₹33 हजार का निवेश और ₹55 हजार का मुनाफा! जानें कैसे एक छोटे बिजनेस ने बदली इस ग्रामीण महिला की जिंदगी

Success Story: अनुसुइया नेताम का परिवार पहले मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर था. वर्षा आधारित खेती होने के कारण कई बार फसल अच्छी नहीं होती थी, जिससे परिवार की आय अस्थिर और सीमित रहती थी. लेकिन अब बिजनेस से मोटी कमाई कर रही हैं.
₹33 हजार का निवेश और ₹55 हजार का मुनाफा! जानें कैसे एक छोटे बिजनेस ने बदली इस ग्रामीण महिला की जिंदगी

(Image- Chhattisgarh Govt)

Success Story: कम लागत और कम जगह में शुरू होने वाला मुर्गी पालन (Poultry Farming) ग्रामीण क्षेत्रों में एक उभरता हुआ मुनाफे का बिजनेस बन रहा है. सही प्रशिक्षण, थोड़े निवेश और सरकारी योजनाओं की मदद से ग्रामीण क्षेत्र के लोग इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले की अनुसुइया नेताम ने मुर्गी पालन से न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सफल उद्यमिता की मिसाल भी पेश की.

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के जरिए महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. जो महिलाएं पहले केवल घर और परिवार तक सीमित थीं, आज वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं.

मजदूरी छोड़ बनीं मालिक

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छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक, अनुसुइया नेताम का परिवार पहले मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर था. वर्षा आधारित खेती होने के कारण कई बार फसल अच्छी नहीं होती थी, जिससे परिवार की आय अस्थिर और सीमित रहती थी. आय कम होने के कारण घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था.

30 हजार लोन लेकर शुरू की बिजनेस

इस परिस्थिति से उबरने के लिए उन्होंने जय मां संतोषी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को आजीविका के रूप में अपनाने का फैसला लिया. समूह के माध्यम से उन्होंने 30,000 रुपए का लोन लेकर मुर्गी पालन बिजनेस की शुरुआत की. धीरे-धीरे इस बिजनेस से उन्हें अच्छी आमदनी मिलने लगी.

समूह से जुड़ने के बाद बचत का महत्व जाना

उन्होंने समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत का महत्व, डेट मैनेजमेंट और छोटे बिजनेस के संचालन की जानकारी मिली. साथ ही महिलाओं को आय बढ़ाने के विभिन्न तरीकों और शासकीय योजनाओं के बारे में भी मार्गदर्शन हासिल हुआ, जिससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जागृत हुई. वे ‘सूर्या महिला ग्राम संगठन बेलोंडी’ और ‘आशा महिला क्लस्टर संगठन अमाबेड़ा’ की बैठकों में भी नियमित रूप से भाग लेने लगीं.

ऐसे हुई शुरुआत

  • बिजनेस की शुरुआत में उन्होंने लगभग 360 देशी चूजों की खरीदी की.
  • इस पर करीब 11,880 रुपए खर्च हुए.
  • इसके अतिरिक्त दाना, पानी के बर्तन, वैक्सीन और टॉनिक आदि पर भी खर्च किया गया.
  • इस प्रकार मुर्गी पालन व्यवसाय में कुल मिलाकर लगभग 33,360 रुपए का शुरुआती निवेश किया गया.

कितनी हुई कमाई

अनुसुइया नेताम ने कुछ महीनों की मेहनत के बाद मुर्गियां अच्छी तरह विकसित होकर बिक्री के लिए तैयार हुईं. इसके बाद उन्होंने लगभग 200 मुर्गियां बेचकर 55 हजार रुपए की नेट कमाई की. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और अब बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है.

स्व-सहायता समूह, ग्राम संगठन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से अनुसुइया नेताम ने मुर्गी पालन के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: अनुसुइया नेताम ने मुर्गी पालन का व्यवसाय कैसे शुरू किया?
जवाब: अनुसुइया जी ने एक स्व-सहायता समूह से जुड़कर ₹30,000 का लोन लिया.

सवाल: इस बिजनेस को शुरू करने में कुल कितना निवेश लगा?
जवाब: मुर्गी पालन शुरू करने के लिए उन्होंने कुल ₹33,360 का निवेश किया.

सवाल: उन्हें इस बिजनेस से कितनी कमाई हुई?
जवाब: उन्होंने लगभग 200 मुर्गियां बेचकर ₹55,000 का नेट मुनाफा कमाया.

सवाल: इस सफलता में सरकारी योजनाओं की क्या भूमिका रही?
जवाब: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और महिला स्व-सहायता समूह के जरिए वित्तीय सहायता मिली.

सवाल: क्या मुर्गी पालन के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है?
जवाब: हां.

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