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भारत में इलाज सस्ता है- ये बात दुनिया मानती है. लेकिन इसी “सस्ते इलाज” की सबसे बड़ी कीमत कौन चुका रहा है? छोटे और मझोले डॉक्टर-चलित अस्पताल. Budget 2026 से पहले Indian Medical Association (IMA) ने सरकार को जो बजट प्रपोजल सौंपा है, वो सिर्फ मांगों की लिस्ट नहीं, बल्कि भारत की हेल्थ सिस्टम की पूरी तस्वीर है- कम खर्च, ज्यादा जिम्मेदारी और बढ़ता दबाव.
IMA साफ कहती है- अगर भारत को Viksit Bharat 2047 बनाना है, तो रास्ता Swasth Bharat से होकर ही जाएगा.
IMA का सबसे बड़ा फोकस है सरकारी हेल्थ खर्च. आज की स्थिति ये है- भारत में सरकारें मिलकर हेल्थ पर GDP का सिर्फ 1.1-1.9% खर्च करती हैं, जबकि IMA की मांग है कम से कम 2.5% तुरंत और 2030 तक 5% GDP हेल्थ सेक्टर को मिले.
IMA का तर्क सीधा है- भारत में 63% हेल्थ खर्च आम आदमी अपनी जेब से देता है. इसी वजह से हर साल 5.5 करोड़ लोग सिर्फ इलाज के खर्च से गरीब हो जाते हैं.
IMA ने आयुष्मान भारत (PMJAY) को लेकर बेहद कड़े शब्दों में बात कही है.
- PMJAY में थर्ड पार्टी पेयर सिस्टम इलाज को जटिल बना रहा है
- सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को एक जैसे पैकेज, लेकिन लागत अलग
- असल रिस्क प्राइवेट अस्पतालों पर ट्रांसफर कर दिया गया है
- पेमेंट में देरी, क्लेम रिजेक्शन और रिकवरी से
- छोटे अस्पतालों का कैशफ्लो टूट रहा है
- DBT मॉडल (पैसा सीधे मरीज को)
- Copay सिस्टम
- मरीज को डॉक्टर/अस्पताल चुनने की आजादी
- पैकेज रेट्स को मेडिकल महंगाई से जोड़ना
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- भारत में अभी 1.3 बेड प्रति 1000 आबादी
- WHO मानक से 1.7 बेड कम
- कुल जरूरत: 24 लाख नए बेड
- 70% बेड प्राइवेट सेक्टर में हैं
- ज्यादातर अस्पताल 50 बेड से कम
- पूंजी की कमी, रेगुलेशन और प्राइस कंट्रोल से ये अस्पताल दब रहे हैं
- अस्पतालों को इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टेटस
- 30 साल तक सस्ते लोन
- मेडिकल इक्विपमेंट पर तेज depreciation
- Tier-2, Tier-3 शहरों में टैक्स इंसेंटिव
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- लाइफ सेविंग मेडिकल इक्विपमेंट पर NIL GST
- पुराने मेडिकल उपकरण को स्क्रैप मानकर टैक्स
- वैक्सीन पर 100% GST छूट
- HPV वैक्सीन के लिए
- सरकारी सब्सिडी
- NGO को सीधी मदद
- ताकि सर्वाइकल कैंसर से लड़ाई सस्ती हो सके.
- डेटा सिक्योरिटी
- हेल्थ सेक्टर में कार्टेलाइजेशन
- विदेशी कंट्रोल का खतरा
- अस्पतालों में FDI पर सरकारी स्क्रीनिंग
- 20 साल का लॉक-इन
- क्रॉस होल्डिंग पर रोक
- मेडिकल डेटा के लिए सख्त कानून
IMA ने एक नया सुझाव दिया है- National Healthcare Fund, ताकि डॉक्टर-चलित अस्पतालों को पूंजी मिले. हेल्थ सिस्टम पर रणनीतिक नियंत्रण भारत के हाथ में रहे और फैसले डॉक्टर करें, कॉरपोरेट नहीं.
IMA का बजट प्रपोजल एक बात साफ कहता है- भारत का हेल्थ मॉडल अभी भी डॉक्टरों की मेहनत पर टिका है, लेकिन पॉलिसी सपोर्ट के बिना ये मॉडल ज्यादा दिन नहीं चलेगा. Budget 2026 में अगर सरकार ने हेल्थ को वाकई प्राथमिकता दी, तो ये सिर्फ डॉक्टरों की जीत नहीं होगी, बल्कि आम मरीज की सबसे बड़ी राहत होगी.
A. IMA भारत की सबसे बड़ी डॉक्टरों की संस्था है, जो हेल्थ पॉलिसी पर सरकार को सुझाव देती है.
A. हेल्थ पर सरकारी खर्च को GDP के 5% तक बढ़ाना.
A. कम पैकेज रेट, देरी से भुगतान और थर्ड पार्टी कंट्रोल.
A. इलाज, वैक्सीन और मेडिकल इक्विपमेंट सस्ते होंगे.
A. संभावना है, क्योंकि हेल्थ अब आर्थिक ग्रोथ से जुड़ा मुद्दा बन चुका है.