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Budget 2024-25: हर साल 1 फरवरी को देश का बजट पेश होता है, जिसे देश के वित्त मंत्री प्रस्तुत करते हैं. इस बजट में सालभर का लेखा-जोखा होता है. जनवरी का महीना शुरू हो चुका है और इसी के साथ बजट का काउंटडाउन भी शुरू हो गया है. इस साल 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) अपना छठवां बजट देश के सामने पेश करेंगी. बजट में आम लोगों के लिए भी कई तरह की घोषणाएं होती हैं, ऐसे में कई बार उन्हें कई तरह के फायदे भी होते हैं और कई बार नुकसान भी झेलने पड़ते हैं.
इस बीच मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा इंतजार इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़ी घोषणाओं का होता है. आजादी के बाद से अब तक तमाम सरकारें बदलीं और इस दौरान बजट पेश करते समय कई तरह के प्रयोग हुए. इनकम टैक्स को लेकर भी कई तरह के ऐलान हुए. लेकिन आज हम आपको बताएंगे बजट की ऐसी अनोखी घोषणा के बारे में जिसके कारण कुंवारे लोगों का बजट बिगड़ गया था और उन पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया था. पढ़ें ये दिलचस्प किस्सा.
बात 1955-56 के बजट की है. उस समय चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख जिन्हें सी डी देशमुख (C. D. Deshmukh) वित्त मंत्री थे. तत्कालीन वित्त मंत्री ने उस समय के बजट में ऐसी अनोखी घोषणा कर दी थी, जिससे सभी लोग हैरान थे. उस बजट में उन्होंने शादीशुदा और अविवाहितों के लिए अलग-अलग टैक्स स्लैब घोषित किया गया था. इस घोषणा के बाद कुंवारे लोगों पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ गया था. उस समय शादीशुदा लोगों के लिए 1,500 रुपए का मौजूदा टैक्स एक्जेम्प्ट स्लैब बढ़ाकर 2,000 रुपए कर दिया गया था और अविवाहितों के लिए इसे घटाकर 1,000 रुपए किया गया था.
शादीशुदा लोगों और कुंवारे लोगों के लिए बजट की अलग-अलग स्लैब का ये फैसला योजना आयोग की सिफारिश के आधार पर लिया गया था. ये ऐसा पहला मौका था जब किसी बजट में इनकम टैक्स के मामले में इस तरह की घोषणा हुई थी. इसके साथ ही इस बजट में इनकम टैक्स पर अधिकतम दरों को 5 आना से घटाकर 4 आना कर दिया गया था. यही वो मौका था जब बजट स्कीम का पहली बार हिंदी वर्जन भी लाया गया था. इसके बाद से ही एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट का का हिंदी वर्जन और एक्सप्लेनेटरी मेमोरेंडम सर्कुलेट किया जाता है.
1955-56 में आए बजट के टैक्स स्लैब की बात करें तो शादीशुदा लोगों पर 0 से 2,000 रुपए की कमाई पर कोई टैक्स नहीं था. 2,001 रुपए से 5,000 रुपए की कमाई पर रुपए में 9 पाई और 5,001 रुपए से 7,500 रुपए तक की आमदनी पर रुपए में एक आना और 9 पाई टैक्स के रूप में चुकानी पड़ती थी. वहीं अगर कुंवारे लोगों की बात करें तो 0 से 1,000 रुपए की कमाई पर कोई टैक्स नहीं था. 1001 रुपए से 5,000 रुपए की कमाई पर रुपए में 9 पाई और 5,001 रुपए से 7,500 रुपए तक की आमदनी पर रुपए में एक आना और 9 पाई टैक्स के रूप में देने पड़ते थे.