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Til ki Kheti: इस समय खरीफ सीजन चल रहा है. खरीफ सीजन में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल, अरहर, गन्ना आदि की खेती प्रमुखता से की जाती है. तिल की खेती एक ऐसी खेती है जो किसान की बंपर कमाई करा सकती है. आमतौर पर तिल का तेल अन्य खाने के तेलों के मुकाबले दोगुनी कीमत पर बिकता है. वहीं, किसानों के लिए नेशनल मिशन ऑफ एडिबल ऑयल योजना चलाई जा रही है. राजकीय बीज भंडारों पर पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर फ्री तिल का बीज मिल रहा है.
सरकार ने तिलहनों के एमएसपी में भी बड़ी बढ़ोतरी की है. तिल की MSP 9,267 से बढ़ाकर 9,846 रुपए कर दी गई है. इसमें 579 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. वहीं रामतिल की MSP 8,717 से बढ़ाकर 9,537 रुपए कर दी गई है. इसमें 820 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई.
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खरीफ सीजन में तिल की बुवाई का का उचित समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई का दूसरा पखवारा है. इससे पहले बुआई करने से फाइलोडी रोग लगने का भय रहता है. बुआई हल के पीछे लाइनों में 30 से 45 से.मी. की दूरी पर करें. बीज को कम गहराई पर बोयें. बीज का आकार छोटा होने के कारण बीज को रेत, राख या सूखी हल्की बलुई मिट्टी में मिलाकर बोयें. बीज जनित रोगों से बचाव हेतु 2 ग्राम धीरम एवं 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किग्रा. बीज की दर से शोधन के लिए इस्तेमाल करें.
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अच्छी पैदावार के लिए उत्तम जल निकास वाली भुमि की जरूरत होती है. एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से व 2-3 जुताईयां कल्टीवेटर अथवा देशी हल से करना चाहिए. जुताई के समय 5 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर खेत में मिलाना चाहिए. एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिये 3-4 किग्रा. स्वच्छ और स्वस्थ बीज का प्रयोग करें.
अगर आप तिल की खेती करना चाहते हैं तो इसकी उन्नत किस्में आपको बेहतर उपज के साथ ज्यादा मुनाफा करा सकता है. तिल की उन्नत किस्में- आर.टी. 46, आर.टी. 125, आर.टी. 127, आर.टी. 346, आर.टी. 351 हैं. ये किस्में 78 से 85 दिनों में पक जाती हैं. इससे 700 से 800 किलो प्रति हेक्टेयर बीज मिल सकता है. इसमें ऑयल की मात्रा 43 से 52 फीसदी है.
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जो किसान तिल की खेती के लिए बीज लेना चाहते हैं तो पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को सरकारी गोदामों से बीज दिया जा रहा है. किसानों को पहले कृषि विभाग आकर आवेदन करना होगा उसके बाद उनको बीज उपलब्ध कराया जाएगा.