टमाटर ने रुलाया! ₹100 भी नहीं निकल रही लागत, खेतों में फसल सड़ने को मजबूर; तमिलनाडु के किसानों ने रोकी कटाई

Tomato Price: बाजार में टमाटर की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है. हालत यह है कि फसल को खेत से मंडी तक ले जाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है. किसानों ने पूरी तरह से कटाई बंद कर दी है.
टमाटर ने रुलाया! ₹100 भी नहीं निकल रही लागत, खेतों में फसल सड़ने को मजबूर; तमिलनाडु के किसानों ने रोकी कटाई

(Image source- AI)

Tomato Price: देश में जहां महंगाई ने धीरे-धीरे पैर पसाने शुरू किए हैं, वहीं तमिलनाडु के टमाटर उत्पादक किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. बाजार में टमाटर की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है. हालत यह है कि फसल को खेत से मंडी तक ले जाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है. कई इलाकों में किसानों ने पूरी तरह से कटाई बंद कर दी है और कम दाम मिलने के कारण पूरी तरह तैयार फसल को खेतों में ही छोड़ना पड़ रहा है.

क्या है मामला?

कीमतों में इस अचानक गिरावट का कारण विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों से भारी मात्रा में आपूर्ति आना बताया जा रहा है, जिससे थोक बाजारों में ओवरसप्लाई हो गई है. इसके चलते कम समय में ही कीमतों में तेज गिरावट आई, जिससे किसान हैरान रह गए और फसल के चरम सीजन में उनकी अपेक्षित आय प्रभावित हुई.

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  • इस समय बाजार में टमाटर की ओवरसप्लाई हो गई
  • ज्यादा सप्लाई होने से कीमतें तेजी से गिर गईं
  • इससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा

बढ़ती मजदूरी लागत ने इस संकट को और बढ़ाया

डिंडीगुल जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में टमाटर की कीमतें प्रति किलोग्राम एक अंक तक गिर गई हैं और व्यापारियों द्वारा पिछले हफ्तों की तुलना में काफी कम दाम दिए जा रहे हैं. जिन किसानों ने खेती में भारी निवेश किया था, वे अब संचालन लागत संभालने में संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि बाजार अतिरिक्त आपूर्ति को समाहित नहीं कर पा रहा है. बढ़ती मजदूरी लागत ने इस संकट को और बढ़ा दिया है.

किसानों का कहना है कि कटाई और परिवहन की लागत अधिक होने के कारण मौजूदा कीमतें खर्च को भी पूरा नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से नुकसान कम करने के लिए कटाई रोकने का चलन बढ़ रहा है.

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कितना गिरा भाव?

  • पहले 14 किलोग्राम के टमाटर बॉक्स की कीमत घटकर 100 से 150 रुपये रह गई है.
  • जबकि कुछ हफ्ते पहले यह 400 से 600 रुपये थी.
  • वहीं, मजदूरी लागत लगभग 400 रुपये प्रतिदिन बनी हुई है.

गिरती कीमतों और बढ़ती लागत के संयुक्त प्रभाव से कई किसानों ने नुकसान से बचने के लिए तोड़ाई पूरी तरह बंद कर दी है.

किसानों की परेशानी क्यों बढ़ी?

कई किसानों ने स्थिर बाजार की उम्मीद में खेती का विस्तार किया था लेकिन अब वे बढ़ते आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं. कटाई की लागत लगभग 80 रुपये प्रति बॉक्स आंकी जा रही है लेकिन मौजूदा बाजार मूल्य बुनियादी खर्च भी नहीं निकाल पा रहा, जिससे किसानों का नुकसान और बढ़ रहा है.

थोड़ी राहत कहां?

धर्मपुरी जिले में कीमतों में हल्की सुधार के संकेत मिले हैं.
हाल की बारिश के बाद आपूर्ति कम होने से कीमतें 13 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची हैं.
हालांकि, किसानों का कहना है कि बाजार अभी भी अस्थिर और अनिश्चित बना हुआ है.

किसानों ने क्या कदम उठाया?

तिरुचिरापल्ली जिले के मरुंगापुरी क्षेत्र में भी स्थिति ऐसी ही है, जहां किसानों ने कटाई रोक दी है. तोड़ाई और परिवहन की लागत लगभग 3,000 रुपये प्रति एकड़ होने के कारण मौजूदा कीमतों पर काम जारी रखना संभव नहीं है.

आगे क्या समाधान?

विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान की जरूरत पर जोर देते हुए-

  • बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट
  • कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं
  • न्यूनतम समर्थन इकोसिस्टम जैसे उपायों की जरूरत बताई

जब बाजार में माल ज्यादा और खरीदार कम होते हैं, तो कीमतें गिरती हैं। इस बार टमाटर के साथ यही हुआ, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: टमाटर की कीमतें क्यों गिर गईं?
जवाब: बाजार में टमाटर की ओवरसप्लाई आने से कीमतों में तेज गिरावट आई है.

सवाल: किसान टमाटर की कटाई क्यों रोक रहे हैं?
जवाब: मौजूदा कीमत इतनी कम है कि कटाई और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल रहा.

सवाल: अभी टमाटर का भाव कितना चल रहा है?
जवाब: किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.

सवाल: इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
जवाब: बेहतर कोल्ड स्टोरेज और मजबूत सप्लाई चेन.

सवाल: किसानों को आगे क्या करना चाहिए?
जवाब: बाजार की स्थिति देखकर क्रॉप मैनेजमेंट करें और सरकारी योजनाओं व स्टोरेज विकल्पों का फायदा उठाएं.

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(IANS इनपुट के साथ)

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