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$100 अरब लेकर आ रहा है ब्लैकस्टोन. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
दुनिया के सबसे बड़े अल्टरनेटिव एसेट मैनेजर 'ब्लैकस्टोन' (Blackstone) ने अपने तीसरे एशियाई प्राइवेट इक्विटी फंड के लिए $13.1 बिलियन (करीब ₹1.10 लाख करोड़) जुटाए हैं. यह उनके $10 बिलियन के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फंड का एक बड़ा हिस्सा भारत में आने वाला है.
खास बात ये है कि ब्लैकस्टोन पहले ही भारत में 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है और कंपनी को देश अपने सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक नजर आता है. यही वजह है कि जब ब्लैकस्टोन की भविष्य की योजनाओं की बात होती है तो भारत का जिक्र सबसे आगे दिखाई देता है. कंपनी के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वह निकट भविष्य में भारत में 100 बिलियन डॉलर के एसेट्स के लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है.
ब्लैकस्टोन ने मंगलवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में बताया कि उसने निवेशकों से 13.1 बिलियन डॉलर जुटाए हैं. यह कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा एशिया प्राइवेट इक्विटी फंड है. फंड का आकार यह बताने के लिए काफी है कि वैश्विक निवेशकों के बीच ब्लैकस्टोन और उसकी रणनीति को लेकर कितना भरोसा है.
किसी भी प्राइवेट इक्विटी फंड के लिए निवेशकों से पूंजी जुटाना सबसे अहम चरणों में से एक माना जाता है. जब कोई फंड अपने लक्ष्य से कहीं ज्यादा राशि जुटा लेता है तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि निवेशक उस फंड और उसके निवेश अवसरों को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं.
ब्लैकस्टोन का यह नया फंड एशिया में निवेश के लिए तैयार किया गया है. ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों में चुनौतियां दिखाई देती हैं, एशिया को लेकर निवेशकों का उत्साह बरकरार रहना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.
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ब्लैकस्टोन कैपिटल पार्टनर्स एशिया III यानी BCP Asia III को 10 बिलियन डॉलर के लक्ष्य के साथ बाजार में लाया गया था. हालांकि फंड ने इस लक्ष्य को सिर्फ पूरा ही नहीं किया, बल्कि काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया.
कंपनी के अनुसार इस फंड ने 13.1 बिलियन डॉलर जुटाए हैं. इसका मतलब है कि लक्ष्य से कई बिलियन डॉलर ज्यादा राशि निवेशकों की ओर से आई. यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह ब्लैकस्टोन का अब तक का सबसे बड़ा एशिया फंड बन गया है.
कंपनी ने यह भी बताया कि यह फंड उसके पिछले एशिया फंड की तुलना में दोगुने से भी अधिक आकार का है. इससे यह साफ दिखाई देता है कि निवेशकों की रुचि समय के साथ कम होने के बजाय और मजबूत हुई है. जब कोई नया फंड अपने पिछले फंड से कई गुना बड़ा बनता है तो उसे निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जाता है. BCP Asia III के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है.
ब्लैकस्टोन प्राइवेट इक्विटी स्ट्रेटेजीज के ग्लोबल हेड जो बराटा ने कहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है. उनके मुताबिक इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश के कई आकर्षक अवसर मौजूद हैं.
कंपनी का मानना है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विकास की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि ब्लैकस्टोन इस क्षेत्र में अपने निवेश को बढ़ाने और नए अवसरों की तलाश पर लगातार जोर दे रहा है.
जो बराटा के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि कंपनी एशिया को केवल एक क्षेत्रीय अवसर के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर अपनी भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है.
13.1 बिलियन डॉलर का फंड जुटाना भी इसी सोच को दर्शाता है. यदि कंपनी को एशिया की संभावनाओं पर भरोसा नहीं होता तो वह इस क्षेत्र के लिए अपने इतिहास का सबसे बड़ा फंड नहीं जुटाती.
ब्लैकस्टोन ने कहा है कि पिछले 24 महीनों के दौरान वह एशिया में सबसे सक्रिय वैश्विक निवेशकों में से एक रही है. कंपनी का यह दावा बताता है कि उसने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत की है.
पिछले दो वर्षों में ब्लैकस्टोन ने एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया है. यही वजह है कि अब कंपनी का नाम क्षेत्र के प्रमुख निवेशकों में लिया जा रहा है.
कंपनी का यह भी कहना है कि उसने भारत और जापान जैसे अहम बाजारों में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत किया है. इससे यह संकेत मिलता है कि ब्लैकस्टोन केवल निवेश करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक उपस्थिति भी मजबूत करना चाहती है.
ब्लैकस्टोन ने अपने बयान में भारत और जापान का विशेष तौर पर जिक्र किया है. कंपनी का कहना है कि उसने इन दोनों बाजारों में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है.
यह तथ्य अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि एशिया के इतने बड़े क्षेत्र में से भारत और जापान को अलग से उल्लेखित किया गया है. इससे पता चलता है कि कंपनी इन दोनों देशों को अपनी रणनीति के केंद्र में रखती है.
ब्लैकस्टोन की नजर में भारत और जापान ऐसे बाजार हैं जहां वह लंबे समय तक अवसर देखती है. यही कारण है कि कंपनी के बयान में इन देशों को विशेष महत्व दिया गया.
एशिया में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की बात करते हुए कंपनी का भारत और जापान पर जोर देना यह दिखाता है कि भविष्य की उसकी योजनाओं में इन दोनों देशों की भूमिका अहम रहने वाली है.
भारत को लेकर ब्लैकस्टोन का भरोसा उसके निवेश आंकड़ों में भी दिखाई देता है. कंपनी के अनुसार उसने भारत में 50 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है.
यह एक बड़ा आंकड़ा है और यह दिखाता है कि कंपनी लंबे समय से भारत में अवसरों को पहचानती रही है. किसी भी वैश्विक निवेश कंपनी के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा निवेश करना उस देश की संभावनाओं पर मजबूत विश्वास का संकेत माना जाता है.
भारत में 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश का मतलब यह भी है कि ब्लैकस्टोन देश को अपनी वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है. कंपनी लगातार यहां अपनी मौजूदगी बनाए हुए है और आगे भी अवसरों की तलाश करती दिखाई दे रही है.
ब्लैकस्टोन का यह निवेश स्तर इस बात को भी दर्शाता है कि भारत उसके लिए सिर्फ एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि एक ऐसा बाजार है जहां कंपनी लंबे समय तक विकास की संभावनाएं देखती है.
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ब्लैकस्टोन के ग्लोबल मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन श्वार्जमैन पहले भारत को कंपनी का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला बाजार बता चुके हैं.
किसी वैश्विक निवेश कंपनी के शीर्ष अधिकारी का ऐसा बयान अपने आप में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह बताता है कि कंपनी को भारत में अपने निवेशों से सकारात्मक अनुभव मिले हैं.
जब किसी बाजार को कंपनी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला बाजार कहा जाता है तो यह उस बाजार के प्रति कंपनी के भरोसे को दर्शाता है. भारत के मामले में भी यही तस्वीर दिखाई देती है.
भारत को लेकर ब्लैकस्टोन का उत्साह केवल शब्दों तक सीमित नहीं है. कंपनी के निवेश आंकड़े और उसकी भविष्य की योजनाएं भी इसी दिशा की ओर इशारा करती हैं.
ब्लैकस्टोन के बारे में कहा गया है कि वह निकट भविष्य में भारत में 100 बिलियन डॉलर के एसेट्स के लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है. यह लक्ष्य बताता है कि कंपनी भारत में अपनी मौजूदगी को और बड़ा बनाने की सोच रखती है.
हालांकि कंपनी की ओर से इस लक्ष्य को हासिल करने की कोई समयसीमा साझा नहीं की गई है, लेकिन इतना जरूर है कि यह चर्चा भारत के प्रति उसके बढ़ते विश्वास को दिखाती है.
एक तरफ जहां कंपनी पहले ही 50 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ 100 बिलियन डॉलर एसेट्स के लक्ष्य की संभावना उसके लॉन्ग टर्म नजरिए को दिखाती है. भारत में बढ़ते एसेट्स का लक्ष्य इस बात का संकेत भी माना जा सकता है कि कंपनी आने वाले समय में भी देश को अपनी रणनीति के केंद्र में रखेगी.
ब्लैकस्टोन दुनिया की सबसे बड़ी कमर्शियल रियल एस्टेट निवेश कंपनियों में शामिल है. कंपनी इस सेक्टर में करीब 319 बिलियन डॉलर की संपत्तियों को मैनेज करती है. इसके पोर्टफोलियो में वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस और रेंटल हाउसिंग समेत लगभग 13,000 प्रॉपर्टीज शामिल हैं, जो वैश्विक स्तर पर उसकी मजबूत मौजूदगी को दिखाती हैं.
वहीं, भारत में ब्लैकस्टोन की सबसे मजबूत मौजूदगी ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर में मानी जाती है. कंपनी पहले से ही देश में बड़े ऑफिस एसेट्स का एक महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो रखती है और इसी वजह से रियल एस्टेट बाजार में उसका नाम प्रमुख निवेशकों में लिया जाता है. 13.1 बिलियन डॉलर का नया एशिया फंड जुटाने के बाद बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी भविष्य में किन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस करती है.
कंपनी देश के 7 बड़े शहरों में 48 ऑफिस प्रॉपर्टीज की मालिक है और करीब 135 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस के साथ भारत की सबसे बड़ी ऑफिस प्रॉपर्टी ओनर मानी जाती है. इसके अलावा कंपनी कंपनियों को प्राइवेट लोन देने का काम भी करती है और बीमा कंपनियों के लिए निवेश से जुड़े समाधान उपलब्ध कराती है. हेज फंड कारोबार में ब्लैकस्टोन बड़े संस्थागत निवेशकों का पैसा अलग-अलग फंड्स में निवेश कर उनके पोर्टफोलियो को मैनेज करती है. भारत कंपनी के लिए बेहद अहम बाजार है और यहां वह करीब 50 बिलियन डॉलर का पोर्टफोलियो संभाल रही है.
नेक्सस मॉल्स, वेयरहाउसिंग, इंडस्ट्रियल पार्क्स, हेल्थकेयर, आईटी सर्विसेज और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में भी उसकी मजबूत मौजूदगी है. हाल के वर्षों में कंपनी ने भारत में अपने कारोबार का लगातार विस्तार किया है और अब बेंगलुरु में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है. इसके आलावा, 100 बिलियन डॉलर एसेट्स के संभावित लक्ष्य की चर्चा यह संकेत देती है कि कंपनी देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है.
ब्लैकस्टोन के ग्लोबल CEO स्टीफन श्वार्जमैन पहले भारत को कंपनी का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला बाजार बता चुके हैं. यह बयान इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि ब्लैकस्टोन दुनिया की सबसे बड़ी अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है. भारत में कंपनी पहले ही 50 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी है और उसकी मौजूदगी लगातार मजबूत हुई है.
वहीं, कंपनी ने पिछले 24 महीनों में भारत और जापान में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति मजबूत करने की भी बात कही है. भारत को लेकर ब्लैकस्टोन का बढ़ता भरोसा उसके निवेश और भविष्य की योजनाओं में साफ दिखाई देता है.
वहीं, चीन की तुलना में भारत को लेकर वैश्विक निवेशकों का रुझान बढ़ने के पीछे कई वजहें मानी जाती हैं. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, वहीं इसकी बड़ी आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग और मजबूत घरेलू खपत निवेशकों को आकर्षित करती है. पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक कंपनियों ने "चीन+1" रणनीति अपनाई है, जिसके तहत वे चीन के अलावा भारत जैसे बाजारों में भी निवेश बढ़ा रही हैं.
आईपीएल की डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) को 16,000 करोड़ रुपए में खरीदने वाले आदित्य बिड़ला समूह के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम में ब्लैकस्टोन भी शामिल है. इससे एक बार फिर ब्लैकस्टोन का नाम सुर्खियों में आ गया है. दुनिया की सबसे बड़ी निवेश फर्मों में गिनी जाने वाली यह अमेरिकी कंपनी 1.3 ट्रिलियन डॉलर के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ वैश्विक निवेश जगत की बड़ी खिलाड़ी है.
वहीं, प्राइवेट इक्विटी कारोबार में ब्लैकस्टोन के 250 से ज्यादा वैश्विक पोर्टफोलियो हैं और कंपनी रियल एस्टेट, प्राइवेट इक्विटी, क्रेडिट, इंश्योरेंस और हेज फंड सॉल्यूशंस जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है. भारत भी कंपनी के प्रमुख बाजारों में शामिल है, जहां वह करीब 50 बिलियन डॉलर का पोर्टफोलियो मैनेज करती है.
जब ब्लैकस्टोन जैसी बड़ी वैश्विक निवेश कंपनी एशिया में 13.1 बिलियन डॉलर का फंड जुटाती है, तो इसे निवेशकों के बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जाता है. ऐसे बड़े फंड बाजार में पूंजी उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और जिन क्षेत्रों में निवेश किया जाता है, वहां कारोबारी गतिविधियां तेज हो सकती हैं.
भारत में पहले से 50 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश कर चुकी ब्लैकस्टोन का बढ़ता फोकस यह भी दिखाता है कि कंपनी देश में लंबे समय के अवसर देख रही है. हालांकि यह फंड पूरे एशिया के लिए है, इसलिए इसका वास्तविक असर भविष्य के निवेश फैसलों पर निर्भर करेगा.