूसरे के जहाजों पर “अराइवल फीस” भी लगाई है. यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिका की “सेक्शन 301 जांच” में यह निष्कर्ष निकला कि चीन की इंडस्ट्री पर पकड़ अनुचित है.

APEC समिट और संभावित ट्रंप-शी मुलाकात

ट्रंप प्रशासन ने पहले कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दक्षिण कोरिया में होने वाले APEC समिट (31 अक्टूबर) के दौरान हो सकती है. लेकिन अब खबरें हैं कि बढ़ते तनाव को देखते हुए ट्रंप इस मुलाकात को रद्द भी कर सकते हैं. फिर भी, ट्रंप ने कहा कि वे चीन के साथ “एक अच्छा और न्यायसंगत सौदा” करना चाहते हैं ताकि यह व्यापार युद्ध खत्म हो सके.

क्यों खास है यह वार्ता?

यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही महंगाई, युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावटों से जूझ रही हैं. अमेरिका और चीन के बीच किसी भी समझौते का असर पूरी ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ता है- खासकर एशिया और यूरोप के बाजारों पर. मलेशिया में हो रही यह बातचीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उसी दौरान ASEAN (एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशन्स) की बैठक भी चल रही है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप भी हिस्सा लेंगे.

दोनों देशों की उम्मीदें

दोनों पक्षों की कोशिश यही है कि आगे के व्यापारिक रिश्तों में संतुलन और भरोसा बहाल किया जा सके. अमेरिका चाहता है कि चीन अपने रेयर अर्थ्स और तकनीकी एक्सपोर्ट्स पर पारदर्शी नीति अपनाए. वहीं, चीन चाहता है कि अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ हटाकर सामान्य व्यापार बहाल करे.

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हम किसी झगड़े के लिए नहीं बैठे हैं. हमारा मकसद एक निष्पक्ष और स्थिर व्यापार समझौता करना है.” वहीं, चीनी प्रतिनिधि दल ने भी कहा, “हम बातचीत के जरिए सभी मतभेद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन हमें समान सम्मान की उम्मीद है.”

खबर से जुड़े FAQs

1. यह बैठक कब और कहां हो रही है?

चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता 25 से 27 अक्टूबर 2025 तक मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हो रही है.

2. इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

दोनों देशों के बीच टैरिफ, एक्सपोर्ट कंट्रोल्स और सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों को कम करना.

3. चीन की ओर से कौन वार्ता में शामिल है?

चीन के वाइस प्रीमियर हे लीफेंग इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं.

4. क्या ट्रंप-शी मुलाकात होगी?

ट्रंप ने मुलाकात की संभावना जताई है, लेकिन हालिया तनाव के चलते यह रद्द भी हो सकती है.

5. इस वार्ता का असर क्या होगा?

अगर बातचीत सफल रही, तो दोनों देशों के रिश्तों में सुधार और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आ सकती है.

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