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कैबिनेट का बड़ा फैसला, कई सारी नेशनल हाईवे परियोजनाओं को मंजूरी (फोटो - AI)
देश में सड़क और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार, ओडिशा और तेलंगाना में कई बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं की कुल लागत ₹20,500 करोड़ से ज्यादा है.
इन प्रोजेक्ट्स का मकसद राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना, माल ढुलाई को तेज करना और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इन फैसलों से सड़क निर्माण, EPC कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और निर्माण सामग्री से जुड़े सेक्टर को फायदा मिलने की संभावना है.
कैबिनेट ने बिहार में NH-31 और NH-231 के खगड़िया–पूर्णिया सेक्शन को 4-लेन बनाने को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹3,936 करोड़ तय की गई है और इसकी कुल लंबाई 144 किलोमीटर होगी.
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यह कॉरिडोर सीमांचल क्षेत्र, खासकर कटिहार–पूर्णिया बेल्ट को भागलपुर, खगड़िया और पटना से बेहतर तरीके से जोड़ेगा. इसके अलावा यह बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा.
यह परियोजना BOT (Build, Operate, Transfer) यानी टोल मॉडल पर विकसित की जाएगी. इससे यात्रा समय कम होने, माल परिवहन बेहतर होने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है.
सरकार ने ओडिशा में ग्रीनफील्ड कोस्टल हाईवे प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है. यह परियोजना रामेश्वर–कोणार्क–पारादीप कॉरिडोर का हिस्सा होगी और आगे चलकर पश्चिम बंगाल के दीघा तक बड़े तटीय नेटवर्क से जुड़ेगी. इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 160 किलोमीटर होगी और कुल लागत ₹8,301 करोड़ रखी गई है.
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इसमें दो हिस्सों में काम किया जाएगा
दोनों प्रोजेक्ट HAM (Hybrid Annuity Model) के तहत विकसित किए जाएंगे.
कैबिनेट ने तेलंगाना में NH-63 और NH-563 के अहम हिस्सों को 4-लेन बनाने की मंजूरी भी दी है. इसमें अरमूर–जगतियाल–मंचेरियल सेक्शन और जगतियाल–करीमनगर सेक्शन शामिल हैं. यह प्रोजेक्ट भारतमाला परियोजना के इंटर-कॉरिडोर कनेक्टिविटी कार्यक्रम का हिस्सा है.
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यह हाईवे NH-44, NH-363 और NH-163G को बेहतर तरीके से जोड़ेंगे और उत्तर तेलंगाना के औद्योगिक, खनन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती देंगे. करीमनगर और जगतियाल जैसे प्रमुख जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है.
इन परियोजनाओं से सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं. साथ ही सीमेंट, निर्माण सामग्री, लॉजिस्टिक्स और टोल ऑपरेशन से जुड़े कारोबारों को भी फायदा मिलने की संभावना है.सरकार के इन बड़े फैसलों को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
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