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भारत में मशरूम की लोकप्रियता दिन-ब-दिन अब तेजी से बढ़ती जा रही है. यह ना केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर कई बीमारियों से बचाने तक में मददगार होते हैं.यही कारण है कि इसका उत्पादन भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. देश के विभिन्न राज्यों के किसान मशरूम की खेती से लाभ कमा कर रहे हैं.
भारत में मशरूम की कई किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य टॉप पर हैं, जहां से पूरे देश में इसकी आपूर्ति होती है. जी हां मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बिहार ने देश के अन्य सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है. तो जानेंगे मशरूम उगाने में कौन से 6 राज्य टॉप पर हैं.
असल में बिहार की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु इसे मशरूम की खेती के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है. नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में होने वाले कुल मशरूम उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत है, जो इसे इस क्षेत्र में नंबर वन बनाती है. बिहार के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर मशरूम उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ना केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि यह एक नया रोजगार का जरिया भी बन चुका है.
मशरूम उत्पादन में बिहार के बाद ओडिशा का नंबर आता है, जहां कुल करीब 10 प्रतिशत मशरूम का उत्पादन होता है.असल में ओडिशा के किसान बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हो रहा है.वहीं, तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र आता है, जहां लगभग 9 प्रतिशत मशरूम उत्पादन किसान कर रहे हैं. महाराष्ट्र में भी मशरूम की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे खेती का दायरा बढ़ा है. इसके अलावा, चौथे स्थान पर उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जहां भी अब किसान पारंपरिक खेती छोड़कर मशरूम की खेती को अपना रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश मशरूम उत्पादन में चौथे स्थान पर है, जहां इसकी हिस्सेदारी करीब 7 फीसदी है. इसके बाद पांचवें नंबर पर उत्तराखंड आता है, जहां लगभग 7 फीसदी के ही आसपसा मशरूम का उत्पादन होता है. छठे स्थान पर छत्तीसगढ़ है, जिसकी हिस्सेदारी 6.70 फीसदी के आसपास है. यानी बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ – ये छह राज्य मिलकर देश के कुल मशरूम उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले तैयार करते हैं.बदलते वक्त में इन राज्यों के किसान पारंपरिक खेती की बजाय मशरूम की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे अच्छी आमदनी हो रही है.
1-बिहार
2-ओडिशा
3-महाराष्ट्र
4-उत्तर प्रदेश
5-उत्तराखंड
6-छत्तीसगढ़
मशरूम की खासियत ये है कि ये ना सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि यह एक सुपरफूड की तरह काम करता है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन D, B-कॉम्प्लेक्स, पोटैशियम, सेलेनियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं. खास बात यह है कि मशरूम फैट फ्री, कोलेस्ट्रॉल फ्री और लो-कैलोरी फूड है, जो वजन कम करने वालों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है.
खेती के लिए सबसे पहले यह तय करें कि आप कौन-सी किस्म की मशरूम उगाना चाहते हैं – बटन, ऑयस्टर या मिल्की मशरूम। मौसम और बाजार मांग के अनुसार वैरायटी का चयन करना चाहिए.
मशरूम को उगाने के लिए एक साफ-सुथरी, छायादार और नियंत्रित तापमान वाली जगह जरूरी होती है. शेड या कमरे का चुनाव ध्यान से करें.
मशरूम की खेती के लिए ह्यूमिडिटी, तापमान और वेंटिलेशन को नियंत्रित करने वाले संसाधनों की आवश्यकता होती है, जैसे – स्प्रे, थर्मामीटर, ह्यूमिडिफायर आदि.
मशरूम उगाने के लिए अच्छी क्वालिटी वाला कंपोस्ट तैयार करना होता है, इसमें गेहूं का भूसा, यूरिया, जिप्सम, और फॉर्मलिन का इस्तेमाल करना होता है.
जब स्पॉन (बीज) उगने लगे, तब एक पतली मिट्टी की परत (केसिंग) डाली जाती है, जो मशरूम के बेहतर विकास में मदद करती है.
मशरूम के बैग या बेड को सही तरीके से सजाएं और समय-समय पर नमी, तापमान और साफ-सफाई का ध्यान रखें। इससे उत्पादन अच्छा होगा और रोग नहीं लगेंगे.