&format=webp&quality=medium)
बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन. (Image- Chhattisgarh Govt.)
Success Story: 'जहां चाह वहां राह', इस कहावत को चरितार्थ किया है छत्तीसगढ़ के किसान रामा मरकाम ने. पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर किसान ने 'बॉयोफ्लॉक' तकनीक के जरिए मछली पालन को आय का मुख्य जरिया बनाया. सरकार से मिले 4.50 लाख रुपये के अनुदान और अपनी मेहनत के दम पर रामा न केवल 3.50 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया, बल्कि जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए.
मछली पालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीणों को स्वरोजगार का अवसर मिल रहे हैं. शासन की योजनाओं के समुचित मुनाफा और इनोवेशन के माध्यम से अब ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं.
छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक, विकासखंड रामचंद्रपुर के तहत ग्राम मितगई निवासी रामा मरकाम ने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर मछली पालन को प्रॉफिटेबल बिजनेस में बदल दिया है. सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक सोच और शासन की योजनाओं का फायदा लेकर मरकाम ने अपनी निजी भूमि पर बयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मरकाम को सरकार से 4 लाख 50 हजार रुपये का अनुदान हासिल हुआ, जिससे उन्होंने आधुनिक मछली पालन इकाई की स्थापना की.
पिछले वर्ष उनके बयोफ्लॉक तालाब से लगभग 40 क्विंटल मछली का उत्पादन हुआ. लोकल मार्केट में बेहतर मांग और वाजिब दाम मिलने से उन्हें 6 लाख रुपये की कुल आय मिली. उत्पादन लागत निकालने के बाद 3 लाख 50 हजार रुपये का नेट मुनाफी कमाया.
रामा मरकाम ने बताया कि शासन की इस योजना से उन्हें अच्छा मुनाफा मिला है. विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से वे आधुनिक पद्धति से मछली पालन कर बेहतर कमाई कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ी आर्थिक उपलब्धि हासिल की जा सकती है. मरकाम की सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. वे इस वर्ष उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आय को दोगुना करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
उनका मानना है कि अगर युवा पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक आजीविका के रूप में आधुनिक मछली पालन अपनाएं तो आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग और भी सुदृढ़ हो सकता है. बता दें कि PMMSY के माध्यम से शासन आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अच्छी पहल है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है.
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) साल 2020 को शुरू की गई थी.
इस योजना का उद्देश्य 5 साल की अवधि में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास के माध्यम से नीली क्रांति लाना है.
इस योजना के माध्यम से मछली पालन बिजनेस से जुड़े हुए लोगों की आय में बढ़ोतरी करने के साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार करना है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 रामा मरकाम ने किस तकनीक से मछली पालन शुरू किया?
बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर मछली पालन को फायदेमंद बिजनेस में बदला.
Q2 बायोफ्लॉक तकनीक क्या है?
बायोफ्लॉक तकनीक में विशेष लाइनरयुक्त टैंक में नियंत्रित वातावरण तैयार कर कम पानी और सीमित स्थान में मछलियों का पालन किया जाता है
Q3 रामा मरकाम को कितनी सब्सिडी मिली?
PMMSY के तहत 4.50 लाख रुपये का अनुदान मिला.
Q4 कितनी कमाई और मुनाफा हुआ?
कुल आय करीब 6 लाख रुपये और मुनाफा लगभग 3.50 लाख रुपये.
Q5 PMMSY क्या है?
इसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र का सतत विकास करना और मछली पालकों की आय बढ़ाना है.