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इस मॉडल में एक फसल खराब होने पर दूसरी आर्थिक सुरक्षा देती है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Success Story: सिर्फ एक हफ्ते में ₹50,000 की कमाई! यह सुनकर हैरानी होना लाजिमी है, लेकिन गुजरात की महिला किसान अरविंदाबेन गामित ने इसे सच कर दिखाया है. जीरो बजट फार्मिंग (Zero Budget Farming) अपनाकर उन्होंने न सिर्फ खेती की लागत लगभग खत्म कर दी, बल्कि 1 एकड़ जमीन पर 22 फसलें उगाकर कमाई का नया मॉडल भी पेश किया है, जो आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है.
रासायनिक खेती के कारण सेहत पर पड़ रहे प्रभाव और कैंसर जैसी बीमारियों की बढ़ती आशंका ने किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है. ऐसे में गुजरात प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देकर नई हरित क्रांति का नेतृत्व कर रहा है.
क्योंकि रासायनिक खेती-
जबकि प्राकृतिक खेती-
हां, अरविंदाबेन इसका जीवंत प्रमाण हैं. उन्होंने रासायनिक खादों को पूरी तरह त्याग कर जीवामृत (गोबर-गौमूत्र का मिश्रण) और बीजामृत को अपनाया है. परिणाम? मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, पानी की खपत कम हुई और फसलें प्राकृतिक रूप से रोग-प्रतिरोधक बन गईं.
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यह 'जीरो बजट फार्मिंग' का मुख्य आधार है. अरविंदाबेन एक ही जमीन पर मुख्य फसल के साथ-साथ दालें, सब्जियां और फल उगाती हैं. इससे-
1. बीजामृत क्या है?
बीज को रोगों से बचाने का प्राकृतिक तरीका.
2. जीवामृत क्या है?
मिट्टी में अच्छे सूक्ष्म जीव बढ़ाता है और जमीन को उपजाऊ बनाता है.
3. बिना केमिकल कैसे बचती है फसल?
प्राकृतिक घोल (गोबर, गोमूत्र)
पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
परंपरागत खेती में बीज, खाद और कीटनाशक पर भारी खर्च होता है. वहीं, जीरो बजट फार्मिंग में गाय का गोबर और गौमूत्र का इस्तेमाल से लागत लगभग जीरो. आरविंदाबेन ने 30 गुंठा जमीन से 2 टन प्याज उगाया. इसे उन्होंने घर बैठे 25 रुपए प्रति किलो के भाव पर बेचा. महज एक हफ्ते में उन्हें लगभग 50,000 रुपए की आमदनी हुई.
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, प्राकृतिक खेती अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. वर्तमान में गुजरात के 8 लाख से ज्यादा किसान रासायनिक खेती को अलविदा कह चुके हैं और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर कम लागत में ज्यादा आय कमा रहे हैं.
इस मॉडल से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधर रही है. प्राकृतिक खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. इसमें बीजामृत से बीजों को सुरक्षा मिलती है, जबकि जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्म जीवों को बढ़ावा देता है. परिणामस्वरूप फसलें रोग-प्रतिरोधक बनती हैं और उत्पादन बढ़ता है. अरविंदाबेन गामित जैसी महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं.
अगर आप किसान हैं और जीरो बजट फार्मिंग शुरू करना चाहते हैं तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करें. अपनी पूरी जमीन के बजाय पहले 10% हिस्से पर प्राकृतिक खेती आजमाएं. एक देसी गाय पालें, जो कम से कम 30 एकड़ जमीन के लिए जीवामृत बनाने के लिए पर्याप्त है.
अरविंदाबेन गामित की कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि भारत की खेती के भविष्य की झलक है. कम लागत, ज्यादा मुनाफा और हेल्दी फूड- अगर यही मॉडल फैलता है, तो आने वाले समय में खेती का पूरा गेम बदल सकता है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1. क्या जीरो बजट फार्मिंग सच में संभव है?
A. हां, सही तकनीक और धैर्य से संभव है.
Q2. क्या उत्पादन कम हो जाता है?
A. शुरुआत में थोड़ा फर्क हो सकता है, लेकिन बाद में स्थिर और अच्छा उत्पादन मिलता है.
Q3. क्या हर फसल में लागू है?
A. ज्यादातर फसलों में लागू किया जा सकता है.
Q4. क्या मार्केट में अच्छे दाम मिलते हैं?
A. ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स को अक्सर बेहतर कीमत मिलती है.