बजट 2019 : सी-2 फार्मूले से तय होना चाहिए MSP, तभी मिलेगी किसानों को राहत

पिछले बजट में सरकार ने एमएसपी डेढ़ गुना करने की घोषणा की थी, लेकिन यह होनी चाहिए थी सी-2 फार्मूले पर, मगर की गई ए-2 फार्मूले पर.
बजट 2019 : सी-2 फार्मूले से तय होना चाहिए  MSP, तभी मिलेगी किसानों को राहत

लोकसभा चुनावों से पहले पेश होने वाले बजट का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. इस बजट से किसानों को बहुत उम्मीदें हैं. (फोटो- Zeebis/ Shriram Sharma)

मोदी सरकार के लोकसभा चुनावों से पहले पेश होने वाले बजट का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. बजट की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, लोगों को बजट से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. हालांकि यह अंतरिम बजट है और सरकार इसमें बड़ी घोषणाएं नहीं कर सकती, फिर भी सरकार की कोशिश रहेगी कि आने वाले चुनावों को देखते हुए समाज के हर वर्ग को खुश किया जाए. इस बजट से सबसे ज्यादा उम्मीदें देश के अन्नदाता को हैं, क्योंकि तमाम घोषणाएं और योजनाओं के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल रही है. किसान कर्ज का जाल में फंस रहा है और मौत को गले लगा रहा है. कृषि क्षेत्र के जानकार और किसानों की पैरवी करने वाले किसान नेताओं को उम्मीद है कि सरकार को खेती-बाड़ी और किसानों को लेकर बड़ी घोषणाएं करनी चाहिए.

बजट में किसानों की उम्मीद को लेकर हमने किसानों के मुद्दों को एक लंबे समय से उठा रहे गाजियाबाद के किसान नेता चौधरी अजयवीर सिंह से बात की. चौधरी अजयवीर सिंह किसानों की अगुवाई करने के साथ-साथ लोकदल के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता भी हैं.

अजयवीर सिंह ने बताया कि एक फरवरी को पेश होने वाले बजट से किसानों को बहुत उम्मीदें हैं, खासकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर. उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर एमएसपी को डेढ़ गुना तो कर दिया, लेकिन अधूरेपन के साथ.

Add Zee Business as a Preferred Source
Chaudhary Ajayveer Singh

चौधरी अजयवीर ने बताया कि स्वामीनाथन आयोग ने अपनी सिफारिशों में एमएसपी को सी-2 फार्मूले से तय करने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने ए-2 फार्मूले पर एमएसपी में इजाफा किया था, जोकि किसानों के साथ सरासर अन्याय है.

क्या है ए-2 और सी-2 फार्मूला
ये सी-2 फार्मूला क्या है, इस पर अजयवीर सिंह ने बताया कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ए-2 फार्मूले से तय किया जाता है, जबकि स्वामीनाथन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एमएसपी के लिए सी-2 फार्मूले को अपनाने की बात कही थी. ए-2 फार्मूले में किसानों के फसल उत्पादन में किए गए तमाम नकदी खर्च शामिल होते हैं. जैसे बीज, खाद, केमिकल, मजदूर लागत, ईंधन, सिंचाई आदि के खर्च शामिल होते हैं.

एक अन्य फार्मूला होता है और कहते हैं ए2+एफएल लागत फार्मूला. इसमें तमाम नकद खर्चों के साथ-साथ मजदूरों की मजदूरी तथा किसान परिवार के सदस्यों की मेहनत मेहनताना जोड़ी जाती है.

Chaudhary Ajayveer Singh

जबकि सी-2 फार्मूले में फसल तैयार होने में आने वाले नकद खर्च, गैर नकदी लागत (किसान और उसके परिवार की मेहनत) और उसमें किसान की जमीन का लीज रेंट तथा किसान की अन्य पूंजी का ब्याज शामिल होता है.

अजयवीर ने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने एमएसपी डेढ़ गुना करने की घोषणा की थी, लेकिन यह होनी चाहिए थी सी-2 फार्मूले पर, मगर की गई ए-2 फार्मूले पर.

बिजली तथा उर्वरकों पर मिलनी चाहिए राहत
अजयवीर सिंह बताते हैं कि किसी भी फसल को तैयार करने पर सबसे ज्यादा खर्च बिजली, खाद और कीटनाशकों पर आता है. सरकार को चाहिए कि कृषि बिजली के दामों को कम किया जाए और उर्वरक तथा कीटनाशकों को सस्ता किया जाए. इससे किसानों को एक बड़ी राहत मिलेगी.

सरकार खुद खरीदे किसानों के उत्पाद
किसान नेता अजयवीर सिंह ने बताया कि किसान पैसा खर्च करके, दिनरात खून-पसीना बहाकर अपने खेत में फसल उगाता है, लेकिन असल कमाई बिचौलिये खाते हैं. सरकार को चाहिए कि इस बिचौलिये सिस्टम को खत्म करके किसानों के उत्पाद को खुद खरीदे. ताकि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके. खासकर फल-सब्जी किसानों को बिचौलियों के कारण बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है.

गन्ना किसानों की बकाया राशि का भुगतान कराए सरकार
अजयवीर ने गन्ना किसानों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने बताया कि सरकारी तंत्र में गन्ना किसान बुरी तरह से पिसा हुआ है. चीनी मिलों को शुरू हुए तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान का भुगतान तो दूर अभी पिछला बकाया भी नहीं मिला है. सरकार को चाहिए कि बजट में ऐसा प्रावधान हो जिससे गन्ना किसानों को समय पर उनके गन्ने का भुगतान मिल जाए.

उन्होंने बताया कि अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो पिछले साल यूपी की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का ब्याज सहित करीब ढाई हजार करोड़ का बकाया है, और इस साल का 7 हजार करोड़ और बैलेंस हो गया है. 14 जनवरी तक यूपी में गन्ने का 12 हजार करोड़ का बकाया है, जिसमें से 4 हजार करोड़ का ही भुगतान हुआ है.

अजयवीर ने बताया कि सरकार चीनी मिलों को बकाया भुगतान के लिए बजट जारी करती है उसे चीनी मिलों को न देकर किसानों के खाते में ट्रांसफर करना चाहिए. क्योंकि चीनी मिल सरकार से मिले बजट से किसानों का भुगतान नहीं करके, मिल पर ही खर्च कर देती हैं. इससे किसानों की समस्या जस की तस बनी रहती है और सरकार की तरफ से भी पैसा चला जाता है.

स्वामीनाथन आयोग
सरकार ने 2004 में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक आयोग बनाया था. जिसकी कमान हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन को बनाया था. इस कमेटी को स्वामीनाथन कमेटी कहा जाता है. स्वामीनाथन कमेटी ने 2006 में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, जिसमें किसानों को फसल की लागत निकालने का फार्मूला तय किया था. आयोग ने फसल पर आने वाली लागत को तीन हिस्सों- ए2, ए2+एफएल और सी2 में बांटा था.

RECOMMENDED

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6