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Success Story: ग्रामीण इलाकों में रहने वालों के लिए मछली पालन (Fish Farming) कमाई का जरिया बना है. इसमें वो सफलता की नई कहानी भी लिख रहे हैं. वाराणसी के विक्रांत पाठक और जौनपुर की मीरा सिंह की सफलता की कहानियां इसकी मिसाल हैं. इन्होंने मछली पालन के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है.
डबल इंजन सरकार और मत्स्य विभाग (Fisheries Department) के एक्सपर्ट गाइडेंस से उत्तर प्रदेश में मछली पालन (Fish Farming) युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभर रहा है. उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका को एक नई दिशा दे रहा है.
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वाराणसी के विक्रांत पाठक ने 2 हेक्टेयर से मछली पालन की शुरुआत की और आज उन्होंने अपने बिजनेस को 42 हेक्टेयर तक बढ़ाया है. मछली पालन उन्होंने सालाना 1.5 करोड़ रुपये तक की कमाई की है. वैज्ञानिक तकनीकों, किसान उत्पादक संगठन (FPO) के सहयोग और विभागीय योजनाओं की मदद से यह क्षेत्र तेजी से विकास और रोजगार का स्रोत बन रहा है. विक्रांत अब 150 किसानों का नेतृत्व कर रहे हैं और लक्ष्य है कि यह संख्या 500 तक पहुंचे.
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उत्तर प्रदेश के जौनपुर की मीरा सिंह ने 1 एकड़ से शुरुआत कर 25 एकड़ का मॉडल फॉर्म बना दिया. उनकी हैचरी, जिसे ₹15 लाख की सरकारी सहायता मिली, हर साल 1,400 क्विंटल मछलियों का उत्पादन करती है. दोनों मिलकर 60 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं. विक्रांत के फार्म पर वर्ल्ड बैंक का दौरा भी इस प्रगति की पुष्टि करता है.
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