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शहरों में छत पर खेती के लिए कई राज्यों की सरकारें सब्सिडी प्रदान करती हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
Terrace Farming: आज के दौर में शुद्ध और कीटनाशक-मुक्त सब्जियां मिलना किसी चुनौती से कम नहीं है. शहरों की कंक्रीट की दुनिया में अक्सर हम यह सोचकर रह जाते हैं कि काश! हमारे पास भी थोड़ी जमीन होती तो अपनी सब्जियां खुद उगाते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी घर की छत ही अब आपका छोटा सा खेत बन सकती है?
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शहरों में तेजी से बढ़ते प्रदूषण, महंगी सब्जियां और केमिकल वाले खाने की चिंता अब सरकारों के लिए भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है. यही वजह है कि कई राज्य सरकारें लोगों को अपनी छत पर जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.
रूफटॉप गार्डनिंग सिर्फ शौक नहीं, बल्कि अब अर्बन फूड सिक्योरिटी का हिस्सा बनती जा रही है. इससे परिवारों को ताजी सब्जियां मिलती हैं, बिजली की खपत कम होती है और घर का तापमान भी नियंत्रित रहता है.
रूफटॉप गार्डनिंग का सीधा मतलब है अपनी छत के खाली स्पेस का उपयोग करके जैविक तरीके से फल, सब्जियां और औषधीय पौधे उगाना. सरकार के निवेश के पीछे 3 बड़े कारण हैं-
बिहार सरकार की रूफटॉप गार्डनिंग योजना के तहत शहरी लोगों को छत पर खेती करने के लिए मदद दी जा रही है.
कितना खर्च और कितनी सहायता?
यूनिट में क्या मिलेगा?
फार्मिंग बेड
मिट्टी
जैविक खाद
बीज
जरूरी स्ट्रक्चर
इसका फायदा क्या?
छत पर सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से खेती की जा सकेगी.
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जयपुर के निवासियों के लिए आईएसआईटीसी (ISITC) दुर्गापुरा ने एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया है.
कौन आवेदन कर सकता है?
केवल निजी आवासीय भवनों के मालिक
कमर्शियल बिल्डिंग पात्र नहीं
झारखंड सरकार ने 'प्रोमोशन ऑफ अर्बन फार्मिंग' योजना के तहत शहरी परिवारों को छत पर खेती के लिए प्रोत्साहित किया है. झारखंड सरकार (विशेषकर बोकारो जिला) शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है.
योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कितनी सब्सिडी मिलेगी?
आपको क्या फायदा होगा?
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फ्लैट और मकान मालिक
रिटायर्ड लोग
गृहिणियां
हेल्थ कॉन्शियस परिवार
छोटे स्तर पर कमाई शुरू करने वाले लोग

हां, अगर सही प्लानिंग हो तो 100-200 स्क्वायर फीट की छत पर भी अच्छी खेती की जा सकती है.
शुरुआत में क्या-क्या चाहिए?
कम जगह में ज्यादा उत्पादन देने वाली फसलें-
छोटे स्तर पर शुरुआत करने वाले लोग धीरे-धीरे इसे माइक्रो बिजनेस में भी बदल सकते हैं.
कैसे?
आज कई शहरों में लोग घर की छत से हर महीने हजारों रुपये तक कमा रहे हैं.
यह एक बड़ा डर है, लेकिन आधुनिक 'रूफटॉप फार्मिंग' इसी का समाधान है. मिट्टी सीधे छत पर नहीं डाली जाती, बल्कि विशेष स्टैंड और ड्रेनेज सेल वाले बेड का उपयोग होता है. यूनिट लगाने से पहले छत की वाटरप्रूफिंग की सलाह दी जाती है, जिससे सीलन का खतरा नहीं रहता.
अगर आप शहर में रहते हैं और बढ़ती महंगाई व केमिकल वाली सब्जियों से परेशान हैं, तो यह आपके लिए 'हेल्थ और वेल्थ' दोनों का सौदा है. कम निवेश में आप सालों-साल ताजा सब्जियां पा सकते हैं. इससे न केवल आपके किचन का खर्च कम होगा, बल्कि गर्मी के दिनों में आपकी छत का तापमान भी कम रहेगा, जिससे घर ठंडा रहेगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या फ्लैट की छत पर भी खेती हो सकती है?
हां, अगर सोसायटी अनुमति दे और छत मजबूत हो तो कंटेनर गार्डनिंग आसानी से की जा सकती है.
Q2 क्या इसमें बहुत ज्यादा पानी लगता है?
नहीं, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से पानी की बचत होती है
Q3 क्या सरकार हर राज्य में सब्सिडी दे रही है?
अभी कुछ राज्यों में योजना लागू है
Q4 क्या जैविक खेती के लिए केमिकल खाद जरूरी है?
नहीं, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद से बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.
Q5 क्या इससे घर का तापमान भी कम होता है?
हां, छत पर हरियाली होने से गर्मी का असर कम होता है.