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किसान नेड्रिप सिंचाई अपनाकर न केवल पैदावार बढ़ाई बल्कि श्रम लागत भी कम की. (फोटो सोर्स: Chhattisgarh Govt)
Success Story: जहां पारंपरिक खेती में लागत बढ़ने और मुनाफा घटने से किसान परेशान हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के एक किसान ने फसल बदलकर अपनी तकदीर बदल दी. धान की जगह धनिया की खेती (Coriander Farming) अपनाकर इस किसान ने न सिर्फ बेहतर उत्पादन हासिल किया, बल्कि एक एकड़ में करीब ₹50,000 तक की कमाई कर दूसरों के लिए भी नई राह खोल दी है.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसान निरंजन पटेल लीक से हटकर 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' को अपनाया और अपनी मेहनत व आधुनिक तकनीक के संगम से धनिया की खेती को फायदा का सौदा बना दिया.
कम लागत, बेहतर बाजार कीमत और आधुनिक तकनीक (ड्रिप सिंचाई) ने धनिया की खेती को ज्यादा मुनाफेदार बना दिया.
छत्तीसगढ़ सरकार की उद्यानिकी योजनाओं का फायदा उठाकर किसान अब नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत धनिया की खेती ने किसानों की आय में डेढ़ गुना तक की बढ़ोतरी की है.
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राज्य सरकार के किसान हितैषी नीतियों एवं किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार उद्यानिकी फसलों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए सब्सिडी के साथ-साथ प्रशिक्षण एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है.
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छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के मुताबिक, किसान निरंजन पटेल पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें उन्हें ज्यादा लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था.
वर्ष 2025-26 में किसान ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHB) के तहत 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' के तहत धनिया की खेती अपनाई. उन्होंने अपनी 0.40 हेक्टेयर पूरी सिंचित भूमि में उन्नत किस्मों कस्तूरी धनिया और अंकुर धनिया का उत्पादन शुरू किया.
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आधुनिक तकनीक के रूप में उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation System) का उपयोग किया, जिससे जल की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई.

पटेल अपनी उपज का विक्रय पिथौरा एवं बागबाहरा मंडियों में करते है. वर्तमान में वे अपने काम से संतुष्ट हैं. उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और धनिया जैसी नगदी फसलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.
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| विवरण | पारंपरिक धान की खेती | धनिया की खेती |
| खेती का क्षेत्र | 1 एकड़ | 0.40 हेक्टेयर |
| तकनीक | पारंपरिक सिंचाई | ड्रिप सिंचाई प्रणाली |
| बीज की किस्म | सामान्य धान | कस्तूरी औरअंकुर धनिया |
| सरकारी सहायता | - | ₹8,000 अनुदान |
| उत्पादन (प्रति एकड़) | 21 क्विंटल | 35 क्विंटल |
| कुल आय (प्रति एकड़) | ₹30,000 | ₹50,000 |
| मुख्य लाभ | सीमित आय, अधिक श्रम | 1.5 गुना अधिक कमाई |
अगर आप भी धनिया से मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इन तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दें-
अगर आप धान जैसी पारंपरिक फसलों में फंसे हैं, तो 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' आपके लिए गेम-चेंजर हो सकती है. उद्यानिकी फसलों में जोखिम कम और बाजार की मांग हमेशा बनी रहती है. सरकार द्वारा मिलने वाला DBT अनुदान आपकी शुरुआती लागत को कम करता है, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं.
Q1. क्या धनिया की खेती हर जगह लाभदायक है?
सही मौसम और बाजार मिलने पर हां.
Q2. क्या इसमें लागत ज्यादा होती है?
धान के मुकाबले कम या बराबर, लेकिन मुनाफा ज्यादा.
Q3. क्या सरकारी मदद मिलती है?
हां, राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं से.
Q4. सबसे बड़ा फायदा क्या है?
कम समय में ज्यादा मुनाफा.