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मोदी कैबिनेट के 5 बड़े फैसले!
बुधवार का दिन देश के विकास और करोड़ों अन्नदाताओं के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट मीटिंग में एक-दो नहीं, बल्कि पांच ऐसे बड़े फैसले लिए गए जो सीधे आपकी जेब, आपकी खेती और आपके सफर पर बड़ा असर डालेंगे. कुल मिलाकर 1,74,207 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ हो गया है.
सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वही हुआ जिसका अंदाजा ज़ी बिज़नेस ने पहले ही लगा लिया था. ज़ी बिज़नेस की खबर पर एक बार फिर सरकार की आधिकारिक मुहर लग गई है. चाहे वो किसानों को मिलने वाली खाद की सब्सिडी हो या राजस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बदलने वाले प्रोजेक्ट्स, सरकार ने आज तिजोरी खोल दी है. आइए, कहानी की तरह समझते हैं कि इन फैसलों से आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आने वाला है.
खेती-किसानी करने वाले हमारे किसान भाइयों के लिए यह खबर सबसे राहत भरी है. खरीफ सीजन 2026 (1 अप्रैल से 30 सितंबर तक) के लिए सरकार ने Nutrient Based Subsidy (NBS) को मंजूरी दे दी है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पीएम मोदी हमेशा किसानों के लिए एक ढाल की तरह खड़े रहते हैं. दुनिया में खाद की कीमतें कितनी भी बढ़ें, सरकार उसका बोझ किसानों पर नहीं आने देती.
बजट में भारी बढ़ोतरी: इस बार खरीफ सीजन के लिए ₹41,533.81 करोड़ मंजूर किए गए हैं. यह पिछले साल (खरीफ 2025) के मुकाबले करीब ₹4,317 करोड़ ज्यादा है.
सस्ती खाद की गारंटी: DAP और NPKS जैसे 28 ग्रेड के उर्वरक अब किसानों को किफायती दामों पर मिलते रहेंगे.
इंटरनेशनल मार्केट का असर खत्म: खाद बनाने वाले कच्चे माल जैसे यूरिया, DAP और सल्फर की ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब किसान की जेब पर नहीं पड़ेगा.
| विवरण | खरीफ 2025 | खरीफ 2026 (मंजूर) | अंतर |
| कुल सब्सिडी बजट | ₹37,216.15 करोड़ | ₹41,533.81 करोड़ | ₹4,317 करोड़ |
गुलाबी नगरी जयपुर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है. शहर की ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने के लिए जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी मिल गई है. यह प्रोजेक्ट न सिर्फ जयपुर को मॉडर्न बनाएगा, बल्कि 'विकसित राजस्थान' के सपने को भी सच करेगा.
प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़: यह 41 किलोमीटर लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर होगा, जिसमें कुल 36 स्टेशन बनेंगे.
कनेक्टिविटी का जाल: यह लाइन सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड और एसएमएस हॉस्पिटल जैसे बड़े केंद्रों को जोड़ेगी.
बजट और समय: इस प्रोजेक्ट पर ₹13,037.66 करोड़ खर्च होंगे और इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
एयरपोर्ट पर अंडरग्राउंड स्टेशन: खास बात यह है कि एयरपोर्ट के पास मेट्रो स्टेशन जमीन के नीचे यानी अंडरग्राउंड होगा.
बड़ी बात: अभी जयपुर मेट्रो में रोज करीब 60 हजार लोग सफर करते हैं. फेज-2 बनने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा और प्रदूषण भी घटेगा.
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राजस्थान की अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए कैबिनेट ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा फंड मंजूर किया है. यह प्रोजेक्ट सिर्फ तेल नहीं निकालेगा, बल्कि राजस्थान और केंद्र सरकार की झोली भी भरेगा.
HPCL राजस्थान की क्षमता: इस रिफाइनरी की कैपेसिटी 9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन सालाना) होगी.
रेवेन्यू की बारिश: इस प्रोजेक्ट से केंद्र और राज्य सरकार को करीब ₹21,000 करोड़ का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है.
लागत: इसके लिए ₹79,459 करोड़ के भारी-भरकम बजट को हरी झंडी मिली है.
ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होगा.
भारी निवेश: इस प्रोजेक्ट के लिए करीब ₹26,070 करोड़ की राशि मंजूर की गई है.
क्लीन एनर्जी: यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के अनुकूल बिजली पैदा करेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोयला मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी संजीव कुमार कस्सी ने देश को भरोसा दिलाया कि भारत में कोयले की कोई कमी नहीं है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत ने 200 मिलियन टन (MT) से ज्यादा कोयला उत्पादन और डिस्पैच का आंकड़ा पार कर लिया है. हमारे पास माइंस, पावर प्लांट और पोर्ट पर पर्याप्त स्टॉक है. पावर जेनरेशन के मामले में देश पूरी तरह स्टेबल है. साल 2022-23 के मुकाबले उत्पादन में 88% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो हमारी बढ़ती ताकत को दिखाती है.
आज के ये पांचों फैसले दिखाते हैं कि सरकार का फोकस 'अन्नदाता' की खुशहाली और देश के 'इंफ्रास्ट्रक्चर' को वर्ल्ड क्लास बनाने पर है. जहां एक तरफ किसानों को खाद की महंगाई से बचाया गया है, वहीं जयपुर मेट्रो और राजस्थान रिफाइनरी जैसे प्रोजेक्ट्स से लाखों रोजगार पैदा होंगे और आम आदमी का जीवन आसान होगा. बिजली और कोयले के मोर्चे पर देश की मजबूती यह सुनिश्चित करती है कि आने वाले समय में विकास की रफ्तार थमेगी नहीं.