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नौकरी छोड़कर खेती-किसानी में युवा अपना करियर बना रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
Success Story: आज के समय में खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि कमाई और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बनती जा रही है. खासकर शिमला मिर्च जैसी हाई-वैल्यू फसलों की खेती किसानों को बेहतर मुनाफा दे रही है. कम लागत में अधिक उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसान तेजी से आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. अगर सही तकनीक, समय पर देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं, तो शिमला मिर्च की खेती किसानों की आय कई गुना बढ़ा सकती है.
बिहार के कैमूर जिले के युवा किसान अमित कुमार पांडेय इसकी बेहतरीन मिसाल हैं. कभी एग्रो-केमिकल कंपनी में नौकरी करने वाले अमित ने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया और खेती को अपना भविष्य बनाया. आज वह पॉलीहाउस में आधुनिक तरीके से शिमला मिर्च की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं.
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बिहार कृषि विभाग के मुताबिक, गांव की मिट्टी और अपनों का साथ मिलकर अमित को वापस गांव खींच लाए. नौकरी में मन नहीं लगने के बाद उन्होंने खेती में हाथ आजमाने का फैसला किया. शुरुआत में वह खुले खेत में खेती करते थे, लेकिन वहां फसल सुरक्षित नहीं रहती थी. इसके बाद उन्होंने पॉलीहाउस तकनीक अपनाई, जिससे फसल को नीलगाय, जानवरों और कीटों से सुरक्षा मिलने लगी.
अमित का पॉलीहाउस करीब 50 डेसिमल क्षेत्र में बना है। इसे तैयार करने में करीब 20 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें उद्यान विभाग की ओर से 90 फीसदी तक अनुदान मिला. पॉलीहाउस में तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे ज्यादा गर्मी और सर्दी का असर फसलों पर नहीं पड़ता.
अमित ने पॉलीहाउस में मल्चिंग बेड तैयार करवाया है और सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया है. गर्मी के मौसम में तापमान नियंत्रित रखने के लिए फॉगर की व्यवस्था भी की गई है. उन्होंने करीब 4 हजार शिमला मिर्च के पौधे लगाए हैं और एक पौधे से 2 से 3 किलो तक उत्पादन मिलने की उम्मीद है.
उनका कहना है कि पॉलीहाउस में खेती करना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है. फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.
अमित की सफलता में कृषि विभाग और 'आत्मा' (ATMA) कैमूर की बड़ी भूमिका रही है. प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने आधुनिक खेती की बारीकियां सीखीं. आत्मा कैमूर द्वारा उन्हें राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ (उत्तर प्रदेश) में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिलाया गया.
जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा कैमूर विकास कुमार के अनुसार, जिले के किसानों को समय-समय पर आधुनिक खेती और नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि किसान अपनी आय बढ़ा सकें और खेती को एक सफल उद्यम बना सकें.
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अमित की शिमला मिर्च की पहली फसल अच्छी रही है और उन्हें अगली फसल से भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद है. उनकी सफलता को देखकर गांव के दूसरे युवा भी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. आज अमित यह साबित कर रहे हैं कि आधुनिक तकनीक और सही योजना के साथ खेती भी शानदार करियर विकल्प बन सकती है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 शिमला मिर्च की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है?
शिमला मिर्च की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
Q2 शिमला मिर्च की खेती का सही समय क्या है?
इसकी बुवाई अगस्त-सितंबर और जनवरी-फरवरी में की जाती है. पॉलीहाउस में इसकी खेती सालभर की जा सकती है.
Q3 शिमला मिर्च की खेती खुले खेत में बेहतर है या पॉलीहाउस में?
पॉलीहाउस में खेती अधिक सुरक्षित और लाभदायक मानी जाती है क्योंकि इसमें तापमान नियंत्रित रहता है और फसल कीट व जानवरों से सुरक्षित रहती है.