धान से नहीं मिली कमाई, धनिया ने बना दिया मालामाल! एक एकड़ में ₹50,000 कमा रहा किसान

Success Story: छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसान ने धान छोड़ धनिया की खेती से अपनी किस्मत बदली. एक एकड़ में करीब ₹50,000 तक की कमाई कर दूसरों के लिए भी नई राह खोल दी है.
धान से नहीं मिली कमाई, धनिया ने बना दिया मालामाल! एक एकड़ में ₹50,000 कमा रहा किसान

किसान नेड्रिप सिंचाई अपनाकर न केवल पैदावार बढ़ाई बल्कि श्रम लागत भी कम की. (फोटो सोर्स: Chhattisgarh Govt)

Success Story: जहां पारंपरिक खेती में लागत बढ़ने और मुनाफा घटने से किसान परेशान हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के एक किसान ने फसल बदलकर अपनी तकदीर बदल दी. धान की जगह धनिया की खेती (Coriander Farming) अपनाकर इस किसान ने न सिर्फ बेहतर उत्पादन हासिल किया, बल्कि एक एकड़ में करीब ₹50,000 तक की कमाई कर दूसरों के लिए भी नई राह खोल दी है.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसान निरंजन पटेल लीक से हटकर 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' को अपनाया और अपनी मेहनत व आधुनिक तकनीक के संगम से धनिया की खेती को फायदा का सौदा बना दिया.

आखिर धनिया की खेती इतनी फायदेमंद क्यों साबित हुई?

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कम लागत, बेहतर बाजार कीमत और आधुनिक तकनीक (ड्रिप सिंचाई) ने धनिया की खेती को ज्यादा मुनाफेदार बना दिया.

नकदी फसलों को बढ़ावा दे रही सरकार

छत्तीसगढ़ सरकार की उद्यानिकी योजनाओं का फायदा उठाकर किसान अब नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत धनिया की खेती ने किसानों की आय में डेढ़ गुना तक की बढ़ोतरी की है.

राज्य सरकार के किसान हितैषी नीतियों एवं किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार उद्यानिकी फसलों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए सब्सिडी के साथ-साथ प्रशिक्षण एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है.

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तकनीक का कितना रोल रहा?

  • ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों के प्रयोग से न केवल पानी की बचत हो रही है, बल्कि बाजार में फसल की गुणवत्ता के कारण बेहतर दाम भी मिल रहे हैं.

निरंजन ने पारंपरिक खेती क्यों छोड़ी?

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के मुताबिक, किसान निरंजन पटेल पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें उन्हें ज्यादा लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

वर्ष 2025-26 में किसान ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHB) के तहत 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' के तहत धनिया की खेती अपनाई. उन्होंने अपनी 0.40 हेक्टेयर पूरी सिंचित भूमि में उन्नत किस्मों कस्तूरी धनिया और अंकुर धनिया का उत्पादन शुरू किया.

आधुनिक तकनीक के रूप में उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation System) का उपयोग किया, जिससे जल की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई.

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सरकार से क्या मिला सपोर्ट?

  • सब्सिडी- उद्यानिकी विभाग द्वारा उन्हें 0.40 हेक्टेयर के लिए ₹8,000 की सब्सिडी DBT के जरिए दी गई. इससे उन्हें शुरुआती लागत में राहत मिली.

क्या मिला फायदा?

  • उत्पादन- पहले जहां वे धान की खेती से प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल उत्पादन करते थे. वहीं अब धनिया अपनाने के बाद उनको लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिला.
  • कमाई- धान की खेती से लगभग ₹30,000 की सीमित आय होती थी, लेकिन धनिया की खेती से उनकी कुल आय बढ़कर लगभग 50,000 प्रति एकड़ हो गई.

आसपास के किसानों पर क्या असर?

पटेल अपनी उपज का विक्रय पिथौरा एवं बागबाहरा मंडियों में करते है. वर्तमान में वे अपने काम से संतुष्ट हैं. उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और धनिया जैसी नगदी फसलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.

विवरणपारंपरिक धान की खेतीधनिया की खेती
खेती का क्षेत्र1 एकड़0.40 हेक्टेयर
तकनीकपारंपरिक सिंचाईड्रिप सिंचाई प्रणाली
बीज की किस्मसामान्य धानकस्तूरी औरअंकुर धनिया
सरकारी सहायता-₹8,000 अनुदान
उत्पादन (प्रति एकड़)21 क्विंटल35 क्विंटल
कुल आय (प्रति एकड़)₹30,000₹50,000
मुख्य लाभसीमित आय, अधिक श्रम1.5 गुना अधिक कमाई

धनिया की खेती का सही तरीका

अगर आप भी धनिया से मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इन तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दें-

  • उन्नत किस्मों का चयन- कस्तूरी और अंकुर जैसी किस्में अधिक सुगंध और ज्यादा पत्तियों के लिए जानी जाती हैं.
  • खेत की तैयारी- मिट्टी को भुरभुरा बना लें और जल निकासी का उचित प्रबंध रखें.
  • ड्रिप सिंचाई- धनिया की फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. ड्रिप तकनीक से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं.
  • पोषण प्रबंधन- जैविक खाद के साथ-साथ संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें.
  • कटाई और ग्रेडिंग- धनिया की पत्तियों की समय पर कटाई करें और मंडी ले जाने से पहले ग्रेडिंग करें ताकि अच्छे दाम मिलें.

कंक्लूजन

अगर आप धान जैसी पारंपरिक फसलों में फंसे हैं, तो 'मसाला क्षेत्र विस्तार योजना' आपके लिए गेम-चेंजर हो सकती है. उद्यानिकी फसलों में जोखिम कम और बाजार की मांग हमेशा बनी रहती है. सरकार द्वारा मिलने वाला DBT अनुदान आपकी शुरुआती लागत को कम करता है, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. क्या धनिया की खेती हर जगह लाभदायक है?
सही मौसम और बाजार मिलने पर हां.

Q2. क्या इसमें लागत ज्यादा होती है?
धान के मुकाबले कम या बराबर, लेकिन मुनाफा ज्यादा.

Q3. क्या सरकारी मदद मिलती है?
हां, राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं से.

Q4. सबसे बड़ा फायदा क्या है?
कम समय में ज्यादा मुनाफा.


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