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कच्चा तेल और सोने का आयात बढ़ा सकता है चालू खाते का घाटा (प्रतीकात्मक इमेज/AI/Chat GPT)
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने की संभावना से भारत के चालू खाते में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स (ICICI सिक्युरिटीज) की एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है. ब्रोकरेज हाउस ICICI सिक्युरिटीज के मुताबिक मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट से भारत को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. गौरतलब है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के कारण तेल आयात मासिक आधार पर 53% उछलकर 18.6 अरब डॉलर हो गया है, जो 1 साल के सबसे उच्च स्तर पर है. हालांकि, हाई बेस वैल्यू के कारण इसमें 10 फीसदी की गिरावट आई है.
ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक ICICI सिक्युरिटीज के मुताबिक यदि गैर-जरूरी आयातों को नियंत्रित किया जाए और ग्लोबल रिस्क सेंटमेंट्स स्थिर होने पर पूंजी प्रवाह में चालू खाते का घाटे जीडीपी के 1.5 से 2% के बीच रह सकता है.
गैर जरूरी आयात पर लगानी होगी रोक
अप्रैल (FY27) में आयात-निर्यात के मुख्य आर्थिक आंकडे
| कैटेगरी | अप्रैल का आंकडा (अरब डालर में) | सालाना वृद्धि/कमी (YoY) |
| कुल वस्तु निर्यात | $43.60 | 14% |
| कुल वस्तु आयात | $71.90 | 10% |
| सोने का आयात | $5.60 | 82% |
| तेल निर्यात | $9.60 | 35% |
| तेल आयात | $18.60 | -10% |
| शुद्ध सेवा निर्यात | $20.60 | 29% |
आयात के मोर्च पर अप्रैल में गुड्स इंपोर्ट में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें सोने के इंपोर्ट की सबसे बड़ी भूमिका रही है. अप्रैल में सोने का आयात 82 फीसदी बढ़कर अब 5.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
71.9 अरब डॉलर हुआ गुड्स इंपोर्ट
भारत के निर्यात में तेल निर्यात का बड़ा योगदान रहा है, जो 35 फीसदी के सालाना और 85 फीसदी की मासिक उछाल के साथ 9.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. नॉन-पेट्रोल एक्सपोर्ट 34 अरब डॉलर रहा है.
जेम्स और ज्वैलरी का निर्यात सिकुड़ा
सेक्टोरल और क्षेत्रीय निर्यात का प्रदर्शन (अप्रैल FY27)
| सेक्टर / क्षेत्र | प्रदर्शन (सालाना - YoY) |
| इलेक्ट्रानिक्स निर्यात | +40% ($5.2 अरब) |
| सिरेमिक और कांच के बर्तन | -41% |
| अमेरिका को निर्यात | +1.1% ($8.5 अरब) |
| गैर-अमेरिकी देशों को निर्यात | +17% ($35 अरब) |
| पश्चिम एशिया को निर्यात | -28% |
आयात और निर्यात के अंतर के कारण अप्रैल में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर हो गया है, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. हालांकि, सर्विस सेक्टर से राहत मिली और नेट सर्विस एक्सपोर्ट 29 फीसदी बढ़कर 20.6 अरब डॉलर रहा. इसके बावजूद सेवाओं सहित कुल गुड्स और सर्विस घाटा मार्च के 0.3 अरब डॉलर के सरप्लस से गिरकर अप्रैल में 7.8 अरब डॉलर के घाटे में तब्दील हो गया है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ब्लॉक होने के कारण पश्चिम एशिया के देशों के निर्यात में 28 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
(ANI इनपुट के साथ)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 चालू खाते का घाटा क्या होता है?
कोई देश गुड्स और सर्विस का एक्सपोर्ट और दूसरे विदेशों से आने वाले धन की तुलना में दूसरे देश से आने वाले सामान पर ज्यादा खर्च करता है तो उसे चालू खाते का घाटा कहते हैं.
Q2 चालू खाते का घाटा कैसे घटता या बढ़ता है?
चालू खाते के घाटे का बढ़ना या घटना इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के बैलेंस पर निर्भर करता है. अगर कोई देश महंगा और कच्चा तेल या बड़ी मात्रा में सोना इंपोर्ट करता है और अपना सामान बाहर कम बेच पाता है तो यह घाटा बढ़ता है.
Q3 व्यापार घाटा क्या होता है?
देश द्वारा किए गए इंपोर्ट की कुल कीमत और विदेश में किए गए एक्सपोर्ट की कुल कीमत के बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं.
Q4 व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे में क्या अंतर होता है?
व्यापार घाटा केवल वस्तुओं के आयात और निर्यात के अंतर को मापता है. चालू खाते के घाटे में व्यापार घाटे के साथ-साथ सवाओं का आयात-निर्यात और विदेश से आने वाले रेमिटेंसेस भी शामिल होते हैं. व्यापार घाटा, चालू खाते के घाटे का ही एक हिस्सा है.
Q5 FPI आउटफ्लो किसे कहते हैं?
जब विदेशी निवेशक किसी देश के शेयर मार्केट, बांड और दूसरे फाइनेंशियल एसेट्स में अपना निवेश किया हुआ पैसा निकालकर अपने देश में ले जाते हैं तो उसे FPI आउटफ्लो कहते हैं.