Success Story: पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद खेती को बनाया आय का जरिया, अब कमा रहा लाखों रुपये का मुनाफा

Success Story: राज बहादुर वर्मा ने पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद खेती को आय का मुख्य जरिया बनाया. इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग के जरिए वो लाखों में मुनाफा कमा रहे हैं.
Success Story: पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद खेती को बनाया आय का जरिया, अब कमा रहा लाखों रुपये का मुनाफा

Success Story: आजकल पढ़ाई-लिखाई करने के बाद भी लोग खेती-बाड़ी करना पसंद कर रहे हैं. ऐसी ही कहानी है उत्तर प्रदेश के राज बहादुर वर्मा की, जो पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग (Intercropping Farming) कर रहे हैं. सहफसली खेती में एक ही खेत में दो फसलें उगाने की तकनीक है. सहफसलों को लेने से किसानों को उनकी जमीन में न केवल कुल उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में नुकसान कम होने की भी संभावना बढ़ जाती है. इससे अलग-अलग खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है.

पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद खेती को बनाया आय का जरिया

यूपी कृषि विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के करनाईपुर के किसान राज बहादुर वर्मा ने खेती को मुख्य व्यवसाय का जरिया बनाकर एक मिसाल पेश की है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिलॉसफी और प्राचीन इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन करके उन्होंने सहफसली खेती (Intercropping Farming) शुरू की है. लाखों रुपये का मुनाफा कमाकर वह दूसरे किसानों के प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं.

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राज बहादुर ने लगभग 22 बीघे खेत में एक दर्ज से ज्यादा प्रकार की सब्जी, गन्ना, मक्का, केला, आम की खेती की है. रासायनिक खादों का इस्तेमाल न करके प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. एक बीघे में लौकी की फसल लगाकर प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल बेच रहे हैं. लौकी खाने में स्वादा से भरपूर और पकाने में आसानी होती है. मंडी में इसकी बहुत मांग है.

इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग (Intercropping Farming) में प्रमुख रूप से बंसतकालीन गन्ना के साथ टमाटर, खरबूजा और उड़द और शरदकालीन में गन्ने के साथ चना, मटर व मक्का की फसल लगाते हैं. केला के साथ खीरा व बैगन, खीरे के साथ उसी के शेड पर करेले की खेती करते डबल मुनाफा कमा रहे हैं. मक्का साल में चार बार काटते हैं. केले के साथ लगभग 6 बीघे मक्का की खेती की है. प्रति बीघे 20 हजार रुपये के हिसाब से मुनाफा होता है.

दे रहे रोजगार

राज बहादुर खेती के साथ अन्य को रोजगार भी दे रहे हैं. वो 6 मजदूरों को वे रोजगार मुहैया करा रहे हैं. एक बीघा में एक दर्जन प्रजाति के आम के पौधे लगे हैं, जो फल भी दे रहे हैं. इसमें मियांजाकी, अरूणिका, अरुणिमा, सेंसेश, मल्लिका, नूरजहां, आम्रपाली, मालदा के साथ सहफसली सूरन की खेती की है.

Intercropping

इंटक्रॉपिंग के फायदे

  • एक ही खेत में दो या दो से ज्यादा फसलें साथ उगाएं.
  • इससे किसानों को खाद्य सुरक्षा मिलती है.
  • खेत का पूरा उपयोग हो, जिससे उत्पादन में सुधार हो.
  • विभिन्न फसलों के संयोजन से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है.
  • फसलें एक साथ उगाकर आय बढ़ाएं और लागत घटाएं.
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